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By: Ravindra Sikarwar

ग्वालियर: शादियों का मौसम आते ही ग्वालियर में एक खतरनाक “बच्चा गैंग” ने पुलिस की नींद उड़ा रखी है। 10-14 साल के मासूम दिखने वाले ये बच्चे शादी समारोह में मेहमान बनकर घुसते हैं, फलदान उठाकर भागते हैं और महिलाओं के पर्स-झोले से गहने-पैसे साफ कर देते हैं। पिछले सिर्फ छह दिनों में इस गैंग ने दो बड़ी शादियों से कुल 41 लाख रुपए से ज्यादा की नकदी और जेवरात पार कर दिए। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये बच्चे इतने शातिर हैं कि सीसीटीवी में भी पकड़ में नहीं आ रहे।

पहली बड़ी वारदात 26 नवंबर की रात को शहर के पॉश इलाके सिटी सेंटर स्थित अभिनंदन वाटिका में हुई। यहां एक प्रभावशाली परिवार की लड़की की शादी थी। फलदान रखने की रस्म के दौरान मेहमानों की भीड़ में 11-12 साल का एक बच्चा (हरे कुर्ते में) फलदान के पास पहुंचा। उसने देखते-ही-देखते 11 लाख रुपए से भरा फलदान उठाया और भीड़ का फायदा उठाकर बाहर निकल गया। पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हुई, लेकिन बच्चा इतनी तेजी से गायब हुआ कि किसी को पता तक नहीं चला। परिजनों को तब खबर हुई जब फलदान गिनने की बारी आई।

दूसरी वारदात 30 नवंबर को मुरार क्षेत्र के एक बड़े बैंक्वेट हॉल में हुई। यहां दुल्हन के रिश्तेदारों ने दावा किया कि उनकी तीन महिलाओं के पर्स से कुल 30 लाख रुपए के सोने-चांदी के गहने और नकदी गायब हो गए। परिजनों का कहना है कि शादी में कुछ बच्चे बार-बार दुल्हन के कमरे के आसपास घूमते दिखे। एक बच्ची तो दुल्हन के साथ फोटो भी खिंचवाकर भागी। बाद में पता चला कि उसी दौरान पर्स खाली कर दिए गए।

पुलिस सूत्र बता रहे हैं कि यह गैंग 8 से 15 साल तक के 15-20 बच्चों का है, जो अलग-अलग शहरों से लाए जाते हैं। इनके साथ 3-4 बड़े लोग भी रहते हैं, जो बाहर वाहन लेकर इंतजार करते हैं और बच्चों को कवर देते हैं। बच्चे इसलिए चुने जाते हैं क्योंकि कोई उन पर शक नहीं करता और कानूनी रूप से भी इन्हें बाल सुधार गृह भेजने के अलावा कुछ नहीं किया जा सकता। ज्यादातर बच्चे उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद, आगरा और इटावा के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

क्राइम ब्रांच ने दो बच्चों को पकड़ने का दावा किया है, लेकिन वे नाम-पता बदल-बदल कर बता रहे हैं।

शहर के बड़े बैंक्वेट हॉल और मैरिज गार्डन संचालकों ने अब सख्ती उपाय शुरू कर दिए हैं। कई जगहों पर बच्चों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। कुछ जगहों पर महिला कर्मचारियों को तैनात किया जा रहा है जो हर बच्चे की तलाशी ले रही हैं। लेकिन गैंग ने तरीका बदल लिया है – अब बच्चियां दुल्हन की सहेली बनकर कमरे में घुस रही हैं और मौका मिलते ही सामान उठा ले जा रही हैं।

पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव ने कहा, “हमने स्पेशल टीम गठित कर दी है। तीन संदिग्ध बच्चों को हिरासत में लिया गया है। जल्द ही पूरे गैंग का पर्दाफाश करेंगे।” लेकिन अभी तक कोई बड़ा खुलासा नहीं हो सका है। उल्टे गैंग ने 1 दिसंबर को एक और छोटी शादी से 2 लाख रुपए के गहने चुराने की सूचना है।

शहरवासी अब डरे हुए हैं। एक बुजुर्ग ने कहा, “पहले लुटेरे हथियार दिखाते थे, अब मासूम चेहरों का सहारा ले रहे हैं। शादी में खुशी मनाने जाते हैं, वहां जेब खाली हो जाती है।” विपक्षी नेता इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं कि “कानून-व्यवस्था चौपट हो चुकी है, बच्चे भी अब अपराधी बन गए हैं।”

फिलहाल ग्वालियर पुलिस के लिए यह गैंग सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। शादी करने वाले परिवार अब मेहमानों की लिस्ट के साथ-साथ “बच्चों की लिस्ट” भी बनाने लगे हैं ताकि कोई अनजान बच्चा अंदर न घुस सके। लेकिन सवाल वही है – क्या मासूम चेहरों के पीछे छिपे इन शातिर दिमागों को पुलिस पकड़ भी पाएगी? जवाब का इंतजार पूरे शहर को है।

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