By: Ravindra Sikarwar
उज्जैन जिले में सड़क परियोजनाओं को लेकर किसानों और स्थानीय लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। अभी सिंहस्थ क्षेत्र की लैंड पूलिंग, सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी आवासीय योजना और इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड रोड के विरोध की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब नई परियोजना ‘उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल हाईवे’ के खिलाफ भी ज़ोरदार आंदोलन शुरू हो गया है। मंगलवार को सैकड़ों किसानों और ग्रामीणों ने मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) के उज्जैन स्थित कार्यालय का घेराव कर दिया और परियोजना के वरिष्ठ अधिकारियों को कई घंटों तक बंधक बनाए रखा। उनका आरोप है कि यह हाईवे उपजाऊ कृषि भूमि को बर्बाद कर देगा, मुआवजे की राशि बेहद कम रखी गई है और सबसे बड़ी बात, परियोजना के लिए ग्राम सभाओं की सहमति तक नहीं ली गई।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे नागदा, खाचरौद और बड़नगर तहसील के दर्जनों गांवों से गुजरेगा। इस रास्ते में सैकड़ों हेक्टेयर काली उपजाऊ मिट्टी वाली ज़मीन आएगी, जो इस इलाके की आजीविका का मुख्य आधार है। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और MPRDC के अधिकारी बिना स्थानीय लोगों से कोई ठोस बातचीत किए ही सर्वे कर रहे हैं और जबरन जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां और बैनर लेकर नारे लगाते हुए कहा कि अगर उनकी जमीन गई तो उनके परिवारों का भरण-पोषण कैसे होगा। कई महिलाएं भी प्रदर्शन में शामिल थीं और उन्होंने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि क्या सरकार उनके बच्चों को रोजगार देगी या खाने के लिए अनाज उपलब्ध करवाएगी। गुस्साए ग्रामीणों ने MPRDC के प्रोजेक्ट मैनेजर सहित अन्य अधिकारियों को कार्यालय से बाहर नहीं जाने दिया। पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा, लेकिन किसानों की भारी भीड़ के आगे फिलहाल हस्तक्षेप नहीं कर पाया।
प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उज्जैन-जावरा हाईवे का रूट बदला नहीं गया और उचित मुआवजा साथ ही पुनर्वास की ठोस योजना नहीं बनाई गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उनका कहना था कि पहले से चल रहे इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन रोड में भी किसानों को धोखा दिया गया था, मुआवजा आज तक पूरा नहीं मिला और कईयों की जमीन लेने के बाद भी सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब एक और नई परियोजना से इलाके के किसान पूरी तरह आशंकित और नाराज हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि परियोजना को या तो रद्द किया जाए या इसका रूट इस तरह बदला जाए कि कम से कम कृषि योग्य भूमि प्रभावित हो। साथ ही, मुआवजे की राशि मौजूदा सर्किल रेट से चार गुना तय की जाए, जैसा कि कई अन्य राज्यों में हो रहा है।
देर शाम तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्टर और एसपी मौके पर पहुंचे तथा किसानों से वार्ता की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उनकी सभी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और बिना सहमति के कोई जबरन अधिग्रहण नहीं होगा। इसके बाद ग्रामीणों ने अधिकारियों को छोड़ा और प्रदर्शन समाप्त किया, लेकिन चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के अंदर ठोस प्रस्ताव नहीं आया तो फिर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे मध्य प्रदेश के महत्वाकांक्षी रोड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की योजना है, लेकिन लगातार हो रहे विरोध से इसकी राह में बड़े अवरोध पैदा हो रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन किसानों की मांगों को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर यह विवाद भी लंबे समय तक खिंचता रहेगा।
