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by-Ravindra Sikarwar

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में बुधवार रात को एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया। यहां 24 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों ने कथित तौर पर सामूहिक आत्महत्या का प्रयास किया, जब उन्होंने फर्श साफ करने वाले रसायन (फिनाइल) का सेवन कर लिया। यह कदम उन्होंने एक ट्रांसजेंडर महिला के साथ हुए बलात्कार के आरोपी दो पुरुषों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर उठाया। घटना नंदलालपुरा क्षेत्र के एक ट्रांसजेंडर डेरा (समुदायिक केंद्र) में हुई, जहां समुदाय के सदस्यों ने पुलिस की सुस्त कार्रवाई के खिलाफ यह चरम कदम उठाया।

घटना की जानकारी देते हुए डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) आनंद कलाद्गी ने बताया कि बुधवार रात लगभग 8:30 बजे यह हादसा हुआ। जैसे ही समुदाय के सदस्यों को इसकी भनक लगी, उन्होंने तुरंत प्रभावित व्यक्तियों को महाराजा यशवंतराव अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने पाया कि अधिकांश व्यक्ति स्थिर स्थिति में हैं, लेकिन कुछ को उल्टी और पेट दर्द जैसी शिकायतें हो रही हैं। डीसीपी ने कहा, “सभी को तत्काल उपचार दिया गया है और उनकी हालत नियंत्रण में है। हमने इस घटना को गंभीरता से लिया है और जांच शुरू कर दी है।” पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह आत्महत्या का प्रयास एक अलग बलात्कार मामले से जुड़ा नहीं है, लेकिन समुदाय का गुस्सा उसी से उपजा है।

इस घटना के पीछे की कहानी तीन महीने पुरानी है। जून 2025 में नंदलालपुरा स्थित ट्रांसजेंडर समुदाय के डेरा में दो व्यक्ति, अक्षय कुमाऊं और पंकज जैन, खुद को पत्रकार बताकर पहुंचे थे। उन्होंने समुदाय के आंतरिक विवादों को कवर करने का बहाना बनाया। लेकिन उनका असली मकसद कुछ और था। नंदलालपुरा किन्नर डेरा से जुड़ी नेहा कुनवार ने बताया, “ये दोनों फर्जी पत्रकार थे। उन्होंने एक ट्रांसजेंडर महिला को ब्लैकमेल किया, धमकी दी कि अगर उन्होंने उनका कहना न माना तो उन्हें बदनाम कर देंगे और उनके गुरुओं की तरह हिंदू-मुस्लिम विवाद का झूठा केस उनके खिलाफ दर्ज करवाएंगे। 12 जून को वे डेरा आए और पंकज ने पीड़िता पर शारीरिक और यौन हिंसा की। इसके अलावा, उन्होंने पीड़िता से करीब 1.5 लाख रुपये की लूट भी की।”

पीड़िता ने मंगलवार को ही पंधरीनाथ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। एडिशनल डीसीपी (क्राइम ब्रांच) राजेश दंडोतिया ने पुष्टि की कि आरोपी अक्षय और पंकज ने पत्रकार बनकर पीड़िता को धमकाया और ब्लैकमेल किया। उन्होंने बताया, “पीड़िता ने बताया कि आरोपी उन्हें बदनाम करने और झूठी एफआईआर दर्ज करने की धमकी देते थे। हमने बलात्कार, उगाही और धमकी के आरोपों में मामला दर्ज कर लिया है। ट्रांसजेंडर संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 18 के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। दोनों की तलाश जारी है और जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।” पुलिस ने कहा कि आरोपी फरार हैं, लेकिन उनकी लोकेशन ट्रैक की जा रही है।

आत्महत्या के प्रयास के बाद समुदाय के अन्य सदस्य अस्पताल पहुंचे और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने लगे। नेहा कुनवार ने भावुक होकर कहा, “क्या हम इंसान नहीं हैं? ट्रांसजेंडर समुदाय भी सुरक्षित नहीं है। अगर आरोपी नहीं पकड़े गए तो हम सबकी जिंदगी खतरे में है।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगें पूरी न हुईं तो वे और कड़े कदम उठाएंगे। अस्पताल में ही कुछ सदस्यों ने केरोसिन तेल पीने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप कर इसे नाकाम कर दिया। समुदाय के सदस्यों ने पुलिस पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया, जिससे उनका गुस्सा भड़क गया।

यह घटना ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा और असुरक्षा को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समाज में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अक्सर हाशिए पर धकेल दिया जाता है, जिससे वे न्याय के लिए चरम कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि सरकार ट्रांसजेंडर संरक्षण कानून को सख्ती से लागू करे और समुदाय के लिए विशेष हेल्पलाइन व सुरक्षा उपाय शुरू करे। इंदौर पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और आरोपी को सजा दिलाई जाएगी।

यह हादसा न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां ट्रांसजेंडर अधिकारों की अनदेखी पर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों ने समुदाय से शांति बनाए रखने की अपील की है, जबकि जांच एजेंसियां आरोपी को पकड़ने के लिए छापेमारी तेज कर रही हैं।

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