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by-Ravindra Sikarwar

भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के 7,500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया ने बेरोजगारी की काली तस्वीर उजागर कर दी है। राज्य कर्मचारी चयन मंडल (एमपीईएसबी) को प्राप्त आवेदनों की संख्या 9.39 लाख से अधिक हो चुकी है, जिसमें कुछ पदों के लिए 13,000 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं। आश्चर्यजनक रूप से, इनमें 42 पीएचडी धारक, 12,000 इंजीनियरिंग स्नातक, स्नातकोत्तर छात्र और डिप्लोमा धारक भी शामिल हैं। न्यूनतम योग्यता मात्र 10वीं कक्षा होने के बावजूद, उच्च शिक्षित युवा सरकारी नौकरी की दौड़ में कूद पड़े हैं, जो निजी क्षेत्र में अवसरों की कमी और स्थिरता की चाह को दर्शाता है। परीक्षा 30 अक्टूबर से शुरू हो रही है, और चयन प्रक्रिया तीन चरणों—लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षण और दस्तावेज सत्यापन—में पूरी होगी।

भर्ती प्रक्रिया का पूरा विवरण:
मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2025 के लिए ऑनलाइन आवेदन 15 सितंबर से आरंभ हुए थे, जिन्हें बढ़ाकर 6 अक्टूबर तक किया गया। एमपीईएसबी ने कुल 7,500 रिक्तियों की घोषणा की है, जो राज्य भर में कानून-व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से भरी जाएंगी। चयनित उम्मीदवारों को मासिक वेतनमान 19,500 से 62,000 रुपये तक मिलेगा, जिसमें भत्ते और पेंशन जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। लिखित परीक्षा 10वीं स्तर की होगी, जिसमें सामान्य ज्ञान, गणित, हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषय शामिल हैं। इसके बाद शारीरिक परीक्षण में दौड़, ऊंची कूद और अन्य फिटनेस टेस्ट होंगे, जो पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग मानदंड रखते हैं। अंतिम चरण में शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की जांच होगी। परीक्षा ऑनलाइन मोड में विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की जाएगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

आंकड़ों के लिहाज से, 7,500 पदों पर औसतन 125 उम्मीदवार प्रति नौकरी हैं, लेकिन कुछ जिलों में यह संख्या 13,000 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा न केवल प्रतिस्पर्धा की तीव्रता दिखाता है, बल्कि युवाओं की हताशा को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले दशक में इंजीनियरिंग और विज्ञान पाठ्यक्रमों में दाखिले बढ़े हैं, लेकिन नौकरी के अवसर घटे हैं, जिससे ऐसे उम्मीदवार सरकारी पदों की ओर रुख कर रहे हैं।

उम्मीदवारों की प्रोफाइल: उच्च शिक्षा वाले युवा क्यों कांस्टेबल बनना चाहते हैं?
भर्ती में आवेदन करने वालों में विविधता देखने को मिल रही है। 42 पीएचडी धारक, जो सामान्यतः प्रोफेसरशिप या रिसर्च पदों के लिए योग्य होते हैं, इस दौड़ में शामिल हो गए हैं। इसी तरह, 12,000 से अधिक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स, एमबीए छात्र और स्नातकोत्तर डिग्री वाले युवा भी फॉर्म भर चुके हैं। उमरिया जिले के चंदिया निवासी इंजीनियरिंग स्नातक रामकुमार तिवारी ने बताया, “मैंने कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया है और शारीरिक परीक्षा की तैयारी के लिए रोज दौड़ लगाना शुरू कर दिया है। निजी क्षेत्र में नौकरी नहीं मिल रही, इसलिए सरकारी नौकरी ही एकमात्र विकल्प लगता है।”

भोपाल के एक एमबीए छात्र ईशान अवस्थी का कहना है, “निजी नौकरियां मेरे लिए उपयुक्त नहीं लगीं, इसलिए मैंने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया। पुलिस विभाग में स्थिरता और सम्मान है।” वहीं, स्नातकोत्तर डिग्री वाले तन्मय सिंह परिहार ने कहा, “मैंने कांस्टेबल पद पर आवेदन किया है और बाद में सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा देने की योजना है। बेरोजगारी ने मजबूर किया है।” ये उदाहरण बताते हैं कि कैसे उच्च शिक्षित युवा न्यूनतम योग्यता वाले पदों पर निर्भर हो रहे हैं, क्योंकि आईटी और अन्य क्षेत्रों में प्लेसमेंट घट गए हैं।

बेरोजगारी का व्यापक संदर्भ: कौशल अंतर और शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल
यह भर्ती मध्य प्रदेश और पूरे देश में व्याप्त बेरोजगारी की समस्या को आईना दिखाती है। पूर्व परिवहन आयुक्त और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी शैलेंद्र श्रीवास्तव ने विश्लेषण किया, “राज्य के कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षा का स्तर बहुत निम्न है। छात्र विषयों को गहराई से नहीं समझ पाते, इसलिए वे आसानी से मिलने वाली नौकरियों की तलाश करते हैं। उच्च बेरोजगारी दर, निजी क्षेत्र में अवसरों की कमी और सरकारी नौकरियों को सुरक्षित मानने की धारणा ने युवाओं को इस ओर धकेल दिया है।”

आईआईटी जेईई विशेषज्ञ तरुण कुमार ने जोड़ा, “सरकारी नौकरियां वेतन में कम हो सकती हैं, लेकिन सुरक्षा प्रदान करती हैं। ‘आसान’ डिग्रियों से उत्पन्न कौशल अंतर ने इस स्थिति को जन्म दिया है।” विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत है, ताकि युवा बाजार की मांग के अनुरूप कौशल हासिल कर सकें। मध्य प्रदेश सरकार ने भर्ती को तेजी से पूरा करने का आश्वासन दिया है, लेकिन लंबे समय के समाधान के रूप में कौशल विकास कार्यक्रमों पर जोर देने की मांग उठ रही है।

यह घटना न केवल मध्य प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ रही है। सोशल मीडिया पर युवा अपनी हताशा व्यक्त कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे सरकारी नौकरियों की लोकप्रियता का प्रमाण बता रहे हैं। एमपीईएसबी ने उम्मीदवारों से परीक्षा केंद्रों पर समय से पहुंचने और फर्जी दस्तावेजों से दूर रहने की सलाह दी है। भर्ती पूरी होने के बाद राज्य पुलिस बल में नई ऊर्जा का संचार होगा, लेकिन बेरोजगारी की जड़ों पर प्रहार जरूरी है।

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