Report by: Sanjeev Kumar
Bokaro : जिले के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र से जुड़ी एक गुमशुदगी की जांच अब पुलिस के लिए गले की फांस बन गई है। खूंटाडीह गांव की 18 वर्षीय युवती के लापता होने के मामले में पुलिसिया कार्यशैली और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को वर्चुअल माध्यम से पेश होने का आदेश दिया और पुलिस की बर्बरता पर तीखे सवाल पूछे।

Bokaro थाने में बेरहमी से पिटाई: कोर्ट ने जताई गहरी नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात आई कि गुमशुदा युवती की तलाश के नाम पर पुलिस ने याचिकाकर्ता के रिश्तेदारों के साथ अमानवीय व्यवहार किया है।
- गंभीर चोटें: कोर्ट को सूचित किया गया कि याचिकाकर्ता के चाचा-ससुर को पूछताछ के बहाने पिंडराजोरा थाना बुलाया गया और वहां उनके साथ इतनी बेरहमी से मारपीट की गई कि उनके माथे और शरीर पर गंभीर जख्म हो गए।
- इलाज जारी: पीड़ित की स्थिति इतनी नाजुक है कि उन्हें वर्तमान में रांची के एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराना पड़ा है।
- अदालत की टिप्पणी: हाईकोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए कहा कि एक पीड़ित परिवार, जो पहले से अपनी बेटी के लापता होने से परेशान है, उसके सदस्य के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सभ्य समाज और कानून की मर्यादा में स्वीकार्य नहीं है।
Bokaro बोकारो SP पर उठते सवाल: अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी
अदालत ने बोकारो पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सीधे तौर पर जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) की जवाबदेही तय की है।
- आपराधिक अवमानना: कोर्ट ने DGP से पूछा कि इस मामले में घोर लापरवाही और उत्पीड़न को देखते हुए बोकारो एसपी के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
- हिरासत का आधार: अदालत ने पुलिस से उस कानूनी आधार की मांग की है, जिसके तहत याचिकाकर्ता के रिश्तेदार को हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई।
- भविष्य की चेतावनी: कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भविष्य में याचिकाकर्ता या उनके परिवार के किसी भी सदस्य को पुलिस द्वारा दोबारा प्रताड़ित किया जाता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी बोकारो एसपी की होगी।
Bokaro बोकारो एसपी का पक्ष: “मारपीट की जानकारी नहीं”
इस पूरे घटनाक्रम पर जब बोकारो एसपी हरविंदर सिंह से पक्ष मांगा गया, तो उन्होंने कहा कि अनुसंधान (Investigation) के दौरान रिश्तेदार को थाने बुलाया जाना प्रक्रिया का हिस्सा था।
- अनभिज्ञता: एसपी ने दावा किया कि उन्हें पूछताछ की जानकारी तो है, लेकिन थाने के भीतर किसी भी प्रकार की मारपीट या शारीरिक प्रताड़ना की सूचना उन तक नहीं पहुँची है।
- जांच का आश्वासन: उन्होंने कहा कि यदि पुलिस अधिकारियों द्वारा ऐसी किसी घटना को अंजाम दिया गया है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि पुलिस की पूरी कार्रवाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही चल रही थी।
Also Read This: Rohtas : बिहार में ‘दुल्हन मंडी’ सिंडिकेट पर प्रहार, बिक्रमगंज के मैरिज हॉल से नाबालिग का रेस्क्यू, 24 हिरासत में

