By: Ravindra Sikarwar
ग्वालियर: साइबर अपराधियों ने एक बार फिर अपनी नई और खतरनाक तकनीक से सबको चौंका दिया है। शहर के दूरदराज के गांव में रहने वाले एक साधारण किसान राजेंद्र पाल के बैंक खाते से महज कुछ मिनुटों में दस लाख रुपए गायब हो गए, जबकि उन्हें न तो कोई फर्जी लिंक पर क्लिक करने की याद है, न कोई संदिग्ध कॉल आया, न एसएमएस आया और न ही उनका मोबाइल फोन एक पल के लिए भी बंद हुआ। सबसे दुखद बात यह है कि यह पूरी रकम उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए सालों की मेहनत से जोड़ी थी।
घटना उस समय सामने आई जब राजेंद्र पाल अपनी बेटी की शादी की तैयारियों के लिए बैंक गए और खाता चेक करवाया। काउंटर पर मौजूद कर्मचारी ने बताया कि खाते में सिर्फ कुछ सौ रुपए बचे हैं। यह सुनकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत पासबुक अपडेट करवाई तो पता चला कि पिछले कुछ दिनों में उनके खाते से 9 लाख 98 हजार रुपए से ज्यादा की राशि अलग-अलग ट्रांजेक्शन में काट ली गई है। सारे पैसे UPI के जरिए निकाले गए थे, लेकिन राजेंद्र पाल को इसका कोई अंदाजा तक नहीं था।
राजेंद्र पाल ने बताया, “मैं तो बस खेत में काम करता हूं। फोन पर सिर्फ अपने बच्चों और रिश्तेदारों से बात करता हूं। कोई लिंक नहीं खोला, कोई OTP नहीं दिया, फिर भी मेरे खाते से सारी जमा-पूंजी चली गई। बेटी की शादी अगले महीने तय है। सारे गहने, कपड़े, दावत का इंतजाम इसी पैसे से करना था। अब सब कुछ खत्म हो गया।”
परेशान किसान अपने बेटे के साथ सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और हाथ जोड़कर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि उनका फोन हमेशा उनके पास ही रहता है। नेटवर्क भी पूरा था। फिर भी ठगों ने कैसे पैसे निकाले, यह समझ से परे है। पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज कर ली है और साइबर सेल को मामले की जांच सौंपी है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ठगी में अपराधी अब “सेशन हाइजैकिंग”, “मैलवेयर इंस्टॉलेशन” या “बैंकिंग ऐप क्लोनिंग” जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार पीड़ित को पता तक नहीं चलता कि उसका फोन हैक हो चुका है। कुछ मामलों में ठग पुराने डिवाइस से लॉग-इन करके या बैंक की आंतरिक कमजोरी का फायदा उठाकर भी पैसे निकाल लेते हैं।
पुलिस का कहना है कि पिछले तीन महीने में ग्वालियर जिले में ही इस तरह की 18 से ज्यादा शिकायतें आ चुकी हैं, जिनमें लोगों के खातों से पैसे गायब हो गए, बिना किसी OTP या लिंक क्लिक के। ज्यादातर पीड़ित ग्रामीण इलाके के हैं और उनकी जमा-पूंजी शादी-ब्याह या इलाज के लिए रखी गई थी।
राजेंद्र पाल की आंखों में आंसू हैं। वे बार-बार यही कह रहे हैं, “स “मैंने तो कभी किसी को अपना पासवर्ड या OTP तक नहीं बताया। फिर मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?” उनकी बेटी की शादी अब संकट में पड़ गई है। रिश्तेदारों ने थोड़ी-बहुत मदद का भरोसा दिया है, लेकिन दस लाख की कमी कैसे पूरी होगी, यह किसी को नहीं पता।
साइबर क्राइम विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि बैंकिंग ऐप हमेशा ऑफिशियल स्टोर से डाउनलोड करें, अनजान ऐप्स न इंस्टॉल करें, फोन में अच्छा एंटीवायरस रखें और समय-समय पर अपना UPI पिन बदलते रहें। साथ ही अगर खाते में कोई असामान्य हरकत दिखे तो तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करें।
फिलहाल पुलिस ने ठगों की तलाश शुरू कर दी है। ट्रांजेक्शन जिस खाते में गए हैं, उन्हें फ्रीज करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन अनुभव बताता है कि ज्यादातर मामलों में पैसे वापस मिलना मुश्किल होता है। राजेंद्र पाल जैसे सैकड़ों लोग अब सिर्फ न्याय और अपने पैसे की आस में दर-दर भटक रहे हैं।
