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By: Ravindra Sikarwar

राजधानी रायपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाने वाला नंदनवन एक बार फिर नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने इसे पुनर्जीवित करने और आधुनिक स्वरूप देने के लिए करीब 100 करोड़ रुपए के मेगा रिवाइवल प्लान को मंजूरी दी है। मंगलवार को वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने नंदनवन और नंदन पक्षी विहार का निरीक्षण किया, जहां वन विभाग के अधिकारियों ने इस बड़े प्रोजेक्ट की प्रस्तुति दी। इस मौके पर मंत्री ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि परियोजना की विस्तृत DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) जल्द से जल्द तैयार की जाए और निर्धारित समयसीमा में कार्य प्रारंभ हो। उन्होंने सुझाव दिया कि यह योजना सिर्फ निर्माण कार्य तक सीमित न रहकर आने वाले कई वर्षों के लिए विकास की दिशा तय करने वाला विजन डॉक्यूमेंट बने।

निरीक्षण के दौरान मंत्री कश्यप ने विदेशी प्रजातियों के पक्षियों और उनकी देखभाल व्यवस्था का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पक्षियों के लिए नस्ल आधारित आहार और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही विदेशी पक्षियों के प्रजनन और स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। इस दौरान नंदनवन से भावनात्मक रूप से जुड़े स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि नंदनवन को जल्द से जल्द नया और आकर्षक स्वरूप दिया जाए। मंत्री ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि उनके सुझावों को पुनर्निर्माण योजना में प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाएगा।

विधायक राजेश मूणत ने निरीक्षण के बाद कहा कि नंदनवन सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि रायपुरवासियों की यादों और भावनाओं से जुड़ा स्थान है। पिछले 40 वर्षो से यह पिकनिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए सबसे खास जगह रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में नंदनवन की प्राकृतिक हरियाली, वन संरचना और जैव विविधता को किसी भी तरह नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को विस्तृत और त्रुटिरहित DPR जल्द तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि कार्यान्वयन के दौरान कोई कमी न रह जाए।

सरकार की इस योजना का उद्देश्य नंदनवन को एक बायोडायवर्सिटी थीम पार्क के रूप में विकसित करना है, जहां पर्यावरण संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण और प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिले। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद नंदनवन सिर्फ दर्शनीय स्थल ही नहीं, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और पर्यावरण जागरूकता का भी केंद्र बनेगा। निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान मंत्री कश्यप के साथ वरिष्ठ वन अधिकारी, जिला प्रशासन और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

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