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by-Ravindra Sikarwar

ये धार्मिक स्थल न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि करोड़ों की दान-दक्षिणा और प्राचीन खजानों से समृद्ध हैं; जानिए उनकी संपत्ति और इतिहास के बारे में विस्तार से

भारत को मंदिरों की भूमि कहा जाता है, जहां आस्था और धन का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर न केवल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं, बल्कि अपनी अपार संपत्ति के लिए भी विश्वविख्यात हैं। ये संपत्ति दान, सोना-चांदी, भूमि और अन्य संपदाओं से आती है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुछ मंदिरों की कुल संपत्ति लाखों करोड़ रुपये से अधिक है। इस लेख में हम भारत के 10 सबसे अमीर मंदिरों पर नजर डालेंगे, उनकी संपत्ति, वार्षिक आय, इतिहास और महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ। ये आंकड़े विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों से संकलित हैं और 2025 तक अपडेटेड हैं।

  1. तिरुमाला तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश

तिरुमाला तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर, जिसे बालाजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, भारत का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है। यह तिरुपति की पहाड़ियों पर स्थित है और भगवान विष्णु के अवतार वेंकटेश्वर को समर्पित है। मंदिर की कुल संपत्ति लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें 15,938 करोड़ रुपये की सावधि जमा, 10.25 टन सोना (लगभग 5,309 करोड़ रुपये मूल्य का) और विशाल भूमि तथा भवन शामिल हैं। वार्षिक आय 4,385 करोड़ रुपये से अधिक है, जो मुख्य रूप से हंडी संग्रह, दान और सोने की भेंट से आती है। प्रतिदिन औसतन 2-3 करोड़ रुपये के दान प्राप्त होते हैं। यह मंदिर लगभग 300 ईस्वी में स्थापित हुआ माना जाता है और दुनिया के सबसे व्यस्त तीर्थस्थलों में से एक है, जहां प्रतिदिन 60,000 से अधिक श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालु यहां अपने बाल दान करते हैं, जिनकी नीलामी से भी राजस्व प्राप्त होता है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा संचालित यह मंदिर शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण योजनाओं में भी योगदान देता है।

  1. श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, केरल

थिरुवनंतपुरम में स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी रहस्यमयी संपत्ति के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की कुल संपत्ति 1.2 लाख करोड़ रुपये (लगभग 20 अरब डॉलर) से अधिक है, जिसमें प्राचीन खजाने जैसे सोने की मूर्तियां, रोमन और नेपोलियन युग के सिक्के, रत्न जड़ित आभूषण शामिल हैं। 2011 में खोले गए पांच तहखानों से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का खजाना मिला था, जबकि छठा तहखाना (वॉल्ट बी) सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बंद है और इसमें और अधिक धन होने की संभावना है। वार्षिक आय का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन दान और भेंट से यह निरंतर बढ़ती है। द्रविड़ शैली में निर्मित यह मंदिर 108 दिव्य देशमों में से एक है और ट्रावणकोर राजपरिवार द्वारा प्रबंधित होता है। इसकी स्थापना सदियों पुरानी है और यह आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व का प्रतीक है।

  1. शिरडी साईं बाबा मंदिर, महाराष्ट्र

शिरडी में स्थित साईं बाबा मंदिर 19वीं सदी के संत साईं बाबा को समर्पित है, जिन्हें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय पूजते हैं। मंदिर की कुल संपत्ति 1,800 से 2,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें 380 किलोग्राम सोना, 4,428 किलोग्राम चांदी और 1,800 करोड़ रुपये की बैंक जमा शामिल हैं। वार्षिक दान 300-400 करोड़ रुपये है, जबकि प्रतिदिन त्योहारों पर 45 लाख रुपये तक की भेंट आती है। 1922 में निर्मित यह मंदिर साईं बाबा की समाधि का स्थान है और लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। ट्रस्ट दो बड़े अस्पताल चलाता है, शिक्षा छात्रवृत्तियां प्रदान करता है और हजारों लोगों को मुफ्त भोजन देता है। यह मंदिर धार्मिक एकता का प्रतीक है।

  1. वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू-कश्मीर

त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित वैष्णो देवी मंदिर देवी शक्ति को समर्पित है और भारत के सबसे लोकप्रिय तीर्थों में से एक है। मंदिर की कुल संपत्ति 500 करोड़ रुपये से अधिक है, जो मुख्य रूप से दान, सोना और भूमि से आती है। वार्षिक आय भी लगभग 500 करोड़ रुपये है, जिसमें हेलीकॉप्टर सेवाएं और आवास सुविधाएं शामिल हैं। प्रतिवर्ष 80 लाख से अधिक श्रद्धालु यहां आते हैं, जो 5,200 फीट की ऊंचाई पर गुफा मंदिर तक पैदल यात्रा करते हैं। प्राचीन कथाओं के अनुसार, यह मंदिर सदियों पुराना है और देवी यहां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। श्राइन बोर्ड स्कूल, अस्पताल और कल्याण योजनाएं संचालित करता है।

  1. स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब), पंजाब

अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर सिख धर्म का सबसे पवित्र स्थल है। इसकी संपत्ति सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं है, लेकिन अनुमानित वार्षिक आय 500 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें वैश्विक सिख समुदाय से दान शामिल हैं। मंदिर की ऊपरी परतों पर 400-750 किलोग्राम सोना चढ़ा हुआ है। 16वीं शताब्दी में गुरु अर्जुन देव द्वारा निर्मित और महाराजा रणजीत सिंह द्वारा सोना चढ़वाया गया, यह मंदिर हिंदू-इस्लामी वास्तुशैली का मिश्रण है। यहां का लंगर प्रतिदिन 1 लाख से अधिक लोगों को मुफ्त भोजन प्रदान करता है, जो समानता और सेवा का प्रतीक है।

  1. गुरुवायुर मंदिर, केरल

गुरुवायुर में स्थित यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है और ‘दक्षिण की द्वारका’ कहलाता है। कुल संपत्ति 2,500 करोड़ रुपये है, जिसमें 271 एकड़ भूमि, 2,053 करोड़ की सावधि जमा, 124 किलोग्राम शुद्ध सोना, 72 किलोग्राम जड़ित सोना और 6,073 किलोग्राम चांदी शामिल हैं। वार्षिक आय लगभग 400 करोड़ रुपये है। 5,000 वर्ष पुराना माना जाने वाला यह मंदिर भगवान कृष्ण की आज्ञा पर उद्धव द्वारा स्थापित हुआ। केरल देवस्वम बोर्ड द्वारा संचालित, यह हाथी शिविर, आध्यात्मिक स्कूल और विवाह हॉल चलाता है।

  1. सिद्धिविनायक मंदिर, महाराष्ट्र

मुंबई के प्रभादेवी में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है। कुल संपत्ति 125 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें 150 किलोग्राम से अधिक सोना शामिल है। वार्षिक आय 133 करोड़ रुपये (2024-25 में) है, जो सेलिब्रिटी दान से बढ़ती है। 1801 में निर्मित, यह मंदिर मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रसिद्ध है और बॉलीवुड सितारों तथा राजनेताओं का पसंदीदा है। ट्रस्ट अस्पताल, छात्रवृत्तियां और गरीबों के लिए दान चलाता है।

  1. सबरीमाला मंदिर, केरल

पथनमथिट्टा के जंगलों में स्थित सबरीमाला मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है। कुल संपत्ति 245 करोड़ रुपये है, जिसमें 227.8 किलोग्राम सोना, 2,994 किलोग्राम चांदी और सावधि जमा शामिल हैं। वार्षिक आय 320 करोड़ रुपये (2023 सीजन में) है। श्रद्धालुओं को 41 दिनों की व्रत रखना पड़ता है। दुनिया की सबसे बड़ी वार्षिक तीर्थयात्राओं में से एक, यह मंदिर वर्ष में सीमित समय के लिए खुलता है और 1 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आते हैं।

  1. जगन्नाथ मंदिर, ओडिशा

पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर भगवान जगन्नाथ, बालभद्र और सुभद्रा को समर्पित है। कुल संपत्ति 150 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें ‘सुना बेशा’ आभूषण और विशाल भूमि शामिल हैं। वार्षिक दान त्योहारों में करोड़ों में होता है। 12वीं शताब्दी में राजा अनंतवर्मन चोडगंगा द्वारा निर्मित, यह चारधाम में से एक है। रथ यात्रा के लिए प्रसिद्ध, जहां विशाल रथों पर देवताओं को घुमाया जाता है। रसोई दुनिया की सबसे बड़ी है, जो 1 लाख लोगों को भोजन देती है।

  1. काशी विश्वनाथ मंदिर, उत्तर प्रदेश

वाराणसी में गंगा तट पर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। कुल संपत्ति 6 करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन हाल के पुनर्निर्माण से बढ़ी है। वार्षिक आय लगभग 100 करोड़ रुपये है (2023-24 में 83.34 करोड़)। कई बार नष्ट और पुनर्निर्मित, यह मंदिर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना से नया रूप ले चुका है। हिंदुओं के लिए मोक्ष का द्वार माना जाता है और लाखों श्रद्धालु आते हैं।

ये मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि सामाजिक कल्याण में भी योगदान देते हैं। उनकी संपत्ति श्रद्धालुओं की भक्ति का प्रमाण है, जो सदियों से संचित हो रही है।

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