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By: Ravindra Sikarwar

चुनाव आयोग ऑफ इंडिया ने मतदाताओं को बड़ी राहत देते हुए 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की समय-सीमा 7 दिन आगे बढ़ा दी है। अब मतदाताओं को अपना नाम, पता, फोटो और अन्य विवरण जांचने-ठीक करवाने के लिए 11 दिसंबर 2025 तक का समय मिलेगा। पहले यह अंतिम तिथि 4 दिसंबर निर्धारित थी। इस फैसले से लाखों ऐसे लोग लाभान्वित होंगे जिन्होंने अभी तक फॉर्म नहीं भरा या जिनके दस्तावेज़ में कोई त्रुटि रह गई थी।

नई तिथियों का पूरा ब्यौरा

  • मतदाता सत्यापन, नए नाम जुड़वाने, पुराने नाम हटवाने और सुधार करवाने की अंतिम तिथि: 11 दिसंबर 2025 (पहले 4 दिसंबर थी) 
  • ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन: 16 दिसंबर 2025 (पहले 9 दिसंबर प्रस्तावित था) 
  • दावे-आपत्तियां दर्ज करने की अवधि: 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक 
  • अंतिम मतदाता सूची (फाइनल इलेक्टोरल रोल) का प्रकाशन: 14 फरवरी 2026 (पहले 7 फरवरी 2026 तय थी)

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार समय-सीमा इसलिए बढ़ाई गई क्योंकि कई क्षेत्रों से शिकायतें आई थीं कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर नहीं पहुंच पाए, बहुत से लोगों को फॉर्म-6, फॉर्म-7 या फॉर्म-8 नहीं मिला और मौसम की खराबी व छुट्टियों के कारण काम प्रभावित हुआ। आयोग नहीं चाहता कि कोई भी पात्र मतदाता सिर्फ तकनीकी कारणों से वोटिंग के अधिकार से वंचित रह जाए।

इन 12 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में हो रहा है SIR
हालांकि चुनाव आयोग ने अभी राज्यों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, तमिलनाडु और पुडुचेरी में यह विशेष पुनरीक्षण अभियान सबसे तेज गति से चल रहा है। इनमें से कई राज्य अगले एक-दो साल में विधानसभा चुनाव की दहलीज पर हैं, इसलिए साफ-सुथरी वोटर लिस्ट बनाना आयोग की प्राथमिकता है।

मतदाताओं को क्या करना चाहिए? जरूरी सलाह

  1. अगर आपके पास अभी तक फॉर्म नहीं पहुंचा है तो नजदीकी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क करें या voters.eci.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरें। 
  2. अपना नाम Voters’ Helpline ऐप, वेबसाइट या 1950 हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत चेक करें। 
  3. अगर नाम गायब है, स्पेलिंग गलत है, फोटो पुराना है या पता बदल गया है तो तुरंत फॉर्म-8 भरें। 
  4. 18 साल पूरा कर चुके युवा फॉर्म-6 से नया नाम जुड़वा सकते हैं। 
  5. अगर किसी की मृत्यु हो गई है या कोई व्यक्ति स्थायी रूप से इलाका छोड़ चुका है तो फॉर्म-7 भरकर उसका नाम हटवाएं, वरना फर्जी वोटिंग का खतरा रहता है। 
  6. आधार लिंकिंग अब वैकल्पिक है, इसलिए आधार न होने से घबराएं नहीं।

विपक्ष ने पहले उठाए थे गंभीर सवाल
SIR अभियान शुरू होने के कुछ हफ्ते बाद ही कई विपक्षी दलों ने इसकी रफ्तार पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि इतनी जल्दबाजी में काम करवाने के कारण BLO पर भारी दबाव डाला जा रहा है। कुछ जगहों पर तो BLO की अत्यधिक तनाव के कारण असामयिक मृत्यु की दुखद खबरें भी आई थीं। विपक्ष का कहना था कि ग्रामीण इलाकों, आदिवासी बहुल क्षेत्रों और प्रवासी मजदूरों के बीच यह अभियान ठीक से नहीं पहुंच पाया, जिससे लाखों गरीब और वंचित वर्ग के लोग वोटर लिस्ट से बाहर हो सकते हैं। अब डेडलाइन बढ़ने से विपक्ष ने इसे अपनी जीत बताया है और कहा है कि “लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनदबाव काम आया”।

SIR अभियान असल में है क्या?
साधारण वार्षिक संक्षिप्त पुनरीक्षण के अलावा कभी-कभी चुनाव आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण चलाता है। इसमें हर घर में जाकर एक-एक व्यक्ति की जानकारी नए सिरे से ली जाती है। फोटो फिर से खींची जाती है, दस्तावेज़ चेक किए जाते हैं और पूरी मतदाता सूची को आधार से लेकर EPIC नंबर तक पूरी तरह अपडेट किया जाता है। इसका मकसद फर्जी वोटरों को हटाना, डुप्लीकेट एंट्रीज खत्म करना और नए मतदाताओं को जोड़ना है। पिछले कुछ सालों में वोटर लिस्ट में लाखों फर्जी और मृत मतदाताओं के नाम पाए गए थे, जिन्हें साफ करने के लिए ही यह कवायद की जा रही है।

चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि 11 दिसंबर के बाद कोई भी बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए सभी मतदाताओं से अपील है कि अगले 11 दिनों में अपना और अपने परिवार का वोटर रिकॉर्ड जरूर चेक कर लें। एक वोट लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है – इसे खोने न दें।

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