by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुई कार बम विस्फोट की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस धमाके में 13 लोगों की जान चली गई और 25 से अधिक लोग घायल हुए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच में खुलासा हुआ है कि इस साजिश के केंद्र में दो युवा डॉक्टर थे—डॉ. उमर उन नबी और डॉ. मुजम्मिल शकील गनाई—जो पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के साथ गहराई से जुड़े हुए थे। दोनों ने 2022 में तुर्की की यात्रा की थी, जहां उन्होंने अपने हैंडलर्स से मुलाकात की और कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित हुए। यह ‘श्वेत-कॉलर’ (उच्च शिक्षित) आतंकी नेटवर्क का हिस्सा था, जिसमें डॉक्टरों और धार्मिक विद्वानों को शामिल किया गया था।
धमाके का विवरण: एक दुर्घटना जो बड़ी साजिश को उजागर कर गई
घटना 10 नवंबर 2025 की शाम करीब 6:30 बजे घटी, जब लाल किले मेट्रो स्टेशन के निकट एक पार्किंग लॉट में खड़ी हुंडई i20 कार में जोरदार विस्फोट हो गया। यह कार कश्मीर के पुलवामा जिले से खरीदी गई थी और इसमें अमोनियम नाइट्रेट से भरे आईईडी (तात्कालिक विस्फोटक उपकरण) लादे गए थे। डीएनए जांच से पुष्टि हुई कि कार डॉ. उमर उन नबी चला रहे थे, जो विस्फोट में मारे गए। यह धमाका उनकी मूल योजना का हिस्सा नहीं था—वे दिल्ली में कई स्थानों पर सीरियल ब्लास्ट करने वाले थे, लेकिन साथियों की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही घबराहट में फ्यूज समय से पहले सक्रिय हो गया।
एनआईए के अनुसार, यह साजिश 6 दिसंबर 2025 को—बाबरी मस्जिद विध्वंस की वर्षगांठ—पर दिल्ली-एनसीआर के छह प्रमुख स्थानों पर हमला करने की थी। लक्ष्य थे: सेना भवन, एयर फोर्स हेडक्वार्टर, भाजपा मुख्यालय, संसद भवन, अयोध्या राम मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर। हमलावरों ने 200 आईईडी तैयार करने की योजना बनाई थी, लेकिन 2,921 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री जब्त होने से यह विफल हो गई।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे ‘आतंकी घटना’ घोषित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को कड़ी सजा दी जाएगी।” गृह मंत्री अमित शाह ने एनआईए को तेजी से जांच पूरी करने का निर्देश दिया।
तुर्की यात्रा: कट्टरपंथ का केंद्र बिंदु
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि डॉ. उमर उन नबी (35 वर्ष) और डॉ. मुजम्मिल शकील गनाई (32 वर्ष) मार्च 2022 में तुर्की के अंकारा शहर गए थे। यह यात्रा किसी चिकित्सा सम्मेलन के बहाने की आड़ में थी, लेकिन वास्तव में वे जेईएम के हैंडलर ‘उकासा’ से मिलने गए थे। तुर्की स्थित इस हैंडलर ने उन्हें सेशन ऐप (एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग) के माध्यम से निर्देश दिए। यात्रा के दौरान उन्हें धार्मिक कट्टरता का प्रचार किया गया और भारत विरोधी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया गया।
- यात्रा का विवरण: दोनों पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) के एक ही गांव के निवासी हैं। वे फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय में एमबीबीएस के छात्र रहे। 2022 में वीजा पर अंकारा पहुंचे और 10 दिनों तक रहे।
- संपर्क माध्यम: टेलीग्राम ग्रुप्स—’फर्जंदान-ए-दरुल उलूम (देवबंद)’ और ‘उमर बिन खत्ताब’—के जरिए पाकिस्तान-आधारित जेईएम ऑपरेटिव से जुड़े। इन ग्रुप्स में कोडवर्ड जैसे ‘दावत’ (धमाका) और ‘बिरयानी’ (विस्फोटक) का इस्तेमाल होता था।
- तुर्की का इनकार: तुर्की सरकार ने इन आरोपों को ‘गलत सूचना’ करार दिया, लेकिन एनआईए अब इंटरपोल के माध्यम से जांच कर रही है।
आरोपी डॉक्टरों का प्रोफाइल और भूमिका:
यह नेटवर्क ‘डॉक्टर गैंग’ के नाम से जाना जाता था, जिसमें उच्च शिक्षित पेशेवरों को भर्ती किया गया। प्रमुख आरोपी:
| नाम | उम्र | पृष्ठभूमि | भूमिका |
| डॉ. उमर उन नबी | 35 | पुलवामा (जेकेए); अल-फलाह विश्वविद्यालय, फरीदाबाद में व्याख्याता | मुख्य सुसाइड बॉम्बर; विस्फोटक जुटाने और हैंडलर से संपर्क में। डीएनए से पुष्टि। |
| डॉ. मुजम्मिल शकील गनाई | 32 | पुलवामा (जेकेए); उसी विश्वविद्यालय में सहकर्मी | तुर्की यात्रा में साथी; विस्फोटक खरीदने में मदद, गिरफ्तार। |
| डॉ. शाहीन सईद (शाहिद) | 40 | लखनऊ; जेईएम की महिला विंग से जुड़ी | भर्तीकर्ता; पूर्व पति ने तलाक के बाद खुलासा किया, गिरफ्तार। |
| डॉ. अदील | 28 | सहरानपुर (यूपी); मेडिकल कॉलेज छात्र | लॉजिस्टिक्स; अमोनियम नाइट्रेट की आपूर्ति, गिरफ्तार। |
ये डॉक्टर अपनी पेशेवर पहचान का फायदा उठाकर रसायनों की खरीदारी करते थे। जांच में उनके फोन से 500 से अधिक टेलीग्राम चैट बरामद हुए, जो सीमा पार निर्देशों की पुष्टि करते हैं।
गिरफ्तारियां और जब्ती: 20 दिनों का अभियान
जांच 19 अक्टूबर 2025 को श्रीनगर में आपत्तिजनक पोस्टरों से शुरू हुई, जब नौगाम पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। जम्मू-कश्मीर पुलिस, एनआईए, एटीएस और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से 10-11 नवंबर तक 8 गिरफ्तारियां हुईं। प्रमुख घटनाक्रम:
- 19-27 अक्टूबर: शोपियां से मौलवी इरफान अहमद वाघय और गanderबल से जामिर अहमद गिरफ्तार।
- 5 नवंबर: सहरानपुर से डॉ. अदील।
- 7 नवंबर: अनंतनाग अस्पताल से एके-56 राइफल और गोला-बारूद जब्त।
- 8 नवंबर: फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से डॉ. मुजम्मिल; हथियार, पिस्टल और 358 किलोग्राम विस्फोटक बरामद।
- 9 नवंबर: फरीदाबाद के धौज से ‘मदरासी’ उर्फ एक आरोपी।
- 10 नवंबर: धेरा कॉलोनी मस्जिद इमाम हाफिज मोहम्मद इश्तियाक के घर से 2,563 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, डेटोनेटर और टाइमर जब्त। कुल 2,921 किलोग्राम विस्फोटक।
- 11 नवंबर: लखनऊ से डॉ. शाहीन सईद।
कुल 1,500 से अधिक लोगों से पूछताछ; डिजिटल ट्रेल्स, बैंक रिकॉर्ड्स और यात्रा दस्तावेजों की जांच जारी।
साजिश का दायरा: उत्तर प्रदेश और दिल्ली पर फोकस
आतंकियों ने उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों को प्राथमिक निशाना बनाया था। अयोध्या में स्लीपर सेल सक्रिय था, जबकि वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर पर हमला प्लान किया गया। दिल्ली में सरकारी भवनों के अलावा अस्पतालों और बाजारों को टारगेट बनाया जाना था। जेईएम के अलावा आंसर गजवात-उल-हिंद से भी लिंक मिले।
सुरक्षा उपाय और प्रतिक्रियाएं:
- उत्तर प्रदेश: अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज में ड्रोन गश्त, बैरिकेडिंग और आईडी चेक बढ़ाए गए।
- दिल्ली: मेट्रो स्टेशनों और बाजारों में केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात।
- अंतरराष्ट्रीय: सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने भारत के साथ एकजुटता जताई। तुर्की ने आरोपों का खंडन किया।
डॉ. शाहीन के पूर्व पति ने कहा, “वह दशक भर पहले तलाक के बाद बदल गई थी।” पुलवामा के ग्रामीणों ने बताया, “ये युवा पढ़े-लिखे थे, लेकिन गुमराह हो गए।”
न्याय की दिशा में कदम:
यह साजिश न केवल धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने वाली थी, बल्कि देश की एकता को तोड़ने का प्रयास थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।” एनआईए की जांच से आशा है कि पूरा नेटवर्क उजागर हो जाएगा। यह घटना साबित करती है कि खुफिया तंत्र की सतर्कता ने बड़ी तबाही रोकी। भविष्य में ऐसे मॉड्यूल्स को कुचलने के लिए एजेंसियां और मजबूत होंगी।
