by-Ravindra Sikarwar
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि किसी भी नागरिक के पास अधिकतम दो शस्त्र लाइसेंस ही हो सकते हैं। तीसरा या इससे अधिक लाइसेंस वाला हर हथियार अवैध माना जाएगा और उसे तुरंत सरेंडर करना होगा। इसके बावजूद मध्यप्रदेश में आज भी 800 से ज्यादा रसूखदार लोग ऐसे हैं, जिनके पास दो से अधिक वैध शस्त्र लाइसेंस हैं और जिला प्रशासन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
3 अक्टूबर की डेडलाइन बीत गई, कार्रवाई शून्य:
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर मध्यप्रदेश गृह विभाग ने सितंबर 2025 में सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर 3 अक्टूबर तक अतिरिक्त शस्त्र लाइसेंस निलंबित करने और हथियार सरेंडर कराने के सख्त आदेश दिए थे। राज्य की गृह सचिव कृष्णावेणी देशावतु ने भी हाल ही में दोबारा पत्र लिखकर याद दिलाया कि अतिरिक्त लाइसेंस तत्काल निरस्त किए जाएं और हर लाइसेंस का UIN (यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर) राष्ट्रीय पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए। बिना UIN के कोई भी शस्त्र लाइसेंस अवैध माना जाएगा।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश जिला कलेक्टर इन निर्देशों को लागू करने में पूरी तरह असफल रहे हैं। न तो अतिरिक्त लाइसेंस निलंबित हो रहे हैं और न ही UIN पोर्टल पर अपलोड हो पा रहा है।
रसूखदारों की सूची में नेता, बड़े व्यवसायी और अधिकारी शामिल:
जिन लोगों ने अभी तक अतिरिक्त हथियार सरेंडर नहीं किए, उनमें ज्यादातर प्रभावशाली वर्ग के लोग हैं – कुछ मौजूदा और पूर्व जनप्रतिनिधि, बड़े उद्योगपति-व्यवसायी, ऊंचे प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी तथा उनके परिजन। सितंबर में ये संख्या 913 थी, जो अब घटकर करीब 800 रह गई है, लेकिन अभी भी यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है।
जिलेवार स्थिति (नवंबर 2025 तक):
- भिंड: 116 लोग
- भोपाल: 114 लोग
- ग्वालियर: 112 लोग
- इंदौर: 85 लोग
- जबलपुर: 58 लोग
- छतरपुर: 41 लोग
- उज्जैन: 33 लोग
- मुरैना: 30 लोग
- सागर: 29 लोग
- रतलाम: 28 लोग
- छिंदवाड़ा: 14 लोग
- दमोह: 10 लोग
- शिवपुरी: 7 लोग
इनके अलावा रीवा, सतना, उमरिया, शहडोल, नर्मदापुरम, बैतूल और कुछ अन्य जिलों में भी दर्जनभर से कम-कम रसूखदारों के पास दो से अधिक लाइसेंस हैं।
खास बात यह है कि भिंड, भोपाल और ग्वालियर जैसे संवेदनशील जिलों में सबसे ज्यादा मामले हैं, लेकिन वहां के कलेक्टर और जिला प्रशासन इन प्रभावशाली लोगों पर कोई दबाव नहीं बना पा रहे हैं। किसी भी जिले में अभी तक किसी रसूखदार का अतिरिक्त शस्त्र लाइसेंस निलंबित नहीं किया गया और न ही किसी हथियार को अवैध घोषित किया गया है।
केंद्र का नियम साफ, प्रदेश में पालन न के बराबर:
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, दो से अधिक शस्त्र लाइसेंस होने की स्थिति में अतिरिक्त लाइसेंस तुरंत निलंबित करके हथियार जमा कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश में रसूख और पहुंच के आगे नियम बेबस नजर आ रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि कई प्रभावशाली लोगों ने मौखिक तौर पर आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही अतिरिक्त हथियार सरेंडर कर देंगे, लेकिन लिखित में कोई कार्रवाई नहीं हो रही। अब देखना यह है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन कब तक इस मामले में सख्ती दिखाते हैं या केंद्र के निर्देश को सिर्फ कागजों तक सीमित रहने दिया जाएगा।
