by-Ravindra Sikarwar
राजधानी भोपाल में नशे का कारोबार अब अमीर और रसूखदार घरों तक पहुंच चुका है। गांजा, एमडी, कोकीन और अन्य खतरनाक ड्रग्स अब कॉलोनियों के पढ़े-लिखे, जिम जाने वाले और अच्छे बैकग्राउंड वाले युवक-युवतियां सप्लाई कर रहे हैं। पिछले दस महीनों में पूर्व पार्षद के रिश्तेदार, कारपोरेट घरानों के बच्चे और जिम मालिक जैसे लोग ड्रग्स के धंधे में पकड़े जा चुके हैं। पुलिस भले ही छोटे-मोटे पैडलर पकड़ रही हो, लेकिन बड़े सरगनाओं और अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंचने में अब तक नाकाम रही है।
पिछले साल का शर्मनाक वाकया और उसके बाद अभियान:
कटारा हिल्स में पिछले साल एक अवैध एमडी फैक्ट्री पकड़ी गई थी, जिसने पुलिस-प्रशासन की काफी किरकिरी कराई थी। इस घटना के बाद जून 2025 में पुलिस मुख्यालय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर राजधानी में बड़े स्तर पर नशा विरोधी अभियान शुरू किया। इसके तहत 2024-25 में अब तक भोपाल क्राइम ब्रांच ने 400 किलो गांजा, 36 किलो चरस, 132 बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप और कुल साढ़े 14 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का माल जब्त किया है।
कुछ चौंकाने वाले मामले:
- कोहेफिजा की अक्सा खान उर्फ आसिया : टीला जमालपुरा पुलिस ने चित्रांश कॉलोनी, कोहेफिजा की रहने वाली अक्सा खान से 9 ग्राम एमडी बरामद किया। उनके पिता शहर में खेल मैदान चलाते हैं। अक्सा को यह ड्रग्स मुंबई में रहने वाले दोस्त से मिला था।
- पूर्व पार्षद के भतीजे यासीन अहमद: मशहूर ड्रग पैडलर शारिक अहमद उर्फ मछली का भतीजा यासीन अहमद भी एमडी के साथ पकड़ा गया। उसका चाचा प्रदेश के कई बड़े डैम में मछली पकड़ने का ठेका लेते हैं और राजनीतिक रसूख रखते हैं। यासीन इसी रसूख का इस्तेमाल ड्रग्स बेचने में कर रहा था।
- जिम मालिक मोनिस खान फरार: यासीन से पूछताछ में एक जिम मालिक मोनिस खान का नाम सामने आया। वह अपने जिम में आने वाले युवाओं को ड्रग्स सप्लाई करता था। पुलिस की गिरफ्त आने से पहले ही वह मलेशिया भाग निकला।
नया सप्लाई रूट बिहार से:
पहले भोपाल में ड्रग्स मुख्य रूप से ओडिशा रूट से आता था, जिसे दो साल पहले पुलिस ने लगभग बंद कर दिया था। अब नया रूट बिहार से शुरू होकर रातीबड़ के रास्ते भोपाल पहुंच रहा है। इसी महीने बिहार के तीन युवकों को भारी मात्रा में गांजे के साथ गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ये छोटे पैडलर सिर्फ आखिरी कड़ी हैं। असली मालिक और बड़े सप्लायर अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। शहर में नशे की लत तेजी से फैल रही है और अब यह सिर्फ झुग्गी-झोपड़ियों या गरीब तबके तक सीमित नहीं रही, बल्कि पॉश इलाकों के युवा इसका सबसे बड़ा बाजार और सप्लायर दोनों बनते जा रहे हैं।
नशे के खिलाफ अभियान तो जारी है, लेकिन बड़े आकाओं तक पहुंच बनाने में पुलिस अभी तक असफल साबित हो रही है।
