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By: Ravindra Sikarwar

कर्नाटक के हावेरी जिला अस्पताल में मंगलवार 19 नवंबर को एक बेहद दर्दनाक और चौंका देने वाली घटना सामने आई, जहां 30 वर्षीय रूपा गिरीश करबन्नानवर ने प्रसव पीड़ा बढ़ने पर अस्पताल के कॉरिडोर में ही बच्चे को जन्म दिया और मेडिकल सहायता न मिलने के कारण नवजात फर्श पर गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई—इस पूरे मामले ने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार के अनुसार रूपा को तीव्र प्रसव पीड़ा के साथ अस्पताल लाया गया था, लेकिन महिला एवं बाल चिकित्सा विंग में बेड उपलब्ध न होने के कारण स्टाफ ने उसे लेबर वॉर्ड में भर्ती करने से इनकार कर दिया और उसे बाहर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसी बीच दर्द बढ़ने पर रूपा टॉयलेट जाने का प्रयास कर रही थी, तभी कॉरिडोर में ही प्रसव हो गया और समय पर कोई डॉक्टर या नर्स मदद के लिए नहीं पहुंची, जिसके चलते नवजात फर्श पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने अस्पताल कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। परिवार का कहना है कि जब वे अस्पताल पहुंचे, तब रूपा अत्यधिक दर्द में थी, लेकिन किसी डॉक्टर या नर्स ने उसकी स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया; परिजन बार-बार स्टाफ से उसे तुरंत भर्ती करने की गुहार लगाते रहे, मगर कर्मचारी मोबाइल फोन में व्यस्त रहे और समय रहते सहायता नहीं दी, जिसके कारण बच्चे की जान चली गई। दूसरी ओर जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. पी. आर. हवनूर ने शुरुआती टिप्पणी में कहा कि पहली नजर में लापरवाही स्पष्ट नहीं लगती, लेकिन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि महिला सुबह 10:30 बजे अस्पताल पहुंची थी और उस समय वॉर्ड में पहले से तीन मरीज मौजूद थे, इसलिए उससे इंतजार करने का अनुरोध किया गया था। डॉक्टर के अनुसार, रूपा आठ महीने की गर्भवती थी और उसने बताया था कि सोमवार से भ्रूण में कोई हलचल महसूस नहीं हो रही थी, इसलिए यह भी आशंका है कि प्रसव से पहले ही नवजात की मृत्यु हो चुकी हो—हालांकि इस दावे की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई है, जिसमें डिप्टी कमिश्नर, चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर, चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर, गायनेकोलॉजिस्ट और जिला सर्जन शामिल हैं, और यह समिति पूरे घटनाक्रम की जांच कर यह तय करेगी कि क्या वास्तव में अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के कारण यह दुखद घटना हुई या परिस्थितियाँ कुछ और थीं। इस हादसे ने राज्य में मेडिकल सुविधाओं और अस्पताल प्रशासन की ज़िम्मेदारी पर बड़ी बहस छेड़ दी है, जहां आम लोगों की उम्मीद होती है कि संकट की घड़ी में अस्पताल उन्हें सहारा देगा, लेकिन इस घटना ने स्वास्थ्य तंत्र की खामियों को फिर उजागर कर दिया है।