by-Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल डिंडोरी जिले में एक सड़क हादसे ने एक निर्दोष परिवार को हमेशा के लिए छीन लिया। 5 नवंबर 2025 को दोपहर करीब 2 बजे जबलपुर-अमरकंटक मार्ग पर कोहनी गांव के पास एक भारी ट्रेलर और मोटरसाइकिल के बीच हुई भयानक टक्कर में चार लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में एक दंपति, उनकी 12 वर्षीय बेटी और एक अन्य महिला शामिल हैं, जो एक ही मोटरसाइकिल पर सवार थे। यह हादसा न केवल तेज रफ्तार का शिकार बना, बल्कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में सड़क सुरक्षा की लापरवाही को भी उजागर करता है। स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि परिवार के शेष सदस्य सदमे में डूबे हुए हैं। यह घटना मध्य प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों की एक कड़ी है, जहां पिछले एक वर्ष में 15,000 से अधिक दुर्घटनाओं में 8,000 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं।
हादसे की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम:
डिंडोरी जिला, जो मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित है, घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों के लिए जाना जाता है। यहां की सड़कें संकरी और उबड़-खाबड़ हैं, जो भारी वाहनों के लिए खतरनाक साबित होती हैं। जबलपुर-अमरकंटक मार्ग एक व्यस्त राजमार्ग है, जो पर्यटकों और स्थानीय व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन रखरखाव की कमी और वाहनों की अधिक संख्या इसे दुर्घटना प्रवण बनाती है।
पुलिस जांच के अनुसार, मृतक दंपति—रामेश्वर पटेल (35 वर्ष) और उनकी पत्नी सुनीता पटेल (32 वर्ष)—अपनी बेटी प्रिया (12 वर्ष) और सुनीता की बहन राधा (28 वर्ष) के साथ कोहनी गांव से नजदीकी बाजार की ओर जा रहे थे। वे एक पुरानी मोटरसाइकिल पर सवार थे, जो चार लोगों के वजन से लदे हुए थी। दूसरी ओर, ट्रेलर चालक तेज गति से लकड़ी का भारी भार लादे अमरकंटक की ओर बढ़ रहा था। घटनास्थल पर एक तीखा मोड़ है, जहां ट्रेलर ने नियंत्रण खो दिया और सामने आ रही मोटरसाइकिल से जोरदार धक्का मार दिया।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मोटरसाइकिल के परखच्चे उड़ गए, और सभी चारों सवार सड़क पर बिखर गए। रामेश्वर पटेल, जो मोटरसाइकिल चला रहे थे, मौके पर ही दम तोड़ दिया। सुनीता और राधा को गंभीर चोटें आईं, और वे अस्पताल पहुंचने से पहले ही चल बसे। सबसे छोटी प्रिया को सिर में गहरा घाव लगा, जिससे उसकी सांसें थम गईं। हादसे के बाद ट्रेलर चालक मौके से फरार हो गया, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने वाहन को जब्त कर लिया। पुलिस को सूचना मिलते ही डिंडोरी थाने की टीम मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।
मृतकों का परिवार और उनका जीवन:
मृतक रामेश्वर पटेल डिंडोरी जिले के कोहनी गांव के एक छोटे किसान थे, जो महुआ और अन्य वन उत्पादों की खेती पर निर्भर थे। उनका परिवार गरीबी रेखा से नीचे आता था, और वे सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला गैस कनेक्शन का लाभ ले चुके थे। सुनीता गृहिणी थीं, जो गांव की आंगनवाड़ी में कभी-कभी सहायता करती थीं। उनकी बेटी प्रिया स्थानीय सरकारी स्कूल में कक्षा 7 की छात्रा थी, जो पढ़ाई में होशियार थी और भविष्य में डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। राधा, सुनीता की छोटी बहन, अविवाहित थी और परिवार की आर्थिक मदद के लिए नजदीकी बाजार में सब्जी बेचती थी।
परिवार के पास एक छोटा सा घर था, जहां रामेश्वर के बुजुर्ग माता-पिता और एक छोटा भाई रहता है। हादसे की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। रामेश्वर के पिता ने रोते हुए कहा, “मेरा बेटा परिवार का इकलौता कमाने वाला था। अब हम क्या करेंगे?” प्रिया के स्कूल में विशेष सभा बुलाई गई, जहां शिक्षकों ने उसकी स्मृति में पौधरोपण किया। स्थानीय एनजीओ ने परिवार को तत्काल 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का वादा किया है।
जांच और प्रारंभिक निष्कर्ष:
डिंडोरी पुलिस ने आईपीसी की धारा 304ए (लापरवाही से मौत) और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। एसपी डिंडोरी ने बताया कि ट्रेलर चालक की तलाश जारी है, और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि ट्रेलर की ब्रेक फेल हो सकती है, और चालक शराब के नशे में था। सड़क पर मोड़ के पास चेतावनी संकेतों की कमी भी एक कारण है। फॉरेंसिक टीम ने सैंपल लिए हैं, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चोटों की गहराई का पता चलेगा।
मध्य प्रदेश में सड़क हादसे एक गंभीर समस्या हैं। राज्य परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में 55,000 से अधिक दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 18,000 मौतें दर्ज की गईं। डिंडोरी जैसे आदिवासी जिलों में 70% हादसे दोपहिया वाहनों से जुड़े हैं, जहां ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार प्रमुख कारक हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण सड़कों पर स्पीड ब्रेकर, बेहतर लाइटिंग और ड्राइवर ट्रेनिंग की कमी घातक साबित हो रही है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और सहायता:
मध्य प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये प्रत्येक की अनुग्रह राशि की घोषणा की है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने शोक संदेश जारी कर कहा कि दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी। स्थानीय विधायक ने गांव का दौरा कर परिवार से मुलाकात की और सड़क मरम्मत का आश्वासन दिया। जिला कलेक्टर ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है, जो 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी।
सोशल मीडिया पर इस हादसे की निंदा हो रही है, जहां #RoadSafetyMP जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। एक्टिविस्ट्स ने मांग की है कि ट्रेलर जैसे भारी वाहनों पर ग्रामीण मार्गों में प्रतिबंध लगाया जाए। एनएचएआई ने भी मार्ग पर सर्वे का ऐलान किया है।
व्यापक प्रभाव और सबक:
यह हादसा न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं से प्रतिवर्ष 20,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है, और अधिकांश पीड़ित गरीब तबके के होते हैं। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि:
- ओवरलोडिंग पर सख्ती: चार लोगों को एक बाइक पर ले जाना अवैध है।
- जागरूकता अभियान: स्कूलों और गांवों में हेलमेट और सीटबेल्ट के महत्व पर फोकस।
- बुनियादी ढांचा सुधार: संकरी सड़कों को चौड़ा करना और संकेतक लगाना।
- ट्रक चालकों की जांच: नियमित मेडिकल टेस्ट और स्पीड गन का उपयोग।
यह दुखद घटना हमें याद दिलाती है कि सड़कें जीवनरेखा हैं, लेकिन लापरवाही उन्हें काल बनाती हैं। प्रभावित परिवार को न्याय मिले और ऐसी घटनाएं रुकें, यही प्रार्थना है। डिंडोरी पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर 100 जारी किया है, जहां सड़क सुरक्षा संबंधी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।
