by-Ravindra Sikarwar
बिहार में चल रहे विधानसभा चुनावों के शुरुआती रुझानों ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को भारी बढ़त दिलाई है। राज्य की कुल 243 सीटों वाले विधानसभा में भाजपा नीत एनडीए ने अब तक 168 सीटों पर मजबूत स्थिति बना ली है, जो पूर्ण बहुमत (122 सीटों) से कहीं आगे है। वहीं, विपक्षी महागठबंधन, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख भूमिका में है, केवल 71 सीटों पर ही आगे चल पाया है।
चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मतगणना सुबह से जारी है और कई सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। एनडीए की यह बढ़त मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू की मजबूत साझेदारी का नतीजा मानी जा रही है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू ने ग्रामीण इलाकों में अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि भाजपा ने शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है।
विपक्षी खेमे में हालांकि हार की आशंका के बीच ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। महागठबंधन के नेताओं ने कई जगहों पर मतगणना में अनियमितता का आरोप लगाते हुए पुनर्मतगणना की मांग की है। आरजेडी प्रवक्ता ने कहा, “जनता का जनादेश स्पष्ट है, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण परिणामों पर संदेह पैदा हो रहा है।” हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर दिया है।
खास सीटों पर नजर:
- अलीनगर विधानसभा (दरभंगा): इस सीट पर मुकाबला बेहद रोचक है। भाजपा की उम्मीदवार मैथिली ठाकुर और आरजेडी के विनोद मिश्रा के बीच कड़ा संघर्ष चल रहा है। सुबह 11 बजे तक के रुझानों में मैथिली ठाकुर मामूली अंतर से आगे हैं, लेकिन अंतिम राउंड में परिणाम बदल सकता है।
- अन्य महत्वपूर्ण सीटें: पटना साहिब, बक्सर, और गया टाउन में भी एनडीए मजबूत स्थिति में है, जबकि सीवान और छपरा में महागठबंधन को उम्मीद है।
पृष्ठभूमि और मुद्दे:
इस चुनाव में बेरोजगारी, प्रवासी मजदूरों की समस्याएं, बाढ़ प्रबंधन, और महिला सुरक्षा प्रमुख मुद्दे रहे। एनडीए ने ‘डबल इंजन सरकार’ और विकास के वादों पर जोर दिया, जबकि महागठबंधन ने सामाजिक न्याय, जातिगत गणना, और गरीबी उन्मूलन को अपना मुख्य हथियार बनाया।
मतदान तीन चरणों में 20 अक्टूबर, 28 अक्टूबर और 5 नवंबर को हुआ था, जिसमें औसतन 56% मतदान दर्ज किया गया। परिणामों की घोषणा आज दोपहर तक स्पष्ट हो जाएगी।
अगर एनडीए बहुमत हासिल करता है, तो नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की संभावना प्रबल है, जबकि भाजपा राज्य में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
