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by-Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश में यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य की सड़कों पर अब भी दौड़ रही करीब 900 ऐसी बसें, जिनकी उम्र 15 वर्ष से अधिक हो चुकी है, जल्द ही पूरी तरह बाहर कर दी जाएंगी। ये बसें जर्जर हालत में होने के बावजूद अभी तक अंतर-जिला, तहसील और ग्रामीण मार्गों पर चल रही थीं। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने इस मामले में गहरी नाराजगी जताते हुए तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

सचिव ने आयुक्त को लिखा कड़ा पत्र:
परिवहन सचिव मनीष सिंह ने परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा को पत्र लिखकर पूछा है कि नियमानुसार 15 साल से पुरानी बसों का परमिट और संचालन अवैध है, फिर ये बसें अब तक सड़कों पर क्यों दौड़ रही हैं? उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन बसों की वैधता तुरंत समाप्त की जाए और जो भी बस अभी चलती पाई जाए, उसके संचालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

सचिव ने इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा और सागर संभाग के सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (आरटीओ) को इन 900 बसों की पूरी सूची भेज दी है। इनकी गहन जांच करने और संचालन मिलने पर तुरंत जब्ती की कार्यवाही करने को कहा गया है।

जबलपुर में सबसे ज्यादा, रीवा में सबसे कम खटारा बसें:
सूची के अनुसार सबसे अधिक जर्जर बसें जबलपुर संभाग में चल रही हैं, जबकि रीवा संभाग में इनकी संख्या सबसे कम है। इनमें से करीब 500 बसें ग्रामीण क्षेत्रों, तहसीलों और छोटे कस्बों से बड़े शहरों के लिए चलाई जा रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए इन्हें अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बस ऑपरेटरों में भारी असंतोष:
सरकार के इस सख्त फैसले से बस संचालकों में जबरदस्त नाराजगी है। उनका कहना है कि इनमें से अधिकांश बसों को जब परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किए गए थे, तब उनकी उम्र 15 साल से कम थी। अभी भी कई बसों का फिटनेस प्रमाण-पत्र और परमिट वैध है। अचानक सभी बसों को सड़क से हटाने का निर्णय उन्हें आर्थिक रूप से तबाह कर देगा। कई ऑपरेटरों ने कहा कि अगर सरकार इतनी सख्ती कर रही है, तो पुरानी बसों के बदले नई बसें खरीदने के लिए सब्सिडी या बैंक लोन में विशेष राहत दी जानी चाहिए।

राज्य में कुल 35 हजार बसें दर्ज:
परिवहन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में वर्तमान में लगभग 35 हजार बसें पंजीकृत हैं, जिनमें निजी, परमिट और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसें शामिल हैं। अब इनमें से 15 साल पुरानी बसों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाया जाएगा।

परिवहन विभाग के अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई केवल यात्रियों की सुरक्षा के लिए की जा रही है। पुरानी बसों के रखरखाव में कमी और तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आने वाले दिनों में सभी आरटीओ कार्यालयों में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई के साथ-साथ परमिट रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।

यात्रियों ने भी इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि जर्जर बसों से जान जोखिम में डालकर सफर करने की मजबूरी अब खत्म होगी।

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