by-Ravindra Singh Sikarwar
नई दिल्ली: मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील इन दिनों भारत दौरे पर हैं। इस दौरान, उन्होंने सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें भारत और मालदीव के बीच व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई। यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय राजनीतिक वार्ता का हिस्सा है।
साझेदारी के मुख्य बिंदु:
- आर्थिक सहयोग: भारत मालदीव के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक भागीदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में, भारत ने मालदीव को 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता भी प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, सीमा पार व्यापार के लिए स्थानीय मुद्रा के उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है।
- समुद्री सुरक्षा: मालदीव की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। दोनों देश समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें संयुक्त गश्त, आपदा राहत और बचाव अभियान शामिल हैं। भारत ने मालदीव को तटीय रडार प्रणाली भी सौंपी है।
- विकास परियोजनाएं: भारत मालदीव में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है, जैसे कि पुलों का निर्माण और हवाई संपर्क में सुधार।
मालदीव के विदेश मंत्री की यात्रा का महत्व:
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील की यह इस साल तीसरी भारत यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संवाद और सहयोग की निरंतरता को दर्शाता है। इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है।
आगे की राह:
भारत और मालदीव के बीच मजबूत साझेदारी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। आर्थिक और समुद्री सुरक्षा सहयोग को और बढ़ाने से दोनों देशों को लाभ होगा और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान मिलेगा।
