By: Ravindra Sikarwar
भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, और यह बात एक बार फिर साबित की है सिर्फ 3 साल के सर्वज्ञ सिंह कुशवाहा ने, जो अब भारत के सबसे कम उम्र के FIDE रेटेड शतरंज खिलाड़ी बन चुके हैं। इतनी छोटी उम्र में यह उपलब्धि हासिल करना न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि देश के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
सर्वज्ञ की यह उपलब्धि दर्शाती है कि शतरंज जैसी बुद्धिमानी पर आधारित खेल में उम्र नहीं, बल्कि प्रतिभा और जुनून मायने रखते हैं। जहां एक आम बच्चा 3 साल की उम्र में अभी बोलने और लिखने का अभ्यास कर रहा होता है, वहीं सर्वज्ञ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेटिंग हासिल कर चुके हैं।
शतरंज की शुरुआत और पारिवारिक सहयोग
सर्वज्ञ के पिता बताते हैं कि उन्होंने बेटे में दिमागी तेज़ी और तार्किक सोच बहुत कम उम्र में ही देख ली थी। मोबाइल पर ब्लॉक्स गेम, मेमोरी गेम और पैटर्न रिकग्निशन गेम्स खेलते हुए सर्वज्ञ की रूचि धीरे-धीरे शतरंज की तरफ बढ़ी। जैसे ही उसके माता-पिता ने यह देखा कि बच्चे की सोच पैटर्न-आधारित खेलों की ओर है, उन्होंने उसे शतरंज की बुनियादी चालें सिखाना शुरू कर दिया।
धीरे-धीरे सर्वज्ञ ने न सिर्फ चालें सीखीं, बल्कि ओपनिंग, मिडिल गेम और एंड गेम की रणनीतियों को समझना भी शुरू कर दिया, जो इतनी कम उम्र में बेहद दुर्लभ माना जाता है।
पहला टूर्नामेंट और ऐतिहासिक पल
जब सर्वज्ञ को पहली बार किसी आधिकारिक शतरंज चैंपियनशिप में उतारा गया, तब कई लोगों ने सोचा कि वह सिर्फ मज़े के लिए खेल रहा है। लेकिन जैसे ही वह बोर्ड पर बैठा, उसकी चालों ने सबको हैरान कर दिया।
कहा जाता है कि उसके सामने बैठे कई बड़े खिलाड़ी उसकी गहरी रणनीतियों और पैटर्न पढ़ने की क्षमता देखकर चकित रह गए। टूर्नामेंट खत्म होने तक सर्वज्ञ ने न सिर्फ सम्मानजनक प्रदर्शन किया, बल्कि FIDE (World Chess Federation) की आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय रेटिंग हासिल कर ली।
इतिहास में दर्ज होगा नाम
शतरंज में FIDE रेटिंग पाने के लिए प्रतियोगिता में निश्चित प्रदर्शन, निर्धारित स्कोर और योग्य खिलाड़ियों के खिलाफ जीत आवश्यक होती है। इतनी कम उम्र में यह शर्तें पूरी करना बेहद कठिन है।
सर्वज्ञ अब भारत के इतिहास में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी के रूप में दर्ज हो चुके हैं जिन्होंने FIDE रेटिंग हासिल की है।
यह रिकॉर्ड पहले कई प्रतिभाशाली बच्चों के नाम रहा है, लेकिन अब सर्वज्ञ ने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है।
भविष्य की उम्मीदें और राष्ट्रीय गर्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से सर्वज्ञ खेलता रहा, तो आने वाले वर्षों में वह अंतरराष्ट्रीय शतरंज मास्टर, ग्रैंडमास्टर और विश्व चैम्पियनशिप के दावेदार बन सकते हैं।
शतरंज में भारत को पहले ही विश्वनाथन आनंद, प्रज्ञानानंद और गुकेश जैसे सितारे मिले हैं। सर्वज्ञ की यह उपलब्धि इस सूची में एक और चमकदार नाम जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
सर्वज्ञ सिंह कुशवाहा केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं — कि प्रतिभा की कोई उम्र नहीं होती, बस सही दिशा, समर्थन और विश्वास की जरूरत होती है।
