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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार (12 नवंबर 2025) को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दिल्ली के लाल किले के निकट 10 नवंबर को हुई कार विस्फोट घटना को आधिकारिक रूप से “आतंकी घटना” घोषित कर दिया गया। मंत्रिमंडल ने इस कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा करते हुए एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें निर्दोष लोगों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया गया। बैठक के दौरान दो मिनट का मौन रखा गया और मंत्रिमंडल ने निर्दोषों को श्रद्धांजलि दी। इस प्रस्ताव में जांच एजेंसियों को अपराधियों, उनके सहयोगियों और प्रायोजकों को तत्काल सजा दिलाने के लिए तेजी से कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। यह घटना देश में दहशत फैलाने की कोशिश थी, लेकिन सरकार ने आतंकवाद के प्रति “शून्य सहिष्णुता” की नीति को दोहराया।

धमाके की घटना: एक भयानक रात जो सदमे की यादें छोड़ गई
10 नवंबर 2025 की शाम करीब 6:52 बजे लाल किले मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास एक सफेद हुंडई i20 कार में जोरदार विस्फोट हो गया। यह सड़क पर रश आवर का समय था, जब ट्रैफिक सिग्नल पर गाड़ियां रुकी हुई थीं। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास की कई वाहनें आग की लपटों में घिर गईं, और काला धुआं आसमान छूने लगा। सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि कार धीरे-धीरे चल रही थी, जो अचानक रुकते ही फट गई। इस घटना में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हुए। मृतकों में महिलाएं, बच्चे और राहगीर शामिल थे, जिनमें से कुछ की पहचान अभी भी बाकी है।

घायलों को तुरंत लोक नायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) अस्पताल और सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान दौरे से लौटते ही सीधे एलएनजेपी अस्पताल का दौरा किया, जहां उन्होंने घायलों से बातचीत की, उनकी हालत जानी और शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। डॉक्टरों के अनुसार, कई घायलों को गंभीर जलन और विस्फोट के धक्के से चोटें आई हैं, लेकिन अब उनकी स्थिति नियंत्रण में है। आपातकालीन सेवाओं, जैसे दिल्ली फायर सर्विस और एम्बुलेंस स्टाफ ने त्वरित प्रतिक्रिया देकर कई जानें बचाईं।

मंत्रिमंडल प्रस्ताव का पूरा विवरण: शोक, निंदा और कार्रवाई का संकल्प
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित हुई, जो कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की समीक्षा के तुरंत बाद शुरू हुई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रस्ताव का ब्योरा साझा किया। प्रस्ताव के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

बिंदुविवरण
शोक और श्रद्धांजलिमंत्रिमंडल ने निर्दोषों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया। पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोकग्रस्त परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना जताई गई। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की गई।
निंदाइस घटना को “राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा किया गया घृणित आतंकी कृत्य” बताया गया। इसे “कायरतापूर्ण और नीच” हमला करार दिया, जो निर्दोषों की हत्या का कारण बना।
जांच निर्देशएनआईए और अन्य एजेंसियों को “अधिकतम तत्परता और पेशेवरता” के साथ जांच करने का आदेश। अपराधियों, सहयोगियों और प्रायोजकों की शीघ्र पहचान और सजा सुनिश्चित करने पर जोर।
नीति प्रतिबद्धताआतंकवाद के हर रूप और प्रकटीकरण के प्रति भारत की “अटल शून्य सहिष्णुता” नीति को दोहराया।
सराहनाचिकित्सा कर्मियों, आपातकालीन सेवाओं और वैश्विक समर्थन (जैसे यूके, सिंगापुर) के लिए आभार।

प्रस्ताव में कहा गया, “देश ने 10 नवंबर को लाल किले के पास कार विस्फोट के माध्यम से राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा एक घृणित आतंकी घटना का सामना किया।” यह प्रस्ताव मंत्रिमंडल की एकजुटता का प्रतीक है और देश को मजबूत संदेश देता है कि आतंक के खिलाफ कोई ढील नहीं बरती जाएगी।

जांच का अपडेट: आतंकी साजिश का पर्दाफाश
एनआईए की प्रारंभिक जांच से पता चला कि यह धमाका जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के एक मॉड्यूल द्वारा रची गई साजिश का हिस्सा था। विस्फोटक सामग्री अमोनियम नाइट्रेट आधारित थी, जो कार में लादी गई थी। डीएनए टेस्ट से पुष्टि हुई कि कार डॉ. उमर उन नबी नामक सुसाइड बॉम्बर चला रहे थे, जो विस्फोट में मारे गए। यह एक गलती थी—मूल योजना दिल्ली-एनसीआर में कई स्थानों (जैसे सेना भवन, संसद) पर सीरियल ब्लास्ट की थी, लेकिन साथियों की गिरफ्तारी की अफरा-तफरी में फ्यूज समय से पहले सक्रिय हो गया।

अब तक 8 संदिग्ध गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें डॉक्टर मुजम्मिल शकील गनाई और डॉ. शाहीन सईद शामिल हैं। फरीदाबाद, लखनऊ, कानपुर और जम्मू-कश्मीर में छापेमारी जारी है। हरियाणा एसटीएफ ने अल-फलाह विश्वविद्यालय में तलाशी ली, जहां से हथियार और विस्फोटक बरामद हुए। कुल 2,921 किलोग्राम विस्फोटक जब्त किए गए हैं। जांच में तुर्की यात्रा (2022) और टेलीग्राम चैट्स के लिंक भी मिले हैं।

सुरक्षा उपाय और सरकारी प्रतिक्रिया:
घटना के बाद दिल्ली में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। मेट्रो स्टेशनों, बाजारों और सरकारी भवनों पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) तैनात हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में भी सतर्कता बरती जा रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा से विस्तृत जानकारी ली और एनआईए को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

  • प्रधानमंत्री मोदी: “आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं।”
  • दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता: मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा।
  • वैश्विक समर्थन: यूके ने यात्रा सलाह जारी की, सिंगापुर ने एकजुटता जताई।

प्रभावितों की कहानियां: दर्द और हिम्मत

  • राहुल शर्मा (मृतक, 32 वर्ष): एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जो काम से लौट रहे थे। उनकी पत्नी ने कहा, “वह बस घर आने वाला था।”
  • सीमा देवी (घायल, 45 वर्ष): “आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ समझ ही नहीं आया। लेकिन डॉक्टरों ने जान बचाई।”
  • परिवारों का संदेश: “सरकार न्याय देगी, लेकिन खोया हुआ लौटेगा नहीं।”

एकजुट भारत का संकल्प:
यह धमाका न केवल एक शहर को हिलाने वाली घटना था, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए चेतावनी। मंत्रिमंडल का प्रस्ताव आतंक के खिलाफ मजबूत इरादे को दर्शाता है। जांच जारी है, और आशा है कि जल्द ही पूरा नेटवर्क ध्वस्त हो जाएगा। देशवासियों से अपील है कि सतर्क रहें और एकजुट होकर इस खतरे का मुकाबला करें। आतंकवाद कभी जीत नहीं सकता जब तक हम मजबूत हैं।

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