रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Meerut Railway Underpass Accident : उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। मानसून की बारिश के बाद रेलवे अंडरपास में हुआ जलभराव एक तांगा चालक और उसके बेजुबान घोड़े के लिए काल बन गया। पानी की गहराई का सही अंदाजा न होने के कारण यह दर्दनाक हादसा लोहियानगर इलाके के बजौट रेलवे अंडरपास में हुआ, जहाँ दोनों की डूबने से मौके पर ही मौत हो गई।
Meerut Railway Underpass Accident मना करने के बाद भी गहरे पानी में उतरा तांगा
मृतक चालक की पहचान ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र (गणेशपुरी खत्ता रोड) के रहने वाले राकेश सैनी के रूप में हुई है। राकेश एक स्थानीय डेयरी में काम करते थे। शनिवार सुबह वह रोज की तरह अपने घोड़ा-तांगे को लेकर पशुओं के लिए चारा लेने निकले थे।
बिजली बंबा रोड मार्ग पर स्थित इस अंडरपास में बारिश का करीब 10 फीट गहरा पानी जमा था। चश्मदीदों के अनुसार, वहाँ तैनात रेलवे के गैंगमैन ने राकेश को आगे जाने से रोका भी था, लेकिन उन्होंने चेतावनी को अनसुना कर दिया। जैसे ही तांगा गहरे पानी के बीच पहुंचा, वह बुरी तरह फंस गया। राकेश ने मदद के लिए शोर भी मचाया, लेकिन जब तक लोग कुछ समझ पाते और मदद के लिए आगे बढ़ते, तब तक पूरा तांगा और राकेश पानी में समा चुके थे।
Meerut Railway Underpass Accident चौकी प्रभारी ने साहस दिखाकर निकाला शव
हादसे की खबर मिलते ही लोहियानगर थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पानी इतना गहरा और गंदा था कि शव बाहर से दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में फफूंडा चौकी प्रभारी राम शरण ने साहस दिखाया और अपनी टीम के साथ गहरे पानी में उतर गए।
- कड़ी मशक्कत: काफी खोजबीन के बाद पुलिस ने राकेश के शव को पानी से बाहर निकाला।
- रेस्क्यू: बाद में ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों ने मिलकर डूबे हुए घोड़े और तांगे को भी बाहर खींचा।
- शोक में डूबा परिवार: पिता की मौत की खबर मिलते ही राकेश के बेटे संजय और बेटी रजनी रोते-बिलखते मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
Meerut Railway Underpass Accident स्थानीय प्रशासन और व्यवस्था पर उठे सवाल
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद स्थानीय निवासियों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों का आरोप: क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अंडरपास में जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन जल निकासी के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। अंडरपास के पास पर्याप्त सुरक्षा बैरिकेडिंग न होने के कारण ऐसे हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है। यदि वक्त रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।

