by-Ravindra Sikarwar
पेरिस के विश्व प्रसिद्ध लूव्र संग्रहालय, जो मोना लीसा और अन्य अमूल्य कलाकृतियों का घर है, हाल ही में एक शर्मनाक सुरक्षा खामी के केंद्र में आ गया है। अक्टूबर 2025 में हुए एक साहसिक चोरी के मामले की जांच के दौरान सामने आया है कि संग्रहालय की वीडियो निगरानी प्रणाली का पासवर्ड महज “लूव्र” था। यह खुलासा न केवल संग्रहालय की साइबर सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर करता है, बल्कि दशकों पुरानी उपेक्षा का भी प्रमाण देता है। फ्रांस की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी (ANSSI) द्वारा 2014 में की गई ऑडिट से प्राप्त गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर यह जानकारी सामने आई है, जो फ्रेंच अखबार लिबरेशन द्वारा प्रकाशित की गई। आइए इस घटना, इसके कारणों और परिणामों पर विस्तार से नजर डालें।
चोरी का विवरण: एक साहसिक डकैती
19 अक्टूबर 2025 को, सुबह करीब 9:30 बजे, जब संग्रहालय पर्यटकों से भरा हुआ था, चार नकाबपोश चोरों ने निर्माण कार्यकर्ताओं का भेष धारण कर संग्रहालय में घुसपैठ की। वे एक फोर्कलिफ्ट ट्रक का उपयोग करके सेना के किनारे पर स्थित अपोलो गैलरी की दूसरी मंजिल की बालकनी तक पहुंचे। पावर टूल्स से खिड़की तोड़कर अंदर दाखिल होने के बाद, उन्होंने महज सात मिनट में फ्रांसीसी क्राउन ज्वेल्स के नौ कीमती टुकड़ों पर हाथ साफ कर लिया। इन ज्वेलरी की अनुमानित कीमत लगभग 88 मिलियन यूरो (करीब 102 मिलियन डॉलर या 850 करोड़ रुपये) बताई जा रही है।
चोरों ने ज्वेलरी को बैगों में भरा और उसी फोर्कलिफ्ट से भाग निकले। संग्रहालय के आंतरिक अलार्म और कैमरे सक्रिय हो गए, लेकिन बाहरी परिधि की सुरक्षा में चूक के कारण चोर आसानी से फरार हो गए। अपोलो गैलरी तब से बंद पड़ी हुई है, और ज्वेलरी अभी तक बरामद नहीं हो सकी है। पुलिस ने चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से तीन चोरी में शामिल होने के आरोपी हैं। वे संगठित गिरोह द्वारा चोरी और आपराधिक साजिश के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
सुरक्षा सिस्टम का पासवर्ड: एक हास्यास्पद कमजोरी
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा वीडियो निगरानी प्रणाली का पासवर्ड था – “लूव्र”। ANSSI के विशेषज्ञों ने 2014 में संग्रहालय के आईटी नेटवर्क का परीक्षण किया था, जहां अलार्म, एक्सेस कंट्रोल और वीडियो सर्विलांस से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण कनेक्टेड थे। उन्होंने आसानी से नेटवर्क में घुसपैठ कर वीडियो फुटेज को मैनिपुलेट करने और बैज एक्सेस को बदलने में सफलता पाई। रिपोर्ट में पासवर्ड को “ट्रिवियल” (साधारण) बताया गया, जो महज संग्रहालय के नाम पर आधारित था। इसी तरह, थेल्स कंपनी द्वारा प्रदान की गई सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर का पासवर्ड “थेल्स” था।
यह समस्या केवल 2014 तक सीमित नहीं थी। 2025 की चोरी के समय भी सिस्टम में समान कमजोरियां मौजूद थीं, जैसा कि हालिया जांच से पता चला। संग्रहालय अभी भी 2003 में खरीदी गई पुरानी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहा था, जो अब डेवलपर द्वारा सपोर्ट नहीं की जाती। हार्डवेयर विंडोज सर्वर 2003 पर चल रहा था, जो आधुनिक साइबर हमलों के लिए आसान शिकार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई हैकर इन पासवर्ड्स को जानता, तो वह न केवल वीडियो को डिसेबल कर सकता था, बल्कि कलाकृतियों की चोरी या क्षति को भी सुगम बना सकता था।
सोशल मीडिया पर इस खुलासे ने मीम्स और व्यंग्य की बाढ़ ला दी। एक यूजर ने ट्वीट किया, “अगर आपको लगता है कि आपका काम खराब है, तो सोचिए लूव्र जैसे संग्रहालय की वीडियो सिस्टम का पासवर्ड ‘लूव्र’ था!” साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे “डंपस्टर-लेवल” (कचरा स्तर की) ऑपरेशनल सिक्योरिटी बताया, जो वीडियो गेम के NPC (नॉन-प्लेयर कैरेक्टर) जैसी लगती है।
दशकों पुरानी उपेक्षा: ऑडिट्स की अनदेखी
यह पहली बार नहीं है जब लूव्र की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। फ्रांस की कोर्ट ऑफ अकाउंट्स की एक रिपोर्ट (जो चोरी से पहले तैयार की गई थी) से पता चला कि 2015 के एक ऑडिट की 40 सिफारिशें अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। ये अपग्रेड्स 2032 तक ही पूरे होंगे। रिपोर्ट में कहा गया कि संग्रहालय ने “दृश्यमान और आकर्षक” परियोजनाओं – जैसे कला खरीद और पैलेस रेनोवेशन – पर प्राथमिकता दी, जबकि सुरक्षा को नजरअंदाज किया। 2018-2024 के बीच मेंटेनेंस पर 27 मिलियन यूरो और पैलेस रिस्टोरेशन पर 60 मिलियन यूरो खर्च हुए, लेकिन सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश नगण्य रहा।
2014 के ANSSI ऑडिट ने चेतावनी दी थी कि संग्रहालय “आक्रामक हमले के खतरे को नजरअंदाज नहीं कर सकता, जिसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।” 2017 में एक अन्य ऑडिट ने “गंभीर कमियां” बताईं, जैसे छतों पर आसान पहुंच, पुरानी सिस्टम और खराब प्रबंधित विजिटर फ्लो। 2024 तक केवल 39% कमरों में कैमरे लगे थे, और चोरों के प्रवेश बिंदु पर कैमरा बालकनी की ओर मुंह करके खड़ा था, न कि सीधे। संस्कृति मंत्री रशीदा दाती ने संसद में स्वीकार किया कि “बाहरी सुरक्षा में बड़ी खामियां” थीं, हालांकि आंतरिक सिस्टम काम कर रहे थे।
लूव्र के निदेशक लॉरेंस डेस कार्स ने कहा कि 2021 में पदभार संभालते समय वे संग्रहालय की सुरक्षा स्थिति से “हैरान” थे। उन्होंने इसे अपनी प्राथमिकता बताया, लेकिन बजट की कमी और पुरानी बुनियादी ढांचे के कारण सुधार धीमे पड़े।
सरकारी प्रतिक्रिया और भविष्य की योजनाएं:
चोरी के बाद फ्रांस सरकार ने तत्काल कदम उठाए। संस्कृति मंत्री दाती ने वर्ष के अंत तक “एंटी-रैमिंग” (वाहन टक्कर रोकने वाले) और “एंटी-इंट्रूजन” (घुसपैठ रोकने वाले) बैरियर लगाने की घोषणा की। एक प्रशासनिक जांच चल रही है, जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। ANSSI ने नई सिफारिशें जारी की हैं, जिसमें मजबूत पासवर्ड, नियमित अपडेट और साइबर ट्रेनिंग शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना न केवल लूव्र, बल्कि अन्य सांस्कृतिक संस्थानों के लिए सबक है। साइबर सुरक्षा फर्म के विशेषज्ञ मलिक ने कहा, “जब अमूल्य खजानों की रक्षा करने वाले सिस्टम अनुमानित क्रेडेंशियल्स पर निर्भर हों, तो यह सुरक्षा संस्कृति की कमजोरी का संकेत है।”
एक जागृति का अवसर:
लूव्र चोरी – जो मानव इतिहास की सबसे बड़ी कलाकृति डकैतियों में से एक है – ने साबित कर दिया कि तकनीकी चमक के पीछे बुनियादी सुरक्षा की उपेक्षा कितनी महंगी पड़ सकती है। “लूव्र” जैसे साधारण पासवर्ड ने संग्रहालय को हंसी का पात्र बना दिया, लेकिन यह वैश्विक स्तर पर साइबर जागरूकता की याद दिलाता है। यदि सुधार समय पर होते, तो शायद 850 करोड़ रुपये की ज्वेलरी सुरक्षित रहती। अब, जब जांच जारी है, उम्मीद है कि लूव्र न केवल अपनी सुरक्षा मजबूत करेगा, बल्कि दुनिया को एक मजबूत मॉडल भी प्रस्तुत करेगा।
