by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार शाम को लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास एक पार्किंग में खड़ी हुंडई i20 कार में हुए जोरदार धमाके ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस घटना में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल हुए। आग तेजी से फैल गई, जिससे आसपास की कई गाड़ियां जलकर खाक हो गईं। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि यह धमाका आतंकी साजिश का हिस्सा था, लेकिन यह एक बड़ी भूल का नतीजा था। खुफिया एजेंसियों और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की गहन पूछताछ से खुलासा हुआ कि आतंकियों का मूल इरादा दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश के पवित्र धार्मिक स्थलों—अयोध्या के राम मंदिर और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर—को निशाना बनाना था।
धमाके की घटना: एक दुर्घटना जो साजिश को उजागर कर गई
घटना सोमवार शाम करीब 6 बजे घटी, जब लाल किले मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास खड़ी कार में विस्फोट हो गया। यह कार कश्मीर के पुलवामा जिले के एक व्यक्ति को बेची गई थी, और जांच में पता चला कि इसे आतंकियों ने हथियारों और विस्फोटकों से लादा था। एनआईए की रिपोर्ट के अनुसार, यह धमाका एक सुसाइड बॉम्बर डॉक्टर उमर द्वारा किया गया था, लेकिन विस्फोटक सामग्री की कमी और समय पर फ्यूज न होने के कारण यह उच्च तीव्रता का न होने वाला विस्फोट था। आतंकियों को अपने साथियों की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही घबराहट हुई, जिससे वे जल्दबाजी में कार को फोड़ बैठे। यह उनकी मूल योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक घातक चूक थी।
इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया। यूनियन होम मिनिस्टर अमित शाह ने एनआईए को तत्काल रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया, जबकि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘षड्यंत्र’ करार देते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी।
असली साजिश: धार्मिक स्थलों और सरकारी इमारतों पर हमला
पूछताछ से सामने आया कि यह धमाका जयश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के एक मॉड्यूल द्वारा रची गई बड़ी साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य देशभर में दहशत फैलाना था। आतंकियों ने दिल्ली में सेना भवन, एयर फोर्स कार्यालय, भाजपा मुख्यालय और संसद मार्ग जैसी महत्वपूर्ण इमारतों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। लेकिन उनका मुख्य फोकस उत्तर प्रदेश के धार्मिक केंद्रों पर था। अयोध्या में राम मंदिर के आसपास एक स्लीपर सेल को सक्रिय किया गया था, जबकि वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर को भी निशाना बनाया जाना था। इसके अलावा, अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर हमले की योजना थी ताकि अधिक से अधिक हताहत हो सकें।
खुफिया स्रोतों के मुताबिक, आतंकियों ने पिछले दो वर्षों में अमोनियम नाइट्रेट जैसे विस्फोटकों का भंडार जमा किया था, और दिल्ली धमाके के लिए सामग्री पिछले 30 दिनों में तैयार की गई। यह साजिश श्रीनगर में 19 अक्टूबर 2025 को लगाए गए आपत्तिजनक पोस्टर्स से जुड़ी हुई थी, जहां नौगाम पुलिस पोस्ट में एफआईआर दर्ज की गई थी।
गिरफ्तारियां और पूछताछ: ‘डॉक्टर आतंकियों’ का नेटवर्क
एनआईए और एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) की संयुक्त कार्रवाई से इस मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ। अब तक करीब 1,500 लोगों को हिरासत में लिया गया है। प्रमुख गिरफ्तारियां इस प्रकार हैं:
- 20-27 अक्टूबर 2025: शोपियां से मौलवी इरफान अहमद वाघय और गanderबल के वाकुरा से जामिर अहमद।
- 5 नवंबर 2025: सहरानपुर (उत्तर प्रदेश) से डॉक्टर अदील।
- 7 नवंबर 2025: अनंतनाग अस्पताल से एके-56 राइफल और गोला-बारूद बरामद।
- 8 नवंबर 2025: फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से डॉक्टर मुजम्मिल, साथ ही हथियार, पिस्टल और विस्फोटक जब्त।
- 9 नवंबर 2025: फरीदाबाद के धौज निवासी मदरासी।
- 10 नवंबर 2025: फरीदाबाद के धेरा कॉलोनी में अल-फलाह मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद इश्तियाक के घर से 2,563 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, 358 किलोग्राम अन्य विस्फोटक, डेटोनेटर और टाइमर बरामद। कुल मिलाकर 3,000 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक और बम बनाने का सामान जब्त किया गया।
पूछताछ में डॉक्टर शाहीन शाहिद प्रमुख नाम आया, जो अयोध्या में स्लीपर सेल को सक्रिय करने वाला था। उनकी चैट से कोडेड भाषा का खुलासा हुआ—’दावत’ का मतलब धमाका और ‘बिरयानी’ का मतलब विस्फोटक। एक संदेश में लिखा था: “दावत के लिए बिरयानी तैयार है।” यह ‘डॉक्टर आतंकियों’ के नेटवर्क का हिस्सा था, जिसमें कश्मीर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के लोग शामिल थे। जांच में डिजिटल ट्रेल्स, कम्युनिकेशन रिकॉर्ड्स और अन्य आतंकी संगठनों से लिंक की पड़ताल की जा रही है।
सुरक्षा कवच: उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट
दिल्ली धमाके के बाद उत्तर प्रदेश में अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी जैसे संवेदनशील शहरों में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया। एटीएस, पीएसी और स्थानीय खुफिया दलों ने संयुक्त अभियान चलाए। प्रमुख उपाय:
- अयोध्या: लता मंगेशकर चौक और टेढ़ी बाजार जैसे प्रवेश द्वारों पर वाहन जांच, ड्राइवर पूछताछ और फ्रिस्किंग पॉइंट्स बढ़ाए गए। मंदिर परिसर में आईडी सत्यापन अनिवार्य।
- वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर और घाटों के आसपास ड्रोन गश्त, 24×7 पुलिस पेट्रोलिंग। रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और एयरपोर्ट पर सतर्कता बरती जा रही।
- प्रयागराज: संगम क्षेत्र, प्रमुख मंदिरों और नदी किनारे रोडब्लॉक, बैरिकेडिंग और एंटी-सबोटाज स्क्वॉड तैनात। पार्किंग में खड़ी मोटरसाइकिलों और अनुपस्थित सामान की जांच।
- राज्यव्यापी: ड्रोन निगरानी, लाइव कैमरा, वाहन स्कैनिंग, आईडी चेक और सादे कपड़ों के पुलिसकर्मी भीड़ में तैनात। जिला पुलिस, एटीएस और खुफिया इकाइयों के बीच समन्वय बढ़ाया गया।
उत्तर प्रदेश के एडीजी (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश ने कहा, “डीजीपी ने धार्मिक स्थलों, संवेदनशील जिलों और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सभी एजेंसियां अलर्ट पर हैं।” अयोध्या के एक मंदिर अधिकारी ने बताया, “भक्तों की सुविधा बनी रहे, लेकिन सुरक्षा प्राथमिकता है।” वाराणसी के एक पुजारी ने कहा, “आस्था डर से बड़ी है; ये जांचें सबकी सुरक्षा के लिए हैं।”
सतर्कता और न्याय की राह:
यह साजिश न केवल धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की कोशिश थी, बल्कि देश की एकता को चुनौती देने वाली थी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।” एनआईए की जांच जारी है, और आशा है कि इससे आतंकी नेटवर्क के सारे सूत्र उजागर हो जाएंगे। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सतर्क खुफिया तंत्र ने बड़ी तबाही को टाल दिया। भविष्य में ऐसी साजिशों को चकमा देने के लिए सुरक्षा एजेंसियां और सशक्त होंगी।
