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Report by: Rishabh Kumar

Nawada : बिहार के नवादा जिले से सटे सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों जंगली हाथियों का खौफ चरम पर है। झारखंड के जंगलों से भटक कर आए हाथियों ने रजौली प्रखंड के रिहायशी इलाकों में दस्तक दे दी है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। रविवार की रात रजौली नगर के मसाई मोहल्ला में एक विशालकाय जंगली हाथी के प्रवेश करने से अफरा-तफरी मच गई। आलम यह है कि ग्रामीण हाथियों के हमले के डर से पूरी रात सो नहीं पा रहे हैं और खुद की सुरक्षा के लिए रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं।

रिहायशी इलाकों में तोड़फोड़ और दहशत का माहौल

Nawada हाथी को सबसे पहले हरदिया के जंगली क्षेत्र में देखा गया था, जिसके बाद वह रिहायशी इलाके मसाई मोहल्ला तक पहुँच गया। यहाँ हाथी ने न केवल फसलों को नुकसान पहुँचाया, बल्कि एक घर के दरवाजे को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। गनीमत रही कि उस वक्त घर के सदस्य सतर्क थे, जिससे किसी बड़ी जनहानि की खबर नहीं आई।

ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही ठंड बढ़ती है, हाथियों का झुंड भोजन की तलाश में भटकते हुए बस्तियों की ओर रुख कर लेता है। इस बार भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है, लेकिन विभाग की ओर से कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं।

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठते गंभीर सवाल

Nawada स्थानीय लोगों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगली हाथियों के भटकाव और उनके रिहायशी इलाकों में आने की पूर्व सूचना होने के बावजूद विभाग कभी सतर्क नहीं रहता।

अक्सर यह देखा गया है कि जब हाथी जान-माल का भारी नुकसान कर देते हैं, तब जाकर वन विभाग की टीम हरकत में आती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हाथियों को वापस जंगल की ओर खदेड़ने के लिए विशेषज्ञ टीम बुलाई जाए और प्रभावित इलाकों में रात के समय गश्त बढ़ाई जाए, ताकि लोग निर्भय होकर अपने घरों में सो सकें।

जंगल छोड़ बस्तियों की ओर क्यों आ रहे हैं गजराज?

Nawada वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार, जंगलों की अंधाधुंध कटाई और प्राकृतिक भोजन की कमी हाथियों के पलायन का मुख्य कारण है। हाथी को मुख्य रूप से बरगद, पीपल और गन्ने जैसी फसलें पसंद हैं। जंगलों में इन पेड़ों की घटती संख्या के कारण हाथी भोजन की तलाश में गाँवों का रुख कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, अपने झुंड से बिछड़े हुए हाथी अक्सर अधिक आक्रामक और हिंसक हो जाते हैं, जो ज्यादा उत्पात मचाते हैं। नवादा के सीमावर्ती क्षेत्रों में झारखंड से आने वाले इन हाथियों के लिए कोई ‘कॉरिडोर’ या सुरक्षा घेरा न होना भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है।

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