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by-Ravindra Sikarwar

महाराष्ट्र के पुणे जिले में प्रस्तावित छत्रपति संभाजी महाराज पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए 2,800 एकड़ निजी भूमि का अधिग्रहण पूरी तरह से पूरा हो गया है। यह भारत में अब तक के सबसे तेज़ बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहणों में से एक है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सभी संबंधित निजी भूस्वामियों से सहमति प्राप्त कर ली गई है, जो इसे एक मील का पत्थर बनाता है। इस हवाई अड्डे का निर्माण कार्य जुलाई 2026 से शुरू होने की उम्मीद है, और यह प्रति वर्ष 7.5 करोड़ यात्रियों की क्षमता के साथ देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक होगा।

परियोजना का अवलोकन:
छत्रपति संभाजी महाराज पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पुणे के पुरंदर तालुका में बनाया जा रहा है, जो पुणे शहर से लगभग 45 किलोमीटर दूर है। यह हवाई अड्डा मौजूदा पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (लोहगांव) की बढ़ती भीड़ को कम करने और पश्चिमी महाराष्ट्र के तेजी से बढ़ते हवाई यातायात की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया जा रहा है। यह परियोजना महाराष्ट्र हवाई अड्डा विकास कंपनी (MADC) द्वारा संचालित है और इसे केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया:
इस परियोजना के लिए कुल 2,800 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी, जिसमें से अधिकांश निजी स्वामित्व वाली थी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी और सहमति-आधारित रखा गया, जिसमें स्थानीय किसानों और भूस्वामियों के साथ कई दौर की चर्चा शामिल थी। सरकार ने उचित मुआवजा और पुनर्वास पैकेज की पेशकश की, जिसे भूस्वामियों ने स्वीकार किया। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया रिकॉर्ड समय में पूरी हुई, जो आमतौर पर बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में होने वाली देरी को देखते हुए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा, “यह परियोजना न केवल पुणे के लिए बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए एक गेम-चेंजर होगी। हमने सुनिश्चित किया कि भूस्वामियों के हितों का ध्यान रखा जाए, और उनकी सहमति के साथ यह अधिग्रहण पूरा हुआ।”

हवाई अड्डे की विशेषताएं:
प्रस्तावित हवाई अड्डा अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिसमें शामिल हैं:

  • यात्री क्षमता: प्रारंभिक चरण में 7.5 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता, जिसे भविष्य में बढ़ाया जा सकता है।
  • रनवे और टर्मिनल: दो समानांतर रनवे और एक विशाल टर्मिनल, जो अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को संभालेगा।
  • कार्गो सुविधा: माल ढुलाई के लिए समर्पित कार्गो टर्मिनल, जो पुणे के औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देगा।
  • कनेक्टिविटी: हवाई अड्डा पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित समृद्धि महामार्ग से अच्छी तरह जुड़ा होगा, जिससे यात्रियों को आसान पहुंच मिलेगी।
  • पर्यावरणीय उपाय: हरित ऊर्जा और टिकाऊ डिज़ाइन को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसमें सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन शामिल हैं।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव:
यह हवाई अड्डा पुणे और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक विकास को गति देगा। पुणे, जो पहले से ही एक प्रमुख आईटी हब, ऑटोमोबाइल विनिर्माण केंद्र, और शैक्षिक केंद्र है, इस हवाई अड्डे के साथ वैश्विक कनेक्टिविटी में और मजबूत होगा। इससे पर्यटन, व्यापार, और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, परियोजना से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

स्थानीय समुदाय के लिए, सरकार ने पुनर्वास और कौशल विकास कार्यक्रमों की घोषणा की है ताकि प्रभावित परिवारों को नए अवसरों से जोड़ा जा सके।

निर्माण और समयरेखा:
निर्माण कार्य की शुरुआत जुलाई 2026 में होने की उम्मीद है, और पहले चरण को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पहले चरण में एक रनवे, एक टर्मिनल, और आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल होगा। परियोजना की कुल लागत का अनुमान लगभग 15,000 करोड़ रुपये है, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत निजी निवेश भी शामिल होगा।

निष्कर्ष:
छत्रपति संभाजी महाराज पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा न केवल पुणे के लिए बल्कि पूरे महाराष्ट्र और भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है। 100% निजी भूमि अधिग्रहण की सफलता इस परियोजना के प्रति सरकार और स्थानीय समुदाय के सहयोग को दर्शाती है। यह हवाई अड्डा भारत के विमानन क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ेगा और पुणे को वैश्विक मानचित्र पर और प्रमुखता देगा।

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