by-Ravindra Sikarwar
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में कथित धांधली के आरोपों ने राजनीतिक हलकों को हिला दिया है, और अब इस विवाद में एक अंतरराष्ट्रीय मोड़ आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 5 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘एच-फाइल्स’ नामक प्रस्तुति के जरिए दावा किया कि राज्य में 25 लाख फर्जी वोट डाले गए, जिसके लिए एक ब्राजीलियन मॉडल की पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया। इस तस्वीर को 22 बार विभिन्न नामों से मतदाता सूची में शामिल किया गया, जो चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस दावे के बाद, ब्राजीलियन मॉडल लरिसा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी हैरानी जाहिर की, जिसमें उन्होंने कहा कि यह उनकी पुरानी स्टॉक इमेज है और वे भारत या चुनावों से बिल्कुल अनजान हैं। यह घटना न केवल भारतीय लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है।
विवाद की पृष्ठभूमि और राहुल गांधी का आरोप:
हरियाणा विधानसभा चुनाव अक्टूबर 2024 में हुए थे, जहां भाजपा ने अप्रत्याशित रूप से बहुमत हासिल किया, जबकि पूर्वानुमानों में कांग्रेस की जीत की संभावना जताई गई थी। कांग्रेस ने हार के बाद ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। 5 नवंबर को राहुल गांधी ने केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तृत डेटा पेश किया। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में कुल 2 करोड़ मतदाताओं में से 25 लाख (लगभग 12%) फर्जी थे, जिनमें 5.21 लाख डुप्लिकेट, 93,174 अमान्य पते और 19.26 लाख बल्क वोट शामिल हैं।
राहुल ने एक स्लाइड दिखाई, जिसमें एक महिला की तस्वीर को ‘यह कौन है?’ कैप्शन के साथ प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा, “यह महिला ब्राजील से है, लेकिन हरियाणा के राय विधानसभा क्षेत्र के 10 बूथों पर 22 बार वोट डाली गई। उसके नाम बदल-बदलकर रखे गए—सीमा, स्वीटी, सरस्वती, रश्मि, विल्मा आदि। यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसमें भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत साफ दिखाई देती है।” राहुल ने इसे ‘हाइड्रोजन बम’ करार दिया और कहा कि यह धांधली कांग्रेस की जीत को हार में बदलने का प्रयास था। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े हजारों लोग हरियाणा और उत्तर प्रदेश दोनों जगह वोट डाल चुके हैं। कांग्रेस ने दावा किया कि उनके पास 100% प्रमाण हैं, जो डिजिटल रूप से सत्यापित हैं।
यह आरोप राजनीतिक तूफान ला दिया। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया, जबकि भाजपा ने इसे ‘झूठी अफवाह’ करार दिया।
ब्राजीलियन मॉडल लरिसा का परिचय और उनकी प्रतिक्रिया:
लरिसा रोचा सिल्वा (उम्र लगभग 28 वर्ष), जो पहले मॉडलिंग में सक्रिय थीं, अब ब्राजील के बेलो होरिजोंटे शहर में एक सैलून चलाती हैं और बच्चों के साथ काम करती हैं। वे कभी भारत नहीं गईं और न ही किसी चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी हुई हैं। फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर ने सोशल मीडिया पर उनकी पहचान की, जिसके बाद लरिसा ने 5 नवंबर की शाम एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में पुर्तगाली भाषा में बोलते हुए उन्होंने कहा, “यह क्या पागलपन है? वे मेरी पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल भारत में चुनावों के लिए कर रहे हैं और मुझे भारतीय नाम दे रहे हैं। एक रिपोर्टर ने मेरे वर्कप्लेस पर कॉल किया और इंटरव्यू मांगा। मेरा एक दोस्त, जो दूसरे शहर से है, ने मुझे यह फोटो भेजी—मैं इसे यहां शेयर कर रही हूं।”
लरिसा ने स्पष्ट किया कि यह तस्वीर उनकी मॉडलिंग के शुरुआती दिनों की स्टॉक इमेज है, जो ऑनलाइन उपलब्ध थी। उन्होंने हंसते हुए कहा, “मैं भारत के चुनावों के बारे में कुछ नहीं जानती। अब मेरी इंस्टाग्राम पर भारतीय फॉलोअर्स की बाढ़ आ गई है। लोग कमेंट कर रहे हैं जैसे कि मैं चुनाव जीत गई हूं! मैं केवल ‘नमस्ते’ जानती हूं, लेकिन अब कुछ और भारतीय शब्द सीखूंगी—शायद मेरी लोकप्रियता भारत में बढ़ जाए।” वीडियो वायरल हो गया, जिसे कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनाते ने शेयर किया। लरिसा की प्रतिक्रिया ने घटना को हल्का मोड़ दिया, लेकिन मूल आरोपों की गंभीरता को कम नहीं किया।
चुनाव आयोग और भाजपा की प्रतिक्रिया:
चुनाव आयोग ने राहुल के दावों को खारिज करते हुए कहा कि हरियाणा की मतदाता सूची पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी। एक अधिकारी ने कहा, “कांग्रेस के पोलिंग एजेंट्स ने वोटिंग के दौरान कोई शिकायत नहीं की। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में केवल 22 चुनाव याचिकाएं लंबित हैं, जो 90 विधानसभाओं में से कम हैं।” आयोग ने जोर दिया कि मतदाता सूची का संशोधन नियमित प्रक्रिया है और कोई सिस्टमैटिक धांधली नहीं पाई गई।
भाजपा ने इसे ‘राजनीतिक स्टंट’ बताया। प्रवक्ता ने कहा, “राहुल गांधी हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे। उनके दावे बेबुनियाद हैं और ब्राजीलियन मॉडल वाली तस्वीर स्टॉक इमेज है, जो किसी भी फोटो लाइब्रेरी से ली जा सकती है।” एक जांच में पाया गया कि कुछ मामलों में फोटो मिसप्रिंट हो सकती है, न कि जानबूझकर धांधली। उदाहरण के लिए, एक महिला पिंकी जुगिंदर कौशिक ने कहा कि उनकी वोटर आईडी में पुरानी तस्वीर गलती से प्रिंट हुई थी, जो ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की चूक थी। उन्होंने धांधली के आरोपों को ‘बकवास’ कहा।
विवाद के प्रभाव और व्यापक निहितार्थ:
यह विवाद भारतीय चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि यह ‘केंद्रीकृत ऑपरेशन’ है, जो लोकतंत्र को कमजोर करता है। विपक्षी दलों ने समर्थन जताया, जबकि सोशल मीडिया पर मीम्स और बहस छिड़ गई। लरिसा की वीडियो ने लाखों व्यूज हासिल किए, जिससे अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी कवरेज किया। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल वोटर लिस्ट में स्टॉक इमेज का दुरुपयोग तकनीकी खामी को दर्शाता है, लेकिन बड़े पैमाने पर धांधली के प्रमाण अभी अस्पष्ट हैं।
कांग्रेस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का ऐलान किया है, जबकि चुनाव आयोग ने स्वतंत्र जांच का वादा किया। यह घटना न केवल हरियाणा तक सीमित है, बल्कि आगामी बिहार चुनावों पर भी असर डाल सकती है। लरिसा की हल्की-फुल्की प्रतिक्रिया के बावजूद, यह मामला भारतीय राजनीति में डिजिटल धांधली के खतरे को उजागर करता है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह चुनावी इतिहास का एक काला अध्याय बनेगा; अन्यथा, यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का एक और उदाहरण साबित होगा।
