by-Ravindra Sikarwar
भोपाल: दीपोत्सव की रौनक के बीच मध्य प्रदेश में एक दर्दनाक त्रासदी ने कई परिवारों को गमगीन कर दिया है। प्रतिबंधित ‘कार्बाइड गन’—जिसे बच्चे ‘देशी पटाखा बंदूक’ कहकर त्योहार का मजा लेने के बहाने इस्तेमाल कर रहे थे—के धमाकों से राज्य भर में 14 नौनिहालों की दृष्टि हमेशा के लिए खो चुकी है। तीन दिनों में ही 122 से ज्यादा बच्चों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनकी आंखों को गंभीर चोटें लगीं। विदिशा जिला इस विपत्ति का सबसे ज्यादा शिकार बना, जहां स्थानीय बाजारों में 18 अक्टूबर को जारी सरकारी प्रतिबंध के बावजूद ये खतरनाक खिलौने खुले आम बिकते नजर आए। स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि ये विस्फोटक धातु के टुकड़ों और रासायनिक वाष्पों से रेटिना को जला देते हैं, जिससे स्थायी अंधापन हो जाता है।
हादसों का क्रम और चोटों की भयावहता:
चिकित्सकों के अनुसार, ये ‘कार्बाइड गन’ प्लास्टिक या टिन की नलियों से बने सरल दिखने वाले उपकरण हैं, जिन्हें बारूद, माचिस की नोकें और कैल्शियम कार्बाइड से भरकर इस्तेमाल किया जाता है। पानी के संपर्क में आने पर होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया से जोरदार धमाका होता है, जो चेहरे और आंखों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाता है। बच्चे अक्सर विस्फोट न होने पर नली के अंदर झांकते हैं, जिससे आंखों की पुतली फट जाती है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ही 72 घंटों में 26 बच्चों का इलाज चला, जबकि इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के चिकित्सालयों में भी आंखों के विभाग भरे पड़े रहे।
एक 17 वर्षीय लड़की नेहा, जो भोपाल के अस्पताल में भर्ती है, ने रोते हुए बताया, “हमने घर पर बनी बंदूक खरीदी थी। धमाके से मेरी एक आंख पूरी तरह जल गई। अब कुछ दिखाई नहीं देता।” इसी तरह, एक अन्य किशोर राज विश्वकर्मा ने कबूला कि सोशल मीडिया पर देखे वीडियो से प्रेरित होकर उसने खुद बंदूक बनाई, लेकिन चेहरे पर विस्फोट से एक आंख की रोशनी चली गई। विदिशा में सात वर्षीय अलजैन नामक बच्चे की बाईं आंख पर असर पड़ा, जब उसके पिता ने यूट्यूब वीडियो देखकर 250 रुपये में बंदूक खरीदी। 14 वर्षीय करण पंथी को कार्बाइड का टुकड़ा आंखों में घुस गया, जबकि योगेश कुशवाहा का चेहरा बुरी तरह झुलस गया। ये उदाहरण राज्य में फैली इस महामारी जैसी स्थिति को बयां करते हैं।
सोशल मीडिया का कुप्रभाव और बाजारों की बेफिक्री:
इस घातक ट्रेंड को हवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने दी है। इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स पर ‘#फायरक्रैकर गन चैलेंज’ जैसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां किशोर इन्हें चलाते हुए लाइक्स और व्यूज बटोर रहे हैं। ये वीडियो 150-200 रुपये कीमत वाली इन ‘खिलौनों’ को दिवाली का अनिवार्य हिस्सा बता रहे हैं, जिससे बच्चों की जिज्ञासा भड़क रही है। बाजारों में मेले और सड़क किनारे स्टॉलों पर बिना किसी रोकटोक के बिक्री हो रही थी, भले ही मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 18 अक्टूबर को सभी जिलाधिकारियों और पुलिस को सख्ती बरतने के निर्देश दिए थे।
प्रशासनिक कार्रवाई और चेतावनी:
पुलिस ने विदिशा में छह विक्रेताओं को गिरफ्तार किया है, जो इन प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री में लिप्त थे। इंस्पेक्टर आरके मिश्रा ने कहा, “तत्काल कदम उठाए गए हैं। बिक्री या प्रचार करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी।” स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ मनीष शर्मा ने बताया, “ये धमाके आंखों को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं। रेटिना जलने से स्थायी अंधापन हो जाता है। अभिभावकों को सतर्क रहना चाहिए।” बिहार जैसे अन्य राज्यों में भी समान मामले सामने आ रहे हैं, जहां पटना में ही 50 बच्चों की आंखों पर असर पड़ा है।
जागरूकता की पुकार: त्योहार सुरक्षित मनाएं
यह घटना न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक सबक है कि उत्सव की चमक में सुरक्षा को नजरअंदाज न करें। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों, स्कूलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मिलकर जागरूकता फैलानी चाहिए। प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने के साथ बच्चों को सुरक्षित विकल्प सिखाने की जरूरत है। इन नौनिहालों की त्रासदी हमें याद दिलाती है कि जश्न की कीमत किसी की जिंदगी पर न चढ़े। परिवारों को न्याय और इलाज की उम्मीद है, ताकि ये बच्चे फिर से दुनिया की रोशनी देख सकें।
