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Report by: Rishabh Kumar

Nawada : सरकारें ग्रामीण अंचलों में सुगम आवागमन के लिए करोड़ों रुपये के बजट की स्वीकृति देती हैं, लेकिन धरातल पर लापरवाही की तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां करती हैं। नवादा जिले के रजौली प्रखंड अंतर्गत हरदिया पंचायत के चोरडीहा गांव में बन रहा पुल इसका जीवंत उदाहरण है। जिस पुल को साल भर में पूरा हो जाना चाहिए था, वह छह साल बीत जाने के बाद भी अपनी पूर्णता की राह देख रहा है।

2018 में मिली थी स्वीकृति, पर स्थिति जस की तस

Nawada चोरडीहा नदी पर इस पुल के निर्माण की स्वीकृति 31 दिसंबर 2018 को दी गई थी। अनुबंध के अनुसार, निर्माण एजेंसी को इसे 30 दिसंबर 2019 तक पूरा कर लेना था। आज 2024 बीतने को है, लेकिन पुल का ढांचा अभी भी अधूरा खड़ा है।

करोड़ों की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट में हो रही देरी ने न केवल सरकारी खजाने पर बोझ डाला है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। निर्माण स्थल पर कार्य की प्रगति या लागत से संबंधित कोई सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, जो नियमों की अनदेखी और पारदर्शिता के अभाव को दर्शाता है।

ठेकेदार और अधिकारियों के गठजोड़ का आरोप

Nawada स्थानीय ग्रामीणों में इस देरी को लेकर गहरा असंतोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की उदासीनता के कारण काम कछुआ गति से चल रहा है। चर्चा यह भी है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कथित ‘साठगांठ’ के चलते समय सीमा का उल्लंघन होने के बावजूद कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।

बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। नदी में पानी का स्तर बढ़ते ही चोरडीहा गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है, जिससे मरीजों को अस्पताल ले जाने और बच्चों को स्कूल जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

कानूनी पेच या प्रशासनिक बहानेबाजी?

Nawada इस पूरे मामले पर जब ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार से बात की गई, तो उन्होंने काम बंद होने का कारण कानूनी अड़चन को बताया। उनके अनुसार, मामला फिलहाल न्यायालय (Court) में लंबित है, जिसकी वजह से निर्माण कार्य को रोकना पड़ा है।

हालांकि, ग्रामीण इस तर्क से संतुष्ट नहीं हैं। उनका सवाल है कि क्या छह वर्षों तक एक पुल का मामला सुलझाया नहीं जा सकता? शासन-प्रशासन की इस लेत-लतीफी के बीच चोरडीहा के ग्रामीण आज भी एक अदद सुरक्षित रास्ते के लिए तरस रहे हैं।

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