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By: Ravindra Sikarwar

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में छात्राओं के विद्यालय छोड़ने की घटनाओं पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने इस मुद्दे पर गहन जांच और सतर्क निगरानी के सख्त आदेश जारी किए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की एक महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के पिछले दो वर्षों के कार्यों की समीक्षा की और विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कुपोषण उन्मूलन, आंगनबाड़ी केंद्रों की मजबूती और बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर दिया। बैठक में सहकारिता विभाग की उपलब्धियों का भी जिक्र हुआ, जहां मंत्री विश्वास सारंग ने अपेक्स बैंक के लाभांश का चेक मुख्यमंत्री को सौंपा। हालांकि, कुछ विभागों की समीक्षा बैठक मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली रवाना होने के कारण स्थगित हो गई।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण है, लेकिन हालिया रिपोर्ट्स में बड़ी संख्या में छात्राओं के स्कूल छोड़ने की खबरें चिंताजनक हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इसकी वजहों की गहन जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि योजना की सफलता तभी संभव है जब हर लाभार्थी छात्रा अपनी शिक्षा पूरी करे। इसके लिए विभाग को नियमित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने के आदेश दिए गए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगले तीन वर्षों में राज्य से कुपोषण को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है, और इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को विशेष संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए सामग्री खरीद की निविदा प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए और चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बाल विकास की नींव हैं, इसलिए इनकी गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए तीन वर्षीय कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिसमें शहरी क्षेत्रों में सेंट्रल किचन के माध्यम से गर्म भोजन की व्यवस्था शामिल है। यह नई व्यवस्था वर्ष 2026 से लागू की जाएगी, जिससे बच्चों को पौष्टिक भोजन मिल सकेगा और कुपोषण की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण हो सकेगा।

विजन-2047 के अनुरूप, शाला पूर्व शिक्षा पर बड़े निवेश की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने निपुण भारत आधारित विकास कार्ड को अपनाने पर जोर दिया, जो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाएगा। बैठक में बताया गया कि राज्य में 34 लाख से अधिक बालिकाओं को छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। लाड़ली लक्ष्मी योजना का विस्तार करते हुए, अगले तीन वर्षों में 9,000 नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा, हेल्थ एंड एजुकेशन वेलफेयर (HEW) के माध्यम से 1.47 लाख से अधिक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं, जिनमें जेंडर समानता, सुरक्षा और कानूनी सहायता जैसे विषय शामिल हैं। राज्य में 12,670 आंगनबाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम आंगनबाड़ी’ के रूप में घोषित किया गया है, जो उनकी उन्नत सुविधाओं और प्रभावी संचालन को दर्शाता है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृवंदन योजना के तहत 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को 512 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत जनवरी 2024 से नवंबर 2025 तक 36,778 करोड़ रुपये का अंतरण किया गया, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। महिला हेल्पलाइन के माध्यम से 1.72 लाख महिलाओं को आवश्यक सहायता दी गई, जबकि वन स्टॉप सेंटरों ने 52,095 महिलाओं को सुरक्षा और समर्थन प्रदान किया। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को और मजबूत बनाने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत बालिकाओं की सुरक्षा और शिक्षा पर विशेष फोकस है।

सहकारिता विभाग की समीक्षा में मंत्री विश्वास सारंग ने मुख्यमंत्री को अपेक्स बैंक के लाभांश का चेक सौंपा, जिसकी राशि 4 करोड़ 27 लाख 4 हजार 190 रुपये है। विभाग ने छह जिला सहकारी बैंकों- जबलपुर, रीवा, सतना, ग्वालियर, दतिया और शिवपुरी- का विलय कर एक बड़ा प्रदेश स्तरीय सहकारी बैंक बनाने की पहल शुरू की है। इसके लिए कानूनी और आर्थिक प्रक्रियाएं चल रही हैं, और राज्य सरकार प्रत्येक बैंक को 50 करोड़ रुपये की पूंजी प्रदान करेगी। इससे सहकारी क्षेत्र में मजबूती आएगी और किसानों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

अन्य उपलब्धियों में 1.89 लाख पौधारोपण, 6,520 ड्राइविंग लाइसेंस प्रदान करना और 8,637 बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण देना शामिल है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रणाली अपनाई गई है, और 19,500 रिक्त पदों में से 99.48 प्रतिशत पर नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं। टेक-होम राशन (THR) प्रक्रिया में मध्य प्रदेश को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि स्पॉन्सरशिप योजना के तहत 20,243 बच्चों को लाभ मिला, जो राज्य को देश में दूसरा स्थान दिलाता है। झाबुआ जिले के मोटी आई नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से नवाजा गया, और पीएम जनमन भवनों की डिजाइन तथा मॉनिटरिंग मॉड्यूल के लिए केंद्र सरकार से विशेष सराहना मिली है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग की भी समीक्षा की, लेकिन कृषि, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभागों की समीक्षा नहीं हो सकी, क्योंकि डॉ. यादव को अचानक दिल्ली जाना पड़ा। दिल्ली में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और पन्ना, बैतूल, कटनी तथा चार अन्य क्षेत्रों में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों के भूमिपूजन का निमंत्रण दिया। यह कदम राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री की इस बैठक से स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश सरकार महिलाओं और बच्चों के कल्याण पर विशेष ध्यान दे रही है। लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी पहलों को मजबूत बनाने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि बेटियां न केवल जन्म लें बल्कि शिक्षा और विकास के माध्यम से सशक्त बनें। कुपोषण उन्मूलन और आंगनबाड़ी केंद्रों की उन्नति जैसे लक्ष्य राज्य को एक नई दिशा देंगे। सहकारिता विभाग की पहलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी, जबकि अन्य योजनाएं महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन सुनिश्चित करेंगी। सरकार की ये प्रयास विजन-2047 के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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