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By: Ravindra Sikarwar

खाने की तीव्र इच्छा या क्रेविंग्स हर किसी के साथ होती हैं। कभी मीठा खाने का मन करता है, तो कभी नमकीन या चॉकलेट का। लेकिन क्या ये क्रेविंग्स सिर्फ मन की जिद हैं या शरीर कुछ संकेत दे रहा है? कई लोग मानते हैं कि ये पोषक तत्वों की कमी का इशारा हो सकती हैं, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से ये ज्यादातर मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक या आदतों से जुड़ी होती हैं। इस लेख में हम समझेंगे कि क्रेविंग्स के पीछे क्या कारण हो सकते हैं और ये स्वास्थ्य से कैसे जुड़ी हैं।

क्रेविंग्स क्या हैं और क्यों होती हैं?

क्रेविंग्स वह मजबूत इच्छा है जब आप किसी खास खाने की चीज के बारे में सोचते रहते हैं और उसे खाने तक चैन नहीं पड़ता। ये आमतौर पर उच्च कैलोरी वाली चीजों जैसे चॉकलेट, आइसक्रीम, चिप्स या फास्ट फूड के लिए होती हैं।

कारण कई हो सकते हैं:

  • तनाव या भावनाएं: दुखी या तनावग्रस्त होने पर ब्रेन डोपामाइन हार्मोन रिलीज करता है, जो खुशी देता है। मीठी या फैट वाली चीजें ये खुशी जल्दी देती हैं।
  • नींद की कमी या थकान: कम सोने से हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, जिससे भूख बढ़ती है।
  • डाइटिंग या प्रतिबंध: अगर आप किसी चीज को पूरी तरह रोकते हैं, तो उसकी क्रेविंग और बढ़ जाती है।
  • हार्मोनल बदलाव: महिलाओं में पीरियड्स या प्रेग्नेंसी में क्रेविंग्स आम हैं।
  • पोषक तत्वों की कमी: कुछ मामलों में हां, लेकिन ये दुर्लभ है। ज्यादातर रिसर्च कहती है कि क्रेविंग्स पोषण की कमी से सीधे नहीं जुड़ीं।

सामान्य क्रेविंग्स और उनके संभावित अर्थ

यहां कुछ आम क्रेविंग्स और उनके पीछे के संभावित कारण बताए गए हैं। ध्यान दें कि ये हमेशा सटीक नहीं होते और डॉक्टर से जांच जरूरी है।

चॉकलेट की क्रेविंग

चॉकलेट सबसे आम क्रेविंग है। कई लोग कहते हैं कि ये मैग्नीशियम की कमी का संकेत है, क्योंकि कोको में मैग्नीशियम होता है। लेकिन अक्सर ये तनाव कम करने या मूड अच्छा करने की चाहत होती है। मैग्नीशियम की कमी होने पर थकान, मांसपेशियों में दर्द भी हो सकता है।

क्या करें? बादाम, पालक या डार्क चॉकलेट (कम शुगर वाली) ट्राई करें।

मीठी चीजों की क्रेविंग

केक, आइसक्रीम या मिठाइयों का मन करना ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव, क्रोमियम या ट्रिप्टोफैन की कमी से जुड़ा माना जाता है। लेकिन ज्यादातर ये ऊर्जा की त्वरित जरूरत या भावनात्मक खालीपन से होता है।

क्या करें? फल जैसे केला या सेब खाएं, जो नैचुरल शुगर देते हैं।

नमकीन चीजों की क्रेविंग

चिप्स या नमकीन स्नैक्स का मन करना डिहाइड्रेशन या इलेक्ट्रोलाइट्स (सोडियम) के असंतुलन का संकेत हो सकता है। तनाव में भी कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ने से नमकीन की चाहत होती है।

क्या करें? ज्यादा पानी पिएं और नट्स या एवोकाडो जैसे हेल्दी ऑप्शन चुनें।

कार्बोहाइड्रेट्स या ब्रेड की क्रेविंग

पास्ता, ब्रेड या चावल का मन करना सेरोटोनिन (खुशी का हार्मोन) बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। ये अक्सर कम नींद या डिप्रेशन से जुड़ा होता है।

क्या करें? होल ग्रेन्स जैसे ओट्स या ब्राउन राइस लें।

आइस या गैर-खाने की चीजों की क्रेविंग (पिका)

बर्फ चबाने या मिट्टी खाने की इच्छा आयरन की गंभीर कमी का संकेत हो सकती है। ये प्रेग्नेंसी में भी आम है और डॉक्टर से तुरंत जांच करवाएं।

वैज्ञानिक क्या कहते हैं: पोषण की कमी या मनोवैज्ञानिक कारण?

लोकप्रिय मान्यता है कि क्रेविंग्स शरीर की पोषक तत्वों की जरूरत बताती हैं, लेकिन कई अध्ययनों से पता चलता है कि ये ज्यादातर मनोवैज्ञानिक होते हैं। हम उच्च कैलोरी वाली चीजें क्रेव करते हैं, जो पोषण से ज्यादा खुशी देती हैं। असली कमी होने पर जैसे आयरन की कमी में पिका होता है, लेकिन आम क्रेविंग्स नहीं।

फिर भी, अगर क्रेविंग्स लगातार हैं और अन्य लक्षण जैसे थकान, बाल झड़ना आदि हैं, तो ब्लड टेस्ट करवाएं।

क्रेविंग्स को कैसे नियंत्रित करें?

  • संतुलित आहार लें: प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स ज्यादा खाएं।
  • नियमित व्यायाम और अच्छी नींद लें।
  • तनाव प्रबंधन: मेडिटेशन या योग ट्राई करें।
  • पानी ज्यादा पिएं और भोजन छोड़ें नहीं।
  • अगर क्रेविंग आए तो हेल्दी विकल्प चुनें या 10 मिनट इंतजार करें – अक्सर चली जाती है।

क्रेविंग्स सामान्य हैं, लेकिन अगर ये जीवन प्रभावित कर रही हैं तो विशेषज्ञ से सलाह लें। अपने शरीर के संकेतों को समझकर स्वस्थ रहें!

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