Report by: Ajit Kumar Thakur
Supaul : जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। बुधवार देर शाम अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। परिजनों का सीधा आरोप है कि अगर डॉक्टर समय रहते इलाज शुरू कर देते, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना ने अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
“कागजों के फेर में अटकी रही जान”
Supaul मृतका की पहचान किशनपुर थाना क्षेत्र के मोधरा राजपुर पंचायत (वार्ड नंबर 4) निवासी बीवी शयरून निशा (पति स्वर्गीय मोहम्मद जहूर) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, महिला को अचानक सीने में दर्द और हल्की उल्टी की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में सदर अस्पताल लाया गया।
परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी वार्ड पहुँचने के बाद भी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक अपनी कुर्सी से नहीं उठे। गंभीर हालत में तड़पती मरीज को देखने के बजाय, डॉक्टर पुराने इलाज के पर्चे (पुर्जे) की मांग करने लगे। परिजनों का कहना है कि जब तक वे पुराने कागजात ढूँढकर वापस आए, तब तक उचित उपचार के अभाव में महिला ने दम तोड़ दिया। इस संवेदनहीनता को देख परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में नारेबाजी शुरू कर दी।
पुलिस और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला
Supaul अस्पताल में हंगामे और अफरा-तफरी की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुँची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अस्पताल पहुँचे। आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर और उचित जांच का आश्वासन देकर मामला शांत कराया गया। काफी मशक्कत के बाद माहौल नियंत्रित हुआ, जिसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल
Supaul यह पहली बार नहीं है जब सदर अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही के आरोप लगे हैं। परिजनों ने मांग की है कि दोषी चिकित्सक के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी और को अपनों को न खोना पड़े। दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन ने मामले की आंतरिक जांच की बात कही है।
घटना के बाद पूरे इलाके में गम और गुस्से का माहौल है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कागजी खानापूर्ति से आगे बढ़कर क्या वास्तव में स्वास्थ्य सेवाओं में कोई सुधार लाता है या नहीं।
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