By: Ravindra Sikarwar
बांग्लादेश की राजधानी ढाका की एक विशेष अदालत ने गुरुवार को एक झटके भरी फैसला सुनाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को तीन अलग-अलग भ्रष्टाचार मामलों में दोषी ठहराते हुए कुल 21 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक मामले में उन्हें सात-सात वर्ष की सजा दी गई है, जो लगातार चलेंगी। यह फैसला पुरबचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट के तहत सरकारी जमीनों के आवंटन में अनियमितताओं से जुड़े मामलों पर आधारित है। शेख हसीना, जो वर्तमान में भारत में रह रही हैं, इस सुनवाई में अनुपस्थित रहीं और उन्होंने कोई वकील नियुक्त नहीं किया था। अदालत ने कहा कि हसीना ने बिना किसी औपचारिक आवेदन के और कानूनी सीमाओं को लांघते हुए खुद, अपने परिवार के सदस्यों के लिए मूल्यवान प्लॉट हथियाए, जो एक दुराग्राही मानसिकता का प्रमाण है। बांग्लादेश की एंटी-करप्शन कमीशन (एसीसी) ने जनवरी 2025 में हसीना और उनके परिजनों के खिलाफ छह मामले दर्ज किए थे, जिनमें से तीन पर अब फैसला आया है। शेष तीन मामलों का फैसला एक दिसंबर को सुनाया जाएगा। इस फैसले के साथ ही हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय और बेटी साइमा वाजेद पुतुले को भी एक मामले में पांच-पांच वर्ष की सजा सुनाई गई। अन्य 20 आरोपी, जिनमें पूर्व जूनियर हाउसिंग मंत्री शरीफ अहमद और विभिन्न अधिकारी शामिल हैं, को भी अलग-अलग अवधि की सजाएं मिलीं, जबकि एक जूनियर अधिकारी को बरी कर दिया गया। अदालत परिसर में फैसला सुनाते समय भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी, क्योंकि यह फैसला 17 नवंबर को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) द्वारा हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए फांसी की सजा दिए जाने के मात्र 10 दिनों बाद आया है। हसीना ने दोनों फैसलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है, लेकिन उनके परिवार ने भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया है।
यह मामला पुरबचल क्षेत्र में सरकारी आवास परियोजना के तहत 10 कठा के छह प्लॉटों के अवैध आवंटन से जुड़ा है, जो राजधानी ढाका के उपनगरीय इलाके में स्थित हैं। एसीसी के अनुसार, हसीना ने राजधानी विकास प्राधिकरण (राजुक) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलीभगत से ये प्लॉट खुद, अपने बेटे साजीब, बेटी साइमा, बहन शेख रेहाना, भतीजे रादवान मुजीब सिद्दीक बॉबी और भतीजी आजमीना सिद्दीक के नाम पर हड़प लिए, जबकि वे पात्रता नियमों के अनुरूप नहीं थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह आवंटन बिना बोली या पारदर्शी प्रक्रिया के किया गया, जो सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है। विशेष न्यायाधीश मोहम्मद अब्दुल्लाह अल मामुन ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि हसीना की कार्रवाई सत्ता के अंधे दुरुपयोग और लालच से प्रेरित थी। इसके अलावा, हसीना की बहन शेख रेहाना और ब्रिटिश सांसद तुलिप सिद्दीक (हसीना की भतीजी) भी इन मामलों में आरोपी हैं, लेकिन वे भी फरार हैं। एक आरोपी ने अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर तीन वर्ष की सजा काटी, जबकि अन्य सभी अनुपस्थित थे। यह फैसला बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, जो हसीना के 15 वर्षों के शासनकाल के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है। जनवरी में चार्जशीट दाखिल होने के बाद मार्च में मुकदमे शुरू हुए थे, और अब एसीसी ने कहा है कि शेष मामलों में भी कड़ी कार्रवाई होगी। हसीना के वकीलों की अनुपस्थिति में अदालत ने एकतरफा सुनवाई पूरी की, जिसकी निष्पक्षता पर वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं।
इस फैसले के राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव व्यापक हैं। शेख हसीना, जिनकी सरकार को अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले ‘जुलाई विद्रोह’ के दौरान सत्ता से बेदखल किया गया था, ने हेलीकॉप्टर से देश छोड़कर भारत में शरण ली थी। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है, जिस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह अनुरोध की जांच कर रहा है। हसीना के पुत्र साजीब (अमेरिका में रहते हैं) और साइमा (संयुक्त राष्ट्र की पूर्व अधिकारी) को सजा मिलने से परिवार पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। सार्वजनिक अभियोजक खान मोइनुल हसन ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे, क्योंकि उन्होंने अधिकतम सजा की मांग की थी। हसीना की अवामी लीग पार्टी ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे न्याय का प्रतीक बताया। यह घटना बांग्लादेश में लोकतंत्र और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को नई दिशा दे सकती है, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर डालेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि हसीना का प्रत्यर्पण मुश्किल होगा, लेकिन यह फैसला उनके वैश्विक छवि को और धूमिल करेगा। कुल मिलाकर, यह सजा हसीना के शासन के अंधेरे अध्याय को उजागर करती है, जहां सत्ता का दुरुपयोग आम जनता के हितों पर भारी पड़ा।
