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By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बरेली क्षेत्र में सोमवार सुबह करीब 10:50 बजे एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। बरेली-पिपरिया मार्ग पर स्थित नयागांव का तकरीबन 40 वर्ष पुराना पुल अचानक भरभराकर गिर गया। पुल का लगभग 50 फीट लंबा हिस्सा ढहने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दस से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में बाइक सवार और पुल के नीचे मरम्मत का काम कर रहे मजदूर शामिल हैं।

हादसे के समय पुल के नीचे पिछले आठ दिनों से मरम्मत का काम चल रहा था। मजदूरों ने जैसे ही पुल के ढहने की आहट सुनी, वे जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे। गनीमत रही कि कोई भी मजदूर मलबे के नीचे नहीं दबा, लेकिन छह मजदूरों को चोटें आईं। इधर पुल के ऊपर से दो बाइक सवार गुजर रहे थे। जैसे ही वे पुल के बीच में पहुंचे, पुल का हिस्सा उनके नीचे से खिसक गया और दोनों बाइकें समेत नीचे जा गिरीं। इनमें सवार चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतक की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय सूत्रों के अनुसार एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई।

घायलों को तुरंत बरेली के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चार गंभीर घायलों — जगदीश केवट (बुधनी), महेश (बुधनी), देवेंद्र सिंह (धोखेड़ा) और देवेंद्र लोधी (विदिशा) — को बेहतर इलाज के लिए भोपाल रेफर कर दिया गया। बाकी घायलों का बरेली और आसपास के अस्पतालों में इलाज चल रहा है। मजदूरों में शुभम लोधी, सचिन यादव, सोमनाथ नामदेव, प्रवीण, अवधेश लोधी आदि को हल्की-फुल्की चोटें आईं। सभी मजदूर विदिशा जिले के सोसरा क्षेत्र के रहने वाले हैं।

हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा, पुलिस अधीक्षक अशुतोष गुप्ता, एसडीओपी, तहसीलदार और बरेली थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। कलेक्टर ने अस्पताल में घायलों से मुलाकात की और डॉक्टरों को हर संभव इलाज के निर्देश दिए। राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने सभी पुराने पुलों की तत्काल जांच कराने और सुरक्षा मानकों को दुरुस्त करने के सख्त आदेश दिए। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि 40 साल से अधिक पुराने पुलों को प्राथमिकता के आधार पर जांचा जाए, चाहे वे राष्ट्रीय राजमार्ग पर हों या राज्य राजमार्ग पर।

प्रशासनिक कार्रवाई भी त्वरित हुई। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के फील्ड स्टाफ प्रबंधक ए.ए. खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। मुख्य अभियंता गोपाल सिंह की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है, जो सात दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। एमपीआरडीसी के एक अधिकारी ने दावा किया कि पुल 1980 में बना था और 2003 में इसकी तकनीकी जांच हुई थी, जिसमें यह मजबूत पाया गया था। फिर भी मरम्मत कार्य चल रहा था। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब पुल पर काम चल रहा था, तब भारी वाहनों को गुजरने की इजाजत क्यों दी गई और पुल को पूरी तरह बंद क्यों नहीं किया गया?

इस हादसे के बाद यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। बरेली-रायसेन मार्ग बंद होने से वाहनों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। पुलिस ने सिलारी चौकी से ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया है। भोपाल जाने वाले वाहनों को होशंगाबाद (नर्मदापुरम) होते हुए वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी जा रही है। पिपरिया-बरेली-भोपाल रूट फिलहाल पूरी तरह बंद है।

यह हादसा एक बार फिर राज्य में पुरानी संरचनाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस मार्ग पर मौजूद छह-सात पुराने पुलों की खस्ता हालत की शिकायत कर रहे थे, लेकिन सिर्फ मामूली मरम्मत ही होती रही। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इन पुलों का पुनर्निर्माण या मजबूतीकरण किया जाता, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टल जाता। अब जबकि एक जिंदगी चली गई और कई परिवार सदमे में हैं, उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन पुराने पुलों की जांच को गंभीरता से लेगा और भविष्य में ऐसी अनहोनी को रोका जा सकेगा।

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