by-Ravindra Sikarwar
लॉस एंजिल्स: अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक से पहले महिलाओं की खेल श्रेणियों में ट्रांसजेंडर एथलीट्स (खासकर ट्रांसजेंडर महिलाओं) की भागीदारी पर सख्त नीति लाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कई विश्वसनीय रिपोर्ट्स के अनुसार, IOC एक ब्लैंकेट बैन (सभी खेलों में पूर्ण प्रतिबंध) लागू करने पर विचार कर रही है, जो पुरुष प्यूबर्टी (यौवन) से गुजरे किसी भी एथलीट को महिलाओं की कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करने से रोकेगा। हालांकि, IOC ने स्पष्ट किया है कि “अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है” और चर्चाएं जारी हैं। यह कदम IOC की नई अध्यक्ष क्रिस्टी कोवेंट्री की चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में है, जो “महिलाओं की श्रेणी की सुरक्षा” पर जोर देती हैं।
प्रस्तावित नीति का पूरा विवरण:
- मुख्य प्रस्ताव: IOC की मेडिकल, हेल्थ एंड साइंस डायरेक्टर डॉ. जेन थॉर्नटन ने हाल ही में IOC सदस्यों को एक वैज्ञानिक प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें साबित हुआ कि पुरुष यौवन से गुजरने वाले एथलीट्स में शारीरिक फायदे (जैसे मांसपेशियां, हड्डियों की मजबूती, फेफड़ों की क्षमता) स्थायी होते हैं, जो हार्मोन थेरेपी से पूरी तरह कम नहीं किए जा सकते। इसलिए, ट्रांसजेंडर महिलाओं (जो जन्म के समय पुरुष थीं) को महिलाओं की कैटेगरी में प्रतिबंधित करने की सिफारिश की गई है।
- समयसीमा: नीति की घोषणा जनवरी 2026 में मिलान (इटली) में IOC सेशन में हो सकती है। 2026 विंटर ओलंपिक से पहले लागू होना मुश्किल, लेकिन 2028 समर ओलंपिक से पहले जरूर।
- टेस्टिंग का तरीका: वर्ल्ड एथलेटिक्स की तर्ज पर चीक स्वैब टेस्ट (SRY जीन डिटेक्शन) से जैविक लिंग की जांच हो सकती है। यह गैर-आक्रामक और वैज्ञानिक है।
- DSD एथलीट्स पर असमंजस: ट्रांसजेंडर के अलावा, डिफरेंसेज ऑफ सेक्शुअल डेवलपमेंट (DSD) वाले एथलीट्स (जैसे जन्म के समय महिला बताए गए लेकिन पुरुष क्रोमोसोम या टेस्टोस्टेरोन लेवल वाले) पर भी प्रतिबंध की चर्चा है, लेकिन इसमें आंतरिक विरोध है। पेर lिस 2024 में इमाने खलीफ और लिन यू-तिंग की विवादास्पद भागीदारी ने इस मुद्दे को गरमाया।
वर्तमान IOC नीति vs नई प्रस्तावित नीति:
| पैरामीटर | वर्तमान नीति (2021 फ्रेमवर्क) | प्रस्तावित नीति (2028 से संभावित) |
| निर्णय कौन लेगा? | प्रत्येक खेल की अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन | IOC द्वारा सभी खेलों के लिए एकसमान नियम |
| टेस्टोस्टेरोन लेवल | थ्रेशोल्ड के नीचे रखने पर अनुमति | कोई छूट नहीं, पुरुष प्यूबर्टी पर पूर्ण बैन |
| उदाहरण | टोक्यो 2021 में लॉरेल हबर्ड (वेटलिफ्टिंग) | कोई ट्रांसजेंडर महिला महिलाओं की कैटेगरी में नहीं |
| DSD एथलीट्स | फेडरेशन पर निर्भर | संभावित प्रतिबंध, लेकिन विवादास्पद |
वर्तमान में 20+ खेलों ने पहले से ही ट्रांसजेंडर महिलाओं पर बैन लगा रखा है, जैसे एथलेटिक्स, स्विमिंग, रग्बी।
क्यों हो रहा यह बदलाव?
- वैज्ञानिक आधार: थॉर्नटन की प्रेजेंटेशन में साफ कहा गया कि हार्मोन दवाओं से भी पुरुष फायदे बने रहते हैं। वर्ल्ड एथलेटिक्स के आंकड़ों में 50-60 ऐसे केस जहां पुरुष प्यूबर्टी वाले एथलीट्स ने महिलाओं की स्पर्धाओं में फाइनल में जगह बनाई।
- राजनीतिक दबाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी 2025 में एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर अमेरिका में ट्रांसजेंडर एथलीट्स पर बैन लगाया और 2028 LA ओलंपिक में भी लागू करने की धमकी दी। उन्होंने वीजा डिनाई की बात कही। IOC इससे टकराव नहीं चाहता।
- पेरिस 2024 विवाद: इमाने खलीफ (अल्जीरिया) और लिन यू-तिंग (ताइवान) की गोल्ड मेडल जीत ने वैश्विक बहस छेड़ दी। दोनों DSD केस थे, ट्रांसजेंडर नहीं, लेकिन जेंडर एलिजिबिलिटी पर सवाल उठे।
- कोवेंट्री का वादा: जिम्बाब्वे की पूर्व स्विमर और IOC की पहली महिला अध्यक्ष क्रिस्टी कोवेंट्री ने चुनाव में “महिलाओं की कैटेगरी की प्राथमिकता” का वादा किया। जून 2025 में उन्होंने वर्किंग ग्रुप बनाया।
विरोध और समर्थन:
- समर्थन: महिला अधिकार समूह जैसे सेक्स मैटर्स ने इसे “सामान्य ज्ञान की जीत” कहा। कई फेडरेशन पहले से बैन लागू कर चुकी हैं।
- विरोध: LGBTQ+ ग्रुप्स ने इसे भेदभाव बताया। एक स्टडी (ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन, IOC फंडेड) में कहा गया कि ट्रांस महिलाओं में कुछ क्षेत्रों में नुकसान भी होते हैं। आलोचक कहते हैं कि ट्रांस एथलीट्स बहुत कम हैं (ओलंपिक में 0.001% से कम) और कोई मेडल नहीं जीता।
- DSD पर विवाद: कैस्टर सेमेन्या जैसे एथलीट्स प्रभावित होंगे। कुछ सदस्य इसका विरोध कर रहे हैं।
IOC का आधिकारिक बयान:
IOC ने सभी रिपोर्ट्स पर कहा: “वर्किंग ग्रुप की चर्चाएं जारी हैं। कोई निर्णय नहीं लिया गया।” लेकिन सूत्रों के अनुसार, “दिशा स्पष्ट है – महिलाओं की श्रेणी की सुरक्षा।”
निष्कर्ष और प्रभाव:
यह नीति लागू हुई तो 2028 LA ओलंपिक में ट्रांसजेंडर महिलाओं की भागीदारी महिलाओं की स्पर्धाओं में खत्म हो जाएगी। इससे खेलों में निष्पक्षता बढ़ेगी, लेकिन समावेशिता पर सवाल उठेंगे। IOC सभी स्टेकहोल्डर्स से सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। अंतिम फैसला 2026 तक आने की उम्मीद। खेल प्रेमी अब मिलान सेशन का इंतजार कर रहे हैं।
