By: Ravindra Sikarwar
ग्वालियर के डबरा इलाके में एक नवंबर को गायब हुए तीन वर्षीय मासूम रितेश का अब तक कोई पता नहीं चल सका है। पूरा क्षेत्र चिंता और बेचैनी में है, जबकि परिजन लगातार रो-रोकर इस उम्मीद में हैं कि उनका बेटा सुरक्षित मिले, लेकिन 20 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस की तमाम कोशिशें अभी तक नतीजे तक नहीं पहुंची हैं। रितेश की गुमशुदगी को लेकर पुलिस ने अब तक जितने भी एंगल तलाशे, सभी असफल साबित हुए हैं—चाहे वह जंगल में 500 जवानों के साथ की गई तलाशी हो, मोबाइल सर्विलांस, CDR की जांच, संदिग्धों से पूछताछ या फिर परिवार पर शक की दिशा।
घटना एक नवंबर की है जब रितेश अचानक घर के बाहर खेलते हुए लापता हो गया। परिवार ने उसे आसपास काफी खोजा, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो पुलिस को सूचना दी गई। शुरुआत में यह माना गया कि बच्चा गलती से जंगल की ओर चला गया होगा। इस संभावना के आधार पर पुलिस ने क्षेत्र के घने जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया। स्थानीय थाने, डॉग स्क्वॉड, फॉरेंसिक टीमें और लगभग 500 पुलिसकर्मियों को जंगल में उतारा गया, जिन्हें कई दिनों तक रितेश का कोई भी निशान नहीं मिला—न कपड़ा, न पैर के निशान, न ही जंगल में किसी तरह की हलचल का कोई संकेत।
इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच को आगे बढ़ाते हुए आसपास के गांवों और इलाके के मोबाइल टॉवरों के CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) खंगाले। क्षेत्र में सक्रिय हर मोबाइल नंबर को ट्रेस किया गया, और संदेहास्पद गतिविधियों को चिन्हित किया गया। कई नंबरों को सर्विलांस पर रखा गया, लेकिन किसी भी कॉल रिकॉर्ड में ऐसा कोई पैटर्न सामने नहीं आया जिससे अपहरण या किसी बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि हो। इसके अलावा पुलिस ने इलाके में लगे CCTV कैमरों की फुटेज को भी खंगाला, लेकिन न तो बच्चा किसी गाड़ी में दिखा और न ही उसे किसी अजनबी के साथ जाते हुए देखा गया।
जांच का दायरा बढ़ाने के बाद पुलिस ने परिवार और उनके नजदीकी रिश्तेदारों से भी पूछताछ की। कई बार बयान दर्ज किए गए ताकि किसी तरह का विरोधाभास या छिपा हुआ तथ्य सामने आए, लेकिन परिवार लगातार एक ही बात दोहराता रहा कि उन्हें किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और उन्हें किसी पर शक नहीं है। पुलिस ने परिवार के मोबाइल फोन, रिश्तों और आर्थिक लेनदेन आदि की भी जांच की, लेकिन कोई भी सुराग हाथ नहीं लगा।
स्थानीय ग्रामीणों से लेकर संदिग्ध व्यक्तियों तक, लगभग 70 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई, पर कोई भी जानकारी रितेश का लोकेशन बताने में मददगार नहीं बनी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं बच्चा किसी वाहन की चपेट में तो नहीं आ गया, और भयवश किसी ने घटना को छुपा दिया हो। हालांकि इस एंगल की भी अब तक पुष्टि नहीं हुई है।
रितेश के परिजन बदहवासी में दिन-रात बेटे की तलाश के हर दरवाजे खटखटा रहे हैं। मां की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है और पिता बार-बार अधिकारियों के पास जाकर गुहार लगा रहे हैं। परिजन का कहना है कि जब 500 पुलिसकर्मी और इतने बड़े पैमाने पर खोज अभियान के बावजूद बच्चा नहीं मिला, तो यह मामला सामान्य गुमशुदगी से कहीं अधिक जटिल हो सकता है।
पुलिस अब केस को “स्पेशल प्रायोरिटी” पर हैंडल कर रही है। अतिरिक्त टीमें लगाई गई हैं, साइबर एक्सपर्ट्स को जोड़ा गया है, और तलाश के दायरे को जिले से बाहर तक फैलाया जा रहा है। लेकिन 20 दिन बाद भी रितेश का कोई सुराग न मिलना पूरे प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
ग्वालियर में यह मामला लोगों के बीच भय और असुरक्षा का प्रतीक बन गया है। हर गुजरते दिन के साथ उम्मीदें कमजोर होती जा रही हैं, लेकिन परिवार और पुलिस दोनों ही यह विश्वास बनाए हुए हैं कि किसी न किसी सुराग से मासूम रितेश को ढूंढ़ निकाला जाएगा।
