By: Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा प्रायोजित नई राइड-हेलिंग सेवा ‘भारत टैक्सी’ अगले महीने यानी जनवरी 2026 से पूर्ण रूप से शुरू हो जाएगी। यह सेवा निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों जैसे ओला, उबर और रैपिडो को चुनौती देने के लिए तैयार की गई है। सहकारिता मंत्रालय और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) के संयुक्त प्रयास से विकसित यह ऐप ड्राइवरों को सशक्त बनाने और यात्रियों को सस्ती व विश्वसनीय सुविधा प्रदान करने पर केंद्रित है। सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में दिए गए एक लिखित जवाब में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह सेवा ड्राइवरों की आय बढ़ाने और बाजार में पारदर्शिता लाने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
‘भारत टैक्सी’ का संचालन ‘सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड’ द्वारा किया जाएगा, जो एक बहु-राज्यीय सहकारी संस्था है। इसकी स्थापना 6 जून 2025 को हुई थी और इसमें आठ प्रमुख सहकारी संगठनों का समावेश है, जैसे राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी), आईएफएफसीओ, गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ), नाबार्ड, नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी), एनसीईएल और कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड। इस संस्था की अधिकृत पूंजी 300 करोड़ रुपये है, जो इसे मजबूत वित्तीय आधार प्रदान करती है। यह मॉडल निजी कंपनियों के उच्च कमीशन मॉडल से अलग है, जहां ड्राइवरों को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा प्लेटफॉर्म को देना पड़ता है।
इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत है इसका ‘जीरो कमीशन’ मॉडल। यहां ड्राइवरों को यात्रियों द्वारा भुगतान की गई पूरी राशि मिलेगी, बिना किसी कटौती के। कोई अधिशेष कमाई हुई तो वह सहकारी सदस्यों में ही वितरित हो जाएगी। इससे ड्राइवरों की मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। वर्तमान में, निजी ऐप्स पर ड्राइवरों को 20-30 प्रतिशत तक कमीशन देना पड़ता है, जो उनकी आजीविका को प्रभावित करता है। ‘भारत टैक्सी’ इस समस्या का समाधान करते हुए ड्राइवरों को स्वामित्व की भावना देगी, क्योंकि यह एक सहकारी उद्यम है, न कि निजी कंपनी।
दिल्ली में इसकी पायलट परियोजना पहले ही शुरू हो चुकी है। नवंबर 2025 से दिल्ली में 650 से अधिक कैबों के साथ परीक्षण चरण चल रहा है, जिसमें कारें, ऑटो-रिक्शा और बाइक टैक्सी शामिल हैं। अब तक 51,000 से अधिक ड्राइवरों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जो सेवा की लोकप्रियता का संकेत है। सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव के चेयरमैन जयेन मेहता ने बताया कि प्रारंभिक प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक रही है। वे कहते हैं, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘सहकार से समृद्धि’ का विजन इसी दिशा में एक कदम है। यह लाखों ड्राइवरों को लाभ पहुंचाएगा।” पायलट फेज में दिल्ली जैसे महानगरों पर फोकस किया गया है, जहां यातायात की समस्या सबसे अधिक है।
‘भारत टैक्सी’ ऐप की प्रमुख विशेषताएं इसे प्रतिस्पर्धियों से अलग करती हैं। यह यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस के साथ उपलब्ध होगा, जिसमें रीयल-टाइम ट्रैकिंग, सुरक्षित पेमेंट गेटवे और इमरजेंसी सपोर्ट जैसी सुविधाएं होंगी। यात्रियों के लिए किराया पारदर्शी होगा, बिना किसी सर्ज प्राइसिंग के। ड्राइवरों को प्रशिक्षण और बीमा कवरेज भी प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, ऐप पर्यावरण-अनुकूल वाहनों को प्राथमिकता देगा, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन, जो सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा देगा। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 1 लाख ड्राइवरों को जोड़ना है, और दिसंबर 2025 तक 20 शहरों में विस्तार करना है।
भारतीय राइड-हेलिंग बाजार तेजी से बढ़ रहा है। 2025 में इसकी वैल्यू 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है, लेकिन ड्राइवरों की शिकायतें आम हैं। ओला और उबर जैसी कंपनियां बाजार पर कब्जा जमाए हुए हैं, लेकिन उच्च कमीशन, अनियमित आय और कठोर शर्तें ड्राइवरों को परेशान कर रही हैं। रैपिडो ने बाइक टैक्सी सेगमेंट में मजबूत पकड़ बनाई है, लेकिन वह भी कमीशन-आधारित है। ‘भारत टैक्सी’ इन कमियों को दूर करने का प्रयास कर रही है। सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, यह सेवा न केवल ड्राइवरों को आर्थिक स्वतंत्रता देगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाएगी।
अमित शाह ने संसद में कहा, “यह पहल सहकारी क्षेत्र की ताकत को डिजिटल मोबिलिटी से जोड़ती है।” मार्च 2025 में ही उन्होंने इसकी घोषणा की थी। अब जनवरी 2026 के लॉन्च से पहले, टेक्नोलॉजी पार्टनर का चयन अंतिम चरण में है। आईआईएम बैंगलोर और अन्य कंसल्टेंट्स मार्केटिंग रणनीति तैयार कर रहे हैं। सदस्यता अभियान चलाकर देशभर में ड्राइवरों को जोड़ा जा रहा है।
हालांकि, चुनौतियां भी हैं। निजी खिलाड़ियों का वर्चस्व तोड़ना आसान नहीं होगा। सेवा की गुणवत्ता, ऐप की विश्वसनीयता और स्केलिंग पर निर्भर करेगा इसका सफल होना। यदि यह सफल रही, तो यह अन्य क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी साझेदारी का मॉडल बन सकती है। ड्राइवर संगठनों ने इसका स्वागत किया है, लेकिन वे अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, ‘भारत टैक्सी’ भारतीय अर्थव्यवस्था के सहकारी मॉडल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा करती है। यह न केवल परिवहन क्रांति लाएगी, बल्कि सामाजिक न्याय को भी मजबूत करेगी। यात्रियों को सस्ती सवारी और ड्राइवरों को सम्मानजनक आय – यही इसका मूल मंत्र है। जैसे-जैसे लॉन्च नजदीक आ रहा है, उत्साह बढ़ता जा रहा है। क्या यह ओला-उबर का खेल बदल देगी? समय ही बताएगा, लेकिन शुरुआत तो शानदार है।
