President Droupadi MurmuPresident Droupadi Murmu
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रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह

President Droupadi Murmu : देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने दो दिवसीय विशेष छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। इस हाई-प्रोफाइल प्रवास के दौरान राष्ट्रपति राजधानी रायपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में सिंधी समाज की महान आध्यात्मिक संत माता साहिब हासी देवी की द्विशताब्दी (200वीं) जयंती के अवसर पर एक विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट का विमोचन करेंगी। इसके अगले दिन उनके बस्तर के जगदलपुर पहुंचने और वहां की प्राचीन लोकतांत्रिक परंपरा के प्रतीक ‘मुरिया दरबार’ में शिरकत करने का कार्यक्रम है।

कौन थीं माता साहिब हासी देवी और क्या है सिक्के की खासियत?

माता साहिब हासी देवी सिंध प्रांत के खानपुर महर में जन्मी थीं और वे रायपुर के प्रसिद्ध ‘शदाणी दरबार’ की पंचम पीठाधीश्वर थीं। मात्र 26 वर्ष की आयु में इस पद को संभालने के बाद उन्होंने लगभग 57 वर्षों तक समाज को सही दिशा दिखाई और अपना पूरा जीवन मानव सेवा, शिक्षा व परोपकार के लिए समर्पित कर दिया। 30 अप्रैल 1909 को उनका महाप्रयाण हुआ था।

उनकी 200वीं जयंती के अवसर पर केंद्र सरकार द्वारा 35 ग्राम वजनी 200 रुपए का विशेष स्मारक सिक्का जारी किया जा रहा है। इस सिक्के में 50 प्रतिशत चांदी, 40 प्रतिशत तांबा, 5 प्रतिशत निकल और 5 प्रतिशत जस्ता शामिल है, जिसे उनके महान कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर सच्ची श्रद्धांजलि माना जा रहा है।

बस्तर के ऐतिहासिक ‘मुरिया दरबार’ की अनूठी परंपरा

रायपुर के कार्यक्रमों के बाद राष्ट्रपति जगदलपुर पहुंचेंगी, जहां वे विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे के सबसे आकर्षण और महत्वपूर्ण अंग ‘मुरिया दरबार’ में हिस्सा लेंगी। बस्तर दशहरा देश का सबसे लंबा 75 दिनों तक चलने वाला पर्व है। इस दौरान आयोजित होने वाला मुरिया दरबार रियासत काल से चली आ रही राजा और प्रजा के बीच सीधे संवाद की प्राचीन परंपरा का जीवंत उदाहरण है।

ऐतिहासिक रूप से इस दरबार में राजा विभिन्न परगनों के आदिवासी प्रतिनिधियों, मांझी और चालकियों से मिलकर समस्याएं सुनते थे। आज राजशाही खत्म होने के बाद भी यह परंपरा सिरहासार भवन में पूरी जीवंतता के साथ कायम है, जहां प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज के साथ क्षेत्रीय विकास और संस्कृति के संरक्षण पर चर्चा करते हैं।

राष्ट्रपति के दौरे से सियासी हलचल और सांस्कृतिक महत्व

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के इस दो दिवसीय दौरे से छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और सांस्कृतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। एक तरफ जहां आध्यात्मिक संत की जयंती पर राष्ट्रीय स्तर का स्मारक सिक्का जारी किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बस्तर की मूल आदिवासी संस्कृति और लोकतंत्र की जननी कहे जाने वाले मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की उपस्थिति देश की विविधता और सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।

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