by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारत की प्रमुख साहित्यिक संस्था साहित्य अकादमी कल (14 नवंबर 2025) को अपनी राजधानी स्थित मुख्यालय में बाल साहित्य श्रेणी के प्रतिष्ठित वार्षिक पुरस्कारों का वितरण समारोह आयोजित करेगी। इस भव्य आयोजन की अध्यक्षता साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री माधव कौशिक करेंगे, जो विजेताओं को सम्मानित करेंगे। यह पुरस्कार बच्चों के साहित्य को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें 24 भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट रचनाओं को चुना गया है। खास चर्चा में 2025 महाकुंभ के वृत्तांत से प्रेरित बाल साहित्यिक कृतियां हैं, जो धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को नए अंदाज में पेश करती हैं। पुरस्कार के तहत प्रत्येक विजेता को 50,000 रुपये नकद राशि, तांबे की नक्काशीदार पट्टिका वाली एक डिब्बी और प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।
पुरस्कार का इतिहास और महत्व:
साहित्य अकादमी का बाल साहित्य पुरस्कार (बाल साहित्य पुरस्कार) वर्ष 2010 में स्थापित किया गया था। यह पुरस्कार विशेष रूप से 9 से 16 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए रचित साहित्य को सम्मानित करता है, जो कथा, कविता, निबंध, जीवनी या लोककथाओं जैसे विधाओं में हो। अकादमी की 24 आधिकारिक भाषाओं (संविधान की 8वीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं के अलावा अंग्रेजी और राजस्थानी) में से प्रत्येक के लिए एक पुरस्कार दिया जाता है।
यह पुरस्कार साहित्यिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के साथ-साथ बच्चों की कल्पनाशक्ति, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत करने वाली रचनाओं को प्रोत्साहित करता है। 2025 के पुरस्कार 2019 से 2023 के बीच प्रकाशित पुस्तकों पर आधारित हैं, जो महामारी काल की चुनौतियों के बीच लिखी गईं। चयन प्रक्रिया में सार्वजनिक आवेदनों की प्रारंभिक जांच, भाषा-विशेष जूरी (तीन सदस्यों वाली) की सिफारिश और कार्यकारी बोर्ड की अंतिम मंजूरी शामिल है। अध्यक्ष माधव कौशिक ने कहा, “बाल साहित्य राष्ट्र निर्माण का आधार है। ये रचनाएं नई पीढ़ी को सशक्त बनाती हैं।”
चयनित रचनाएं और चर्चित कृतियां:
इस वर्ष 24 भाषाओं में चयनित रचनाएं विविधता से भरी हैं, जिनमें लोककथाओं का आधुनिक पुनर्लेखन, पर्यावरण जागरूकता पर कथाएं और सांस्कृतिक उत्सवों के वर्णन प्रमुख हैं। विशेष रूप से, प्रयागराज में 2025 महाकुंभ महोत्सव के वृत्तांत से प्रेरित कुछ कृतियां चर्चा का केंद्र बनी हैं, जैसे कि तीर्थयात्रा, आध्यात्मिकता और सामाजिक सद्भाव पर आधारित बाल कहानियां। ये रचनाएं महाकुंभ की भव्यता को बच्चों की भाषा में सरल बनाती हैं, जो सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करती हैं।
नीचे 2025 बाल साहित्य पुरस्कार विजेताओं की पूरी सूची दी गई है (भाषा, लेखक, पुस्तक का शीर्षक और विधा सहित):
| भाषा | लेखक का नाम | पुस्तक का शीर्षक | विधा |
| असमिया | सुरेंद्र मोहन दास | अज्ञात (बाल कथा संग्रह) | कथा |
| बांग्ला | त्रिदीब कुमार चट्टोपाध्याय | अज्ञात (बाल उपन्यास) | उपन्यास |
| बोडो | बिनय कुमार ब्रह्मा | अज्ञात (बाल कविता) | कविता |
| अंग्रेजी | नितिन कुशालप्पा एमपी | दक्षिण: साउथ इंडियन मिथ्स एंड फेबल्स रीटोल्ड | कहानी संग्रह |
| गुजराती | अज्ञात | अज्ञात | कथा |
| हिंदी | सुशील शुक्ला | एक बटे बारह | कहानी संग्रह |
| कन्नड़ | के. शिवलिंगप्पा हंडीहल | अज्ञात (बाल लोककथा) | लोककथा |
| कश्मीरी | अज्ञात | अज्ञात | कविता |
| कोंकणी | नयना अधर्कर | अज्ञात (बाल निबंध) | निबंध |
| मैथिली | अज्ञात | अज्ञात | कथा |
| मलयालम | श्रीजित मूठेदाथ | पेंग्विनुकलुडे वंकारयिल (पेंगुइनों के महाद्वीप पर) | उपन्यास |
| मणिपुरी | अज्ञात | अज्ञात | कविता |
| मराठी | अज्ञात | अज्ञात | कहानी |
| नेपाली | अज्ञात | अज्ञात | उपन्यास |
| ओड़िया | अज्ञात | अज्ञात | कथा |
| पंजाबी | अज्ञात | अज्ञात | लोककथा |
| राजस्थानी | अज्ञात | अज्ञात | कविता |
| संथाली | अज्ञात | अज्ञात | निबंध |
| सिंधी | अज्ञात | अज्ञात | कहानी |
| तमिल | विष्णुपुरम सरावणन | अज्ञात (बाल जीवनी) | जीवनी |
| तेलुगु | गंगिसेट्टी शिवकुमार | अज्ञात (बाल पर्यावरण कथा) | कथा |
| उर्दू | अज्ञात | अज्ञात | उपन्यास |
नोट: कुछ पुस्तकों के शीर्षक स्रोतों में विस्तृत रूप से उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन ये 2019-2023 के बीच प्रकाशित मूल रचनाएं हैं।
समारोह की तैयारियां और अपेक्षाएं:
14 नवंबर को होने वाले इस समारोह में विजेताओं के अलावा साहित्य जगत के प्रमुख हस्तियां, बाल साहित्यकार, प्रकाशक और युवा पाठक भाग लेंगे। कार्यक्रम में पुरस्कार वितरण के साथ-साथ बाल साहित्य पर चर्चा सत्र और पुस्तक प्रदर्शनी भी होगी। अकादमी ने विशेष रूप से महाकुंभ 2025 से जुड़ी रचनाओं को हाइलाइट किया है, जो प्रयागराज के विशाल धार्मिक आयोजन की झलक बच्चों को देते हुए पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता जैसे संदेश प्रसारित करती हैं।
अध्यक्ष माधव कौशिक ने कहा, “ये पुरस्कार न केवल लेखकों को मान्यता देते हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ने की आदत को मजबूत करते हैं। महाकुंभ जैसे राष्ट्रीय आयोजनों पर आधारित रचनाएं सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखेंगी।” यह समारोह साहित्य अकादमी के 70 वर्षों के सफर का हिस्सा है, जो 1952 में स्थापित हुई और 1954 में औपचारिक रूप से शुरू हुई।
यह आयोजन बाल साहित्य को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। अधिक जानकारी के लिए साहित्य अकादमी की आधिकारिक वेबसाइट sahitya-akademi.gov.in देखें।
