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by-Ravindra Sikarwar

अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात: दक्षिण अफ्रीका के छोटे से देश एस्वातिनी के राजा मस्वाती तृतीय की एक पुरानी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो गई है, जिसमें उनकी शाही ठाठ-बाट भरी यात्रा का नजारा दिखाया गया है। इस वीडियो में राजा को अपनी 15 पत्नियों, 30 बच्चों और 100 सहायकों के विशाल काफिले के साथ अबू धाबी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते हुए देखा जा सकता है। इस विशाल शाही जत्थे के कारण हवाई अड्डे के कई टर्मिनल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए थे, जिससे सामान्य संचालन प्रभावित हुआ। यह घटना राजा की वैभवपूर्ण जीवनशैली को उजागर करती है, जो उनके देश की आर्थिक चुनौतियों के विपरीत खड़ी नजर आती है।

वीडियो जुलाई 2024 में पहली बार सामने आई थी, लेकिन हाल ही में यह फिर से चर्चा में आ गई है। क्लिप में राजा मस्वाती तृतीय को पारंपरिक अफ्रीकी पोशाक में निजी जेट से उतरते हुए दिखाया गया है। उनके पीछे-पीछे एक समूह में सजी-धजी महिलाएँ आ रही हैं, जो उनकी पत्नियाँ हैं। वीडियो पर टेक्स्ट ओवरले में लिखा है: “स्वाजीलैंड के राजा अबू धाबी 15 पत्नियों और 100 नौकरों के साथ पहुँचे। उनके पिता राजा सोभुजा द्वितीय के पास 125 पत्नियाँ थीं।” रिपोर्ट्स के अनुसार, इस यात्रा में राजा के 30 बच्चे भी शामिल थे, जिससे पूरा काफिला और भी विशाल हो गया।

हवाई अड्डे पर सुरक्षा अधिकारियों को राजकीय अतिथियों के सम्मान में विशेष व्यवस्था करनी पड़ी। कई टर्मिनल्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा ताकि शाही जत्था बिना किसी बाधा के निकल सके। यह दृश्य राजा की शाही परंपराओं को दर्शाता है, जहाँ उनकी यात्राएँ हमेशा भव्यता से भरी होती हैं। एस्वातिनी, जिसे पहले स्वाजीलैंड के नाम से जाना जाता था, अफ्रीका का एकमात्र पूर्ण निरंकुश राजतंत्र है, जहाँ राजा की सत्ता सर्वोच्च है।

वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने राजा की इस फिजूलखर्ची पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने राजा के वैभवपूर्ण जीवन और उनके प्रजा की दयनीय स्थिति के बीच चरम अंतर पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, “इतना सब कुछ करते हुए उनके लोग बिजली या पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।” दूसरे ने पूछा, “क्या यह देश इतना अमीर है कि निजी जेट का खर्चा उठा सके?”

कुछ यूजर्स ने तो और कड़े शब्दों में निंदा की। एक ने कहा, “यह व्यक्ति निजी जेट में घूमता रहता है, जबकि उसके लोग भूख से मर रहे हैं।” एक अन्य ने लिखा, “अफ्रीका में बच्चों को खिलाने के लिए पैसे मांगते हैं, लेकिन राजा का यह तमाशा देखो।” हास्य के साथ एक यूजर ने टिप्पणी की, “क्या उनके घर में कोई कोऑर्डिनेटर है जो इतनी पत्नियों का प्रबंधन करे?” ये प्रतिक्रियाएँ राजा की छवि को लेकर बढ़ती असंतोष को उजागर करती हैं, जहाँ लोग उनकी व्यक्तिगत संपत्ति को देश की समस्याओं से जोड़कर देख रहे हैं।

राजा मस्वाती तृतीय 1986 से एस्वातिनी पर शासन कर रहे हैं और अफ्रीका के अंतिम निरंकुश राजा के रूप में जाने जाते हैं। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी निजी संपत्ति 1 अरब डॉलर से अधिक है। वे निर्माण, पर्यटन, कृषि, दूरसंचार और वानिकी जैसे क्षेत्रों में कई कंपनियों के मालिक हैं। उनकी शाही परंपराएँ भी अनोखी हैं – हर साल रीड डांस समारोह के दौरान वे एक नई दुल्हन का चयन करते हैं, जो सदियों पुरानी रस्म है। यह समारोह न केवल प्रशंसा का विषय है, बल्कि विवादास्पद भी माना जाता है।

हालाँकि, राजा के वैभव के विपरीत, एस्वातिनी की अधिकांश आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश की लगभग 60 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी में डूबी हुई है। स्वास्थ्य और शिक्षा प्रणाली ध्वस्त हो चुकी है – सार्वजनिक अस्पतालों में दवाओं की कमी है, और वित्तीय संकट के कारण छात्र विश्वविद्यालय छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। विश्व बैंक के अनुसार, 2021 में बेरोजगारी दर 23 प्रतिशत से बढ़कर 33.3 प्रतिशत हो गई, जबकि बुनियादी वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। दान पर निर्भर संस्थाएँ ही छात्रों को सहारा दे पा रही हैं।

एस्वातिनी की अर्थव्यवस्था कृषि और खनन पर आधारित है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार ने इसे कमजोर कर दिया है। राजा के पिता सोभुजा द्वितीय के पास 70 वर्षों के शासन में 125 पत्नियाँ और 210 बच्चे थे, जो शाही परंपराओं की भव्यता को दर्शाते हैं। मस्वाती तृतीय ने भी इसी विरासत को आगे बढ़ाया है, लेकिन आधुनिक समय में यह लोगों के गुस्से का कारण बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएँ राजशाही की प्रासंगिकता पर सवाल उठाती हैं, खासकर जब देश आर्थिक संकट से जूझ रहा हो।

यह वीडियो न केवल राजा मस्वाती तृतीय की शाही ठाठ को दिखाता है, बल्कि एस्वातिनी जैसे विकासशील देशों में असमानता की गहरी खाई को भी उजागर करता है। जबकि राजा निजी जेट और विशाल काफिले में यात्रा करते हैं, उनके लाखों नागरिक बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सोशल मीडिया की यह बहस शायद राजशाही सुधारों की मांग को और तेज करेगी। फिलहाल, यह पुरानी क्लिप नई चर्चा का विषय बनी हुई है, जो अफ्रीकी राजतंत्र की जटिलताओं को सामने ला रही है।

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