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By: Ravindra Sikarwar

ग्वालियर: पनिहार थाना क्षेत्र के बरई गांव से शुक्रवार शाम को गायब हुए दो नाबालिग लड़के रविवार दोपहर पुलिस की पकड़ में आ गए। 13 साल का अर्जुन जाटव और 14 साल का रोहित यादव ने घर वालों को बताया था कि वे “गुजरात जा रहे हैं”, लेकिन असल में दोनों ने पहले भोपाल और फिर दिल्ली की सैर की। ट्रेन बदल-बदलकर लगभग 1500 किलोमीटर का सफर करने के बाद जब दोनों बच्चे थक-हारकर ग्वालियर वापस लौटे तो गोला का मंदिर बस स्टैंड के पास पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। दोनों बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं और रविवार शाम को रोते-बिलखते परिजनों को सौंप दिए गए।

दरअसल, शुक्रवार शाम करीब 5 बजे अर्जुन और रोहित अपने घर से कुछ पैसे और कपड़े लेकर निकले थे। दोनों कक्षा 7 और 8 में पढ़ते हैं और अच्छे दोस्त हैं। घर वालों को पहले लगा कि दोनों कहीं खेलने गए होंगे, लेकिन जब रात 10 बजे तक नहीं लौटे तो परिजनों ने पनिहार पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत दोनों के फोटो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप पर वायरल कर दिए और सभी थानों को अलर्ट जारी किया।

परिजनों ने पुलिस को बताया कि अर्जुन ने जाते वक्त अपनी मां से कहा था, “मम्मी, हम गुजरात जा रहे हैं, जल्दी लौटेंगे।” मां ने समझा कि बच्चे मजाक कर रहे हैं, लेकिन जब वे नहीं लौटे तो परिवार में कोहराम मच गया। गांव में अफवाहें फैलने लगीं कि कहीं बच्चों को कोई उठा तो नहीं ले गया या ट्रेन से कट तो नहीं गए।

पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। दोनों बच्चों के पास मोबाइल नहीं था, इसलिए लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल था। फिर भी पुलिस ने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। शनिवार को पता चला कि दोनों बच्चे ग्वालियर से भोपाल जाने वाली किसी ट्रेन में चढ़े थे। इसके बाद पुलिस ने भोपाल जीआरपी और दिल्ली पुलिस से भी संपर्क साधा।

दूसरी तरफ दोनों मासूम बड़ी मस्ती में थे। अर्जुन के चाचा ने बताया कि बच्चों ने बाद में खुद बताया कि वे पहले भोपाल पहुंचे, वहां स्टेशन के बाहर चाट-पकौड़ी खाई, फिर किसी मालगाड़ी या पैसेंजर ट्रेन में चढ़कर दिल्ली चले गए। दिल्ली में उन्होंने लाल किला और इंडिया गेट देखा, रात को स्टेशन पर ही सोए और अगले दिन वापसी की ट्रेन पकड़ ली। पैसे खत्म हो गए तो भूखे-प्यासे ही ग्वालियर लौट आए।

रविवार दोपहर करीब १ बजकर ४० मिनट पर गोला का मंदिर बस स्टैंड पर जब दोनों उतरे तो वहां पहले से मौजूद पनिहार पुलिस की टीम ने उन्हें पहचान लिया। दोनों को देखते ही पुलिसकर्मी दौड़े और बच्चों को गले लगा लिया। दोनों डर के मारे रोने लगे। पुलिस ने तुरंत कोल्ड ड्रिंक और बिस्किट खिलाए और परिजनों को सूचना दी।

पनिहार थाना प्रभारी निरीक्षक संजय शर्मा ने बताया, “दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं। उन्होंने जो सफर किया, वह खतरनाक था, लेकिन ऊपर वाले की कृपा से कुछ नहीं हुआ। हमने दोनों को काउंसलिंग भी दी है और परिजनों को समझाया है कि बच्चों पर ज्यादा सख्ती न करें, वरना फिर भाग सकते हैं।”

घर लौटते ही मां-बाप ने दोनों को सीने से लगा लिया। अर्जुन की मां ने पुलिस वालों के पैर छुए और कहा, “मेरे लाल को जिंदा लौटा दिया, इससे बड़ा सुख क्या होगा।” गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और लोगों ने पुलिस की तारीफ करते नहीं थके।

पुलिस अब दोनों बच्चों से विस्तार से बात कर रही है कि आखिर वे घर से क्यों भागे। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि दोनों मोबाइल गेम और फिल्मों से प्रभावित थे और “दुनिया घूमने” का शौक पूरा करना चाहते थे। पुलिस ने परिजनों को सलाह दी है कि बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें प्यार से समझाएं।

ग्वालियर पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई एक बार फिर सराही जा रही है। पिछले एक महीने में यह तीसरा मामला है जब गुम हुए नाबालिगों को 48-72 घंटे के अंदर सकुशल बरामद किया गया है।

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