By: Ravindra Sikarwar
भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच गहरी होती मैत्री और रक्षा सहयोग का प्रतीक माने जाने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘सूर्या किरण’ का 19वां संस्करण आज से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में शुरू हो गया। यह अभ्यास 8 दिसंबर 2025 तक चलेगा। दोनों देशों की सेनाएं इस दौरान पहाड़ी एवं जंगली इलाकों में आतंकवाद-विरोधी अभियानों और युद्ध कौशल को और निखारने पर विशेष ध्यान देंगी।
भारतीय सेना के प्रवक्ता ने बताया कि इस बार का मुख्य उद्देश्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जंगल युद्ध (जंगल वारफेयर) और काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस में दोनों सेनाओं के बीच परस्पर तालमेल को और मजबूत करना है। साथ ही आधुनिक तकनीकों का उपयोग, ड्रोन, साइबर सुरक्षा से जुड़े पहलू और नवीनतम हथियार प्रणालियों का संयुक्त रूप से प्रशिक्षण भी इस अभ्यास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे से बेहतरीन प्रथाओं (बेस्ट प्रैक्टिसेज) का आदान-प्रदान करेंगे, जिससे वैश्विक शांति और क्षेत्रीय सुरक्षा में दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।
यह अभ्यास दोनों देशों के बीच न केवल रक्षा सहयोग को गति देता है, बल्कि सैन्य स्तर पर आपसी विश्वास और मित्रता को भी नई ऊंचाई प्रदान करता है। ‘सूर्या किरण’ हर साल बारी-बारी से भारत और नेपाल में आयोजित होता है। पिछला यानी 18वां संस्करण 31 दिसंबर 2024 से 13 जनवरी 2025 तक नेपाल के सलझंडी (दांग जिला) में हुआ था, जिसमें भारतीय सेना की एक पूरी बटालियन (लगभग 334 जवान) ने हिस्सा लिया था। उस अभ्यास में भी दोनों सेनाओं ने हिमालयी क्षेत्रों में आतंकवाद निरोधक रणनीति, खोज एवं नष्ट करने के अभियान (सर्च एंड डिस्ट्रॉय) और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) जैसे विषयों पर गहन प्रशिक्षण लिया था।
इस बार पिथौरागढ़ की ऊंची-नीची पहाड़ियों और घने जंगलों में होने के कारण अभ्यास और भी चुनौतीपूर्ण और वास्तविक परिस्थितियों के करीब होगा। भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट और नेपाल आर्मी की श्री सिंहबहादुर गण जैसी यूनिट्स इस बार मुख्य रूप से हिस्सा ले रही हैं। दोनों पक्षों ने लगभग बराबर संख्या में जवान उतारे हैं, जिससे संयुक्त कमान, नियंत्रण और संचार (C4ISR) का वास्तविक परीक्षण हो सकेगा।
भारत-नेपाल के बीच रक्षा सहयोग पिछले एक दशक में अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। सूर्या किरण के अलावा दोनों देश ‘हैंड-इन-हैंड’ कंपनी स्तर के अभ्यास, उच्च स्तरीय अधिकारियों का आदान-प्रदान, संयुक्त पर्वतारोहण अभियान और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण भी नियमित रूप से करते हैं। नेपाल में 2015 के भूकंप के बाद भारतीय सेना ने जिस तेजी और साहस से बड़े पैमाने पर राहत कार्य किए थे, उसने दोनों देशों के बीच विश्वास को और गहरा किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता और हिमालयी क्षेत्र में उसकी घुसपैठ की कोशिशों के मद्देनजर भारत और नेपाल का यह संयुक्त अभ्यास सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। हालांकि दोनों देशों के अधिकारी इसे शुद्ध रूप से शांति और मैत्री का अभ्यास बताते हैं, लेकिन इसका संदेश स्पष्ट है कि सीमा पर किसी भी चुनौती का दोनों मिलकर मुकाबला करेंगे।
इस 14 दिवसीय अभ्यास के दौरान सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, योग सत्र और स्थानीय लोगों के साथ संवाद भी होगा, ताकि सैनिक एक-दूसरे की संस्कृति को करीब से समझ सकें। समापन समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जवानों को सम्मानित भी किया जाएगा।
कुल मिलाकर ‘सूर्या किरण-19’ भारत और नेपाल के बीच न केवल सैन्य, बल्कि भावनात्मक रिश्तों को और मजबूत करने वाला एक और अध्याय साबित होगा। हिमालय की गोद में गूंजने वाली यह दोस्ती आने वाले दिनों में क्षेत्रीय स्थिरता की मजबूत नींव बनेगी।
