by-Ravindra Sikarwar
माली के पश्चिमी हिस्से में कोब्री के निकट गुरुवार को पांच भारतीय नागरिकों का अपहरण कर लिया गया। ये भारतीय एक विद्युतीकरण परियोजना पर काम कर रहे थे। हथियारबंद लोगों ने उनके काफिले को रोक लिया और उन्हें बंधक बना लिया। कंपनी के एक प्रतिनिधि ने पुष्टि करते हुए कहा, “हम पांच भारतीय नागरिकों के अपहरण की पुष्टि करते हैं।” कंपनी ने सुरक्षा के मद्देनजर बाकी भारतीय कर्मचारियों को राजधानी बामाको स्थानांतरित कर दिया है।
अपहरण की घटना के पीछे अभी तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, माली में बढ़ती अस्थिरता के बीच अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से जुड़े जिहादी गुटों पर संदेह जताया जा रहा है। विशेष रूप से, अल-कायदा से संबद्ध ग्रुप फॉर द सपोर्ट ऑफ इस्लाम एंड मुस्लिम्स (जेएनआईएम) इस क्षेत्र में सक्रिय है और विदेशी नागरिकों के अपहरण की घटनाओं में शामिल रहा है। माली में विदेशी लोगों का अपहरण कोई नई बात नहीं है। सितंबर 2025 में जेएनआईएम के लड़ाकों ने बामाको के पास दो संयुक्त अरब अमीराती नागरिकों और एक ईरानी को उठा लिया था, जिन्हें पिछले सप्ताह करीब 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के फिरौती भुगतान के बाद रिहा किया गया।
माली की अस्थिरता का पृष्ठभूमि:
माली अफ्रीका का एक पश्चिमी देश है, जो 2012 से लगातार अस्थिरता का शिकार है। यह सब तुआरेग विद्रोह से शुरू हुआ, जिसके बाद कई सैन्य तख्तापलट हुए। वर्तमान में देश सैन्य जंटा के शासन में है, जिसके नेता असिमी गोइता ने सत्ता संभाली है। गोइता ने विद्रोह को कुचलने का वादा किया था, लेकिन फ्रांस और अमेरिका के साथ रक्षा संबंध तोड़ने और रूस की ओर झुकाव के बाद भी सफलता नहीं मिली। जिहादी समूहों ने उत्तरी माली से केंद्र और सीमावर्ती इलाकों—जैसे बुर्किना फासो और नाइजर—तक अपना प्रभाव फैला लिया है। इन क्षेत्रों में जेएनआईएम ने सख्त नियम लागू किए हैं, जैसे महिलाओं को सार्वजनिक वाहनों में हिजाब पहनने का आदेश और यात्रा पर पाबंदियां।
हाल के महीनों में जेएनआईएम ने ईंधन आपूर्ति पर कड़ा नाकाबंदी लगा दी है, जिससे बामाको सहित पूरे देश में ईंधन की भारी कमी हो गई। इससे आर्थिक संकट गहरा गया है—स्कूल बंद हो गए, फसल कटाई प्रभावित हुई और बिजली की आपूर्ति सीमित पड़ गई। सोमवार को राष्ट्रपति गोइता ने नागरिकों से अनावश्यक यात्राओं पर रोक लगाने की अपील की और कहा कि “हम ईंधन उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।” बामाको अभी भी सरकार के नियंत्रण में है, लेकिन जेएनआईएम की राजधानी की ओर बढ़ती गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया:
घटना की जानकारी मिलने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। एक सुरक्षा स्रोत ने गुमनामी की शर्त पर पुष्टि की कि अपहरण गुरुवार को हुआ था। कंपनी ने बाकी भारतीय कर्मचारियों को सुरक्षित बामाको पहुंचा दिया है, लेकिन अपहृत पांच लोगों की रिहाई के लिए प्रयास जारी हैं। माली में भारतीय समुदाय मुख्य रूप से निर्माण और इंजीनियरिंग परियोजनाओं में लगा हुआ है, और ऐसी घटनाएं उनके लिए खतरा बढ़ा देती हैं।
यह अपहरण माली की बढ़ती जिहादी हिंसा का एक और उदाहरण है, जो न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा रहा है बल्कि विदेशी निवेशकों और श्रमिकों को भी जोखिम में डाल रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और प्रभावित देशों को अब संयुक्त प्रयासों से इस संकट से निपटना होगा।
