by-Ravindra Sikarwar
दक्षिण-पूर्व एशिया के द्वीप राष्ट्र फिलीपींस को एक बार फिर प्रकृति के प्रकोप ने जकड़ लिया है। तूफान कलमायगी (स्थानीय नाम टिनो), जो इस वर्ष का सबसे घातक प्राकृतिक आपदा साबित हुआ, ने मंगलवार 4 नवंबर 2025 को केंद्रीय प्रांतों पर कहर बरपाया। इस तूफान से कम से कम 114 लोगों की पुष्टि हुई मौत हो चुकी है, जबकि 127 अन्य लापता हैं, कुल 241 लोगों का जीवन संकट में है। बुधवार 5 नवंबर को राष्ट्रपति फर्डिनैंड मार्कोस जूनियर ने आपातकाल की घोषणा की, जो देश के इतिहास में इस साल की सबसे बड़ी आपदा के बाद उठाया गया कदम है। यह घोषणा आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान की गई, जिसका उद्देश्य तत्काल राहत को तेज करना और आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी रोकना है। तूफान ने मुख्य रूप से सेबू प्रांत को निशाना बनाया, जहां बाढ़ और नदी के उफान ने हजारों घरों को पानी में डुबो दिया। फिलीपींस, जो हर साल औसतन 20 तूफानों का सामना करता है, अब जलवायु परिवर्तन के दौर में और अधिक संवेदनशील हो गया है, जहां लगातार आने वाली आपदाएं अर्थव्यवस्था और जनजीवन को चोट पहुंचा रही हैं।
तूफान का आगमन और तीव्रता:
तूफान कलमायगी का जन्म प्रशांत महासागर में हुआ और यह फिलीपींस के पूर्वी तट पर पहुंचा। मौसम विभाग PAGASA के अनुसार, तूफान की हवाओं की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई, जबकि झोंकों की रफ्तार 187 किलोमीटर प्रति घंटा रही। मंगलवार को पश्चिमी पलावान प्रांत के ऊपर से गुजरते हुए यह तूफान दक्षिण चीन सागर में प्रवेश कर गया, लेकिन तब तक केंद्रीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचा चुका था। विशेषज्ञों का कहना है कि तूफान ने 10 फीट तक ऊंची तूफानी लहरें पैदा कीं, जो तटीय इलाकों में घुस आईं।
तूफान से पहले अधिकारियों ने पूर्वी और केंद्रीय प्रांतों में 3.87 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया। नौसेना ने फेरी और मछली पकड़ने वाली नावों पर प्रतिबंध लगा दिया, जिससे 100 बंदरगाहों पर 3,500 से अधिक यात्री और ट्रक चालक फंस गए। घरेलू उड़ानों में 186 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। सेबू प्रांत में भारी बारिश ने नदियों और नालों को उफान पर ला दिया, जिससे फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा हो गई। सिविल डिफेंस कार्यालय के डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर बर्नार्डो राफेलिटो एलेजांद्रो IV ने बताया कि अधिकांश मौतें सेबू में हुईं, जहां बाढ़ ने गांवों को पूरी तरह डुबो दिया।
प्रभावित क्षेत्र और मौतों का विवरण:
सेबू प्रांत सबसे अधिक प्रभावित हुआ, जहां बाढ़ ने उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों को नष्ट कर दिया। यहां की नदियां उफान पर आ गईं, और मिट्टी के ढहने से कई घर दब गए। मौतों में से कई बाढ़ में बहने या मलबे में दबने से हुईं। नेग्रोस द्वीप पर भी भारी नुकसान हुआ, जहां बाढ़ ने फसलें बर्बाद कर दीं। तूफान ने सेबू के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचाया—हालांकि, अधिकारियों ने पहले ही भूकंप पीड़ितों को अस्थायी तंबुओं से मजबूत आश्रय स्थलों में स्थानांतरित कर लिया था, जिससे उत्तरी सेबू के भूकंप प्रभावित गांवों में बाढ़ का असर कम रहा।
मौतों की संख्या में वृद्धि का एक कारण फिलीपींस एयर फोर्स का सुपर ह्यूई हेलीकॉप्टर क्रैश भी है, जो मंगलवार को आगुसान डेल सूर प्रांत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें छह चालक दल के सदस्य मारे गए, जो तूफान प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाने जा रहे थे। सैन्य अधिकारियों ने इसे तूफान से जुड़ी मौतों में गिना है। कुल मिलाकर, तूफान ने 50,000 से अधिक परिवारों को बेघर कर दिया, और बुनियादी ढांचे को अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचाया। सेबू में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई, जबकि संचार नेटवर्क ठप हो गया।
आपातकाल घोषणा और सरकारी कदम:
राष्ट्रपति मार्कोस की आपातकाल घोषणा ‘राष्ट्रीय विपत्ति की स्थिति’ के रूप में की गई, जो आपदा प्रबंधन काउंसिल को विशेष शक्तियां देती है। इसका मुख्य उद्देश्य:
- तत्काल राहत वितरण: आपातकालीन कोषों को तेजी से जारी करना, ताकि भोजन, दवाएं और अस्थायी आश्रय जल्द पहुंचें।
- कालाबाजारी पर रोक: आवश्यक वस्तुओं जैसे चावल, पानी और ईंधन की जमाखोरी और अत्यधिक मूल्य वृद्धि को दंडित करना।
- सैन्य सहायता: फिलीपींस आर्मी और नेवी को राहत कार्यों के लिए तैनात करना, जिसमें हेलीकॉप्टर और नावों से बचाव शामिल है।
सिविल डिफेंस कार्यालय ने सेबू को ‘आपदा की स्थिति’ घोषित किया, जिससे स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त धन मिलेगा। राष्ट्रपति मार्कोस ने कहा, “यह आपदा हमारी एकजुटता की परीक्षा है। हम हर प्रभावित को न्याय देंगे।” अंतरराष्ट्रीय सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस से संपर्क किया गया है। फिलीपींस सरकार ने अगले कुछ दिनों में 1 करोड़ डॉलर का राहत पैकेज घोषित किया, जिसमें भोजन किट, चिकित्सा सहायता और पुनर्निर्माण शामिल है।
बचाव और पुनर्वास प्रयास:
बचाव कार्य अभी भी जारी हैं, खासकर सेबू के उत्तरी हिस्सों में जहां मलबा साफ करना मुश्किल है। सेना ने 500 से अधिक सैनिक तैनात किए हैं, जो ड्रोन और रडार की मदद से लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। स्थानीय एनजीओ और स्वयंसेवक भोजन वितरण में जुटे हैं। भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में पहले से ही कमजोर बुनियादी ढांचे ने तूफान को और घातक बना दिया, लेकिन पूर्व चेतावनी प्रणाली ने हजारों जानें बचाईं। अधिकारियों ने बताया कि 3,500 से अधिक लोग अभी भी बंदरगाहों पर फंसे हैं, जिन्हें सुरक्षित स्थानांतरित किया जा रहा है।
वैश्विक प्रभाव और चेतावनी:
तूफान कलमायगी अब दक्षिण चीन सागर में ताकत हासिल कर रहा है और गुरुवार को वियतनाम के केंद्रीय प्रांतों में दस्तक देगा। वहां कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ की चेतावनी जारी है, जहां फसल कटाई का मौसम चल रहा है। वियतनाम ने लाखों लोगों के स्थानांतरण का आदेश दिया है। फिलीपींस में ही, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में एक और तूफान विकसित हो रहा है, जो अगले सप्ताह उत्तरी क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण तूफानों की तीव्रता बढ़ रही है, जो फिलीपींस जैसे द्वीप राष्ट्रों के लिए खतरा है।
फिलीपींस की आपदा इतिहास और सबक:
फिलीपींस ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है, जहां हर साल 20 से अधिक तूफान आते हैं। 2013 के तूफान हैयान ने 6,000 से अधिक मौतें की थीं, जबकि 2020 के तूफान रोलैंड ने हजारों को बेघर किया। इस बार की आपदा ने सरकार को पूर्व चेतावनी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता की अपील की गई है, ताकि पुनर्निर्माण तेज हो। राष्ट्रपति मार्कोस ने संसद से विशेष सत्र बुलाने का ऐलान किया, जहां आपदा प्रबंधन नीतियों पर चर्चा होगी।
यह त्रासदी फिलीपींस के लचीलेपन को परख रही है, जहां लोग आपस में हाथ बंटाकर खड़े हो रहे हैं। लेकिन यह भी याद दिलाती है कि जलवायु संकट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रभावित परिवारों के लिए न्याय और पुनर्वास सुनिश्चित करना अब सरकार की प्राथमिकता है, ताकि कलमायगी जैसी आपदाएं भविष्य में कम घातक साबित हों।
