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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार विस्फोट की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और अन्य सुरक्षा बलों को अब तक 8 प्रमुख खुलासे मिल चुके हैं। इस घटना में 13 निर्दोष लोगों की जान चली गई और 25 से अधिक घायल हुए। जांच से पता चला है कि यह एक बड़ा सीरियल ब्लास्ट प्लान का हिस्सा था, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़े 8 संदिग्धों ने 4 शहरों में समन्वित हमले की योजना बनाई थी। फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय के डॉक्टरों के कमरों से बरामद डायरी और नोटबुक ने 2 वर्षों से चली आ रही साजिश को उजागर कर दिया। खुफिया स्रोतों के अनुसार, आतंकियों ने 32 पुरानी गाड़ियों को विस्फोटकों से लादने की तैयारी की थी, लेकिन पुलिस की तत्परता से यह विफल हो गया। गृह मंत्री अमित शाह ने एजेंसियों को सभी सहयोगियों को पकड़ने का सख्त निर्देश दिया है।

धमाके का संक्षिप्त विवरण: एक गलती जो बड़ी तबाही को रोक गई
10 नवंबर की शाम करीब 6:52 बजे लाल किले के पास पार्किंग में खड़ी हुंडई i20 कार में विस्फोट हो गया। डीएनए जांच से पुष्टि हुई कि कार डॉ. उमर उन नबी चला रहे थे, जो विस्फोट में मारे गए। यह सुसाइड मिशन था, लेकिन मूल योजना में दिल्ली-एनसीआर के अलावा अन्य शहरों में कई जगहों पर आईईडी (तात्कालिक विस्फोटक उपकरण) से हमले शामिल थे। विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट आधारित थे, जो कार में लादे गए थे। घटना के बाद दिल्ली में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घायलों का दौरा किया। जांच में तुर्की-आधारित हैंडलर ‘उकासा’ का नाम भी सामने आया, जिसने 2022 की यात्रा के दौरान साजिश की रूपरेखा तैयार की।

8 बड़े खुलासे: साजिश की परतें खुल रही हैं
एनआईए की प्रारंभिक रिपोर्ट और बरामद सामग्री से मिले इन खुलासों ने आतंकी मॉड्यूल की गहराई को बेनकाब कर दिया। नीचे विस्तार से दिए गए हैं:

खुलासा नंबरविवरण
1. 4 शहरों में समन्वित हमले की योजना8 संदिग्धों ने खुद को 4 जोड़ों (प्रत्येक में 2 सदस्य) में बांटा था। प्रत्येक जोड़ी को कई आईईडी लेकर 4 अलग-अलग शहरों—दिल्ली, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी—में जाकर एक साथ विस्फोट करने का टास्क सौंपा गया था। उद्देश्य अधिकतम हताहत और दहशत फैलाना था।
2. 32 पुरानी गाड़ियों को निशानाआतंकियों ने 32 पुरानी वाहनों को विस्फोटकों से भरने की योजना बनाई थी। ये गाड़ियां विभिन्न स्थानों पर पार्क करके रिमोट या टाइमर से फोड़े जाने वाले थे। दिल्ली धमाके के लिए इस्तेमाल हुई i20 इसी योजना का हिस्सा थी, लेकिन बाकी 31 गाड़ियों की पहचान अभी जारी है।
3. कोडेड डायरी से 2 वर्षों की साजिशफरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय के बिल्डिंग 17 के रूम नंबर 4 (डॉ. उमर का) और रूम नंबर 13 (डॉ. मुजम्मिल का) से बरामद डायरी और नोटबुक में कोडेड संदेश, नाम, नंबर और तारीखें (8-12 नवंबर) मिलीं। इनमें ‘ऑपरेशन’ शब्द बार-बार लिखा था, जो 2023 से चली आ रही प्लानिंग को दर्शाता है। कोड शब्द जैसे ‘दावत’ (हमला) और ‘बिरयानी’ (विस्फोटक) का इस्तेमाल हुआ।
4. 25-30 सहयोगियों का नेटवर्कडायरी में 25-30 नाम सूचीबद्ध थे, ज्यादातर जम्मू-कश्मीर (पुलवामा) और फरीदाबाद के। इनमें डॉक्टर, मौलवी और लॉजिस्टिक सप्लायर्स शामिल थे। जांच में पाया गया कि यह ‘श्वेत-कोट’ (डॉक्टरों का) आतंकी गैंग था, जिसमें उच्च शिक्षित लोग भर्ती किए गए।
5. 20 लाख रुपये का फंडिंग और सिग्नल ऐप ग्रुप3 संदिग्धों ने 20 लाख रुपये इकट्ठा किए, जो डॉ. उमर को सौंपे गए। फंडिंग हवाला और क्रिप्टो के जरिए हुई। इसके अलावा, एन्क्रिप्टेड सिग्नल ऐप पर एक ग्रुप बनाया गया, जहां टेलीग्राम चैट्स के साथ निर्देश साझा किए जाते थे।
6. डॉक्टरों के बीच पैसे का विवादपूछताछ से पता चला कि डॉ. उमर और डॉ. मुजम्मिल के बीच फंडिंग के बंटवारे पर झगड़ा हुआ, जिससे योजना में जल्दबाजी हुई। यह विवाद दिल्ली धमाके को समय से पहले ट्रिगर करने का कारण बना। दोनों 2021-2022 में महामारी के दौरान अल-फलाह जॉइन किए थे।
7. तुर्की हैंडलर ‘उकासा’ की भूमिका2022 में डॉ. उमर और मुजम्मिल की तुर्की यात्रा के दौरान ‘उकासा’ ने साजिश की रूपरेखा तैयार की। सेशन ऐप से निर्देश मिले, जिसमें धार्मिक कट्टरता का प्रचार किया गया। एनआईए इंटरपोल के जरिए तुर्की से सहयोग मांग रही है।
8. 2,900 किलो विस्फोटक और हथियारों की जब्तीकुल 2,921 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, 20 क्विंटल एनपीके उर्वरक, एके-56 राइफल, पिस्टल, डेटोनेटर और टाइमर बरामद। ये रसायन डॉक्टरों की पेशेवर पहुंच से खरीदे गए थे। इससे 200 आईईडी बनाने की क्षमता थी।

जांच का विस्तार: गिरफ्तारियां और सतर्कता
एनआईए, एटीएस और दिल्ली पुलिस ने 19 अक्टूबर से शुरू अभियान में 8 प्रमुख गिरफ्तारियां कीं, जिनमें डॉ. मुजम्मिल शकील गनाई, डॉ. शाहीन सईद और डॉ. अदील शामिल हैं। फरीदाबाद के अल-फलाह अस्पताल के कंपाउंडर सहित विश्वविद्यालय स्टाफ से पूछताछ हो रही है। सीसीटीवी से डॉ. उमर के 10 नवंबर के मूवमेंट (3:19 बजे लाल किले पहुंचना) का नक्शा तैयार हो गया। जांच में जेईएम के अलावा आंसर गजवात-उल-हिंद से लिंक भी मिले।

उत्तर प्रदेश में अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। ड्रोन गश्त, बैरिकेडिंग और आईडी चेक अनिवार्य हैं। गृह मंत्री शाह ने कहा, “हर दोषी को कड़ी सजा मिलेगी।”

प्रभावितों की कहानियां और प्रतिक्रियाएं:

  • मृतक राहुल शर्मा (32 वर्ष): सॉफ्टवेयर इंजीनियर, पत्नी ने कहा, “वह घर लौटने वाला था, लेकिन आतंक ने छीन लिया।”
  • घायल सीमा देवी (45 वर्ष): “आग की चपेट में आ गई, लेकिन डॉक्टरों ने बचाया। न्याय चाहिए।”
  • वैश्विक समर्थन: अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने कहा, “भारत ने सही तरीके से संभाला, उन्हें हमारी मदद की जरूरत नहीं।”

आतंक के खिलाफ मजबूत इरादा:
ये खुलासे साबित करते हैं कि दिल्ली धमाका एक छोटी चूक का नतीजा था, लेकिन पीछे एक विशाल साजिश थी। पुलिस ने बड़ी तबाही को टाल दिया, लेकिन नेटवर्क को पूरी तरह कुचलने के लिए जांच जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।” देशवासियों से अपील है कि सतर्क रहें। यह घटना एकता की ताकत को याद दिलाती है—आतंक कभी नहीं जीतेगा।

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