Mumbai : भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। सप्ताह के पहले ही दिन दलाल स्ट्रीट पर जबरदस्त बिकवाली का दौर देखने को मिला, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स 2200 अंकों से अधिक लुढ़क गया। इस ऐतिहासिक गिरावट के कारण महज कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों की करीब 12 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खाक हो गई। बाजार में मचे इस हाहाकार ने निवेशकों के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया है और चारों ओर लाल निशान का दबदबा नजर आ रहा है।
वैश्विक और घरेलू कारणों का घातक मिश्रण
Mumbai बाजार के जानकारों का मानना है कि इस भारी गिरावट के पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि कई वैश्विक और घरेलू कारकों का मेल है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में मंदी की आहट ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को डरा दिया है।
इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में जापानी येन (Japanese Yen) के ‘कैरी ट्रेड’ के अनवाइंड होने और एशियाई बाजारों में आई भारी गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखा। घरेलू स्तर पर भी ऊंचे वैल्यूएशन और कुछ बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों के उम्मीद के मुताबिक न रहने से बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिससे सूचकांक ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध: 12 लाख करोड़ का नुकसान
Mumbai बीएसई (BSE) पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Cap) आज की गिरावट के बाद नाटकीय रूप से कम हो गया है। आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को बाजार बंद होने के वक्त जो मार्केट कैप था, वह आज की गिरावट के बाद 12 लाख करोड़ रुपये कम हो गया।
विशेष रूप से बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर की दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 3% से 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। रिटेल निवेशक, जो पिछले कुछ समय से बाजार की तेजी का आनंद ले रहे थे, आज की इस ‘क्रैश’ स्थिति में सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हाल के वर्षों में एक दिन में होने वाली सबसे बड़ी वेल्थ डिस्ट्रक्शन की घटनाओं में से एक है।
पैनिक सेलिंग और आगे की रणनीति: क्या करें निवेशक?
Mumbai बाजार में आई इस अचानक गिरावट ने ‘पैनिक सेलिंग’ (घबराहट में बिक्री) की स्थिति पैदा कर दी। निचले स्तरों पर खरीदारी (Buy on Dips) करने वाले निवेशक भी आज बाजार की गहराई देखकर सहम गए। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को तोड़कर नीचे आ गए हैं।
बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि ऐसी अस्थिर स्थिति में खुदरा निवेशकों को जल्दबाजी में कोई भी बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए। यदि आपका नजरिया लंबी अवधि (Long Term) का है, तो अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में बने रहना बेहतर है। हालांकि, तकनीकी रूप से बाजार अभी कुछ और समय तक दबाव में रह सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि जब तक बाजार में स्थिरता के संकेत न मिलें, तब तक आक्रामक खरीदारी से बचना ही समझदारी होगी।
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