by-Ravindra Sikarwar
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा वन्यजीव केंद्र के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आदेश दिया है। यह एक महत्वपूर्ण कानूनी मामला है। इस एसआईटी को 12 सितंबर, 2025 तक अपनी जांच पूरी करके रिपोर्ट सौंपनी है और मामले को 15 सितंबर, 2025 को फिर से सूचीबद्ध किया गया है। एसआईटी केंद्र में कथित वित्तीय और पर्यावरणीय अनियमितताओं, जानवरों के अवैध अधिग्रहण और जानवरों के प्रति दुर्व्यवहार जैसे आरोपों की जांच करेगी।
एसआईटी जांच के प्रमुख विवरण:
सदस्य: एसआईटी में तीन प्रमुख सदस्यों को शामिल किया गया है:
- न्यायमूर्ति राघवेंद्र चौहान (रिटायर्ड)
- हेमंत नागराले (पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त)
- अनीश गुप्ता (अतिरिक्त आयुक्त, सीमा शुल्क) यह टीम अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए सभी आरोपों की गहराई से जांच करेगी।
जांच का दायरा: एसआईटी को कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है, जिनमें शामिल हैं:
- जानवरों का अधिग्रहण: यह जांच की जाएगी कि केंद्र ने जानवरों को किस प्रकार और किन स्रोतों से प्राप्त किया।
- कानूनी अनुपालन: एसआईटी यह सुनिश्चित करेगी कि वनतारा ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और चिड़ियाघर के नियमों का पालन किया है या नहीं।
- अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन: जांच में यह भी देखा जाएगा कि लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) और अन्य आयात-निर्यात कानूनों का पालन किया गया है या नहीं।
रिपोर्ट की समय सीमा: सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को अपनी जांच रिपोर्ट 12 सितंबर, 2025 तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह एक सख्त समय सीमा है जो मामले की तात्कालिकता को दर्शाती है।
आगे की प्रक्रिया: रिपोर्ट पर विचार करने के लिए, मामले को 15 सितंबर, 2025 को कोर्ट में फिर से सूचीबद्ध किया गया है। उस दिन एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई का निर्णय लेगा।
संदर्भ और पृष्ठभूमि:
यह आदेश दो अलग-अलग याचिकाओं के बाद आया है। इन याचिकाओं में समाचार रिपोर्टों और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की शिकायतों का हवाला दिया गया था, जिसमें वनतारा के संचालन को लेकर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की गई थीं। वनतारा ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह जांच में पूरी तरह से सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
