By: Ravindra Sikarwar
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपीबीएसई) ने बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नकल और अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के चुनिंदा निजी परीक्षा केंद्रों पर हाई-टेक सीसीटीवी सिस्टम लगाया जा रहा है।
विषय संशोधन की अंतिम तिथि: 10 जनवरी तक अवसर
परीक्षार्थियों को विषय में बदलाव करने का मौका 10 जनवरी तक दिया गया है। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी, लेकिन निःशुल्क नहीं। प्रत्येक विषय के संशोधन के लिए 500 रुपये की लेट फीस जमा करनी होगी। अन्य नियम पूर्व जारी निर्देशों के अनुसार ही लागू रहेंगे।
निजी केंद्रों को बनाया जा रहा डिजिटल सुरक्षित
इस वर्ष प्रदेश में कुल 3,856 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 226 निजी केंद्रों को इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। इन केंद्रों से पिछले वर्षों में सामूहिक नकल की सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई थीं। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था सफल रही, तो भविष्य में इसे प्रदेश के सभी केंद्रों पर विस्तार दिया जाएगा।
पहली बार लाइव स्ट्रीमिंग से निगरानी
इस बार परीक्षा केंद्रों से सीधी लाइव मॉनिटरिंग की सुविधा शुरू की जा रही है। सीसीटीवी कैमरे सिर्फ परीक्षा कक्षों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि गलियारे, प्रवेश-निकास द्वार और प्राचार्य कक्ष तक सभी क्षेत्रों को कवर करेंगे। इससे परीक्षा प्रक्रिया के हर महत्वपूर्ण हिस्से पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी। पहले यह सुविधा केवल मूल्यांकन केंद्रों तक थी, लेकिन अब इसे परीक्षा केंद्रों तक बढ़ाया गया है।
इन जिलों पर विशेष फोकस
प्रारंभिक चरण में उन जिलों को प्राथमिकता दी गई है, जहां नकल की घटनाएं सबसे अधिक रिपोर्ट हुई हैं। इनमें इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, भिंड, मुरैना और रीवा जैसे जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सर्वे चल रहा है, ताकि कैमरों की संख्या और स्थापना स्थान निर्धारित किए जा सकें।
16 लाख से ज्यादा छात्रों की परीक्षा फरवरी से
इस सत्र में एमपी बोर्ड परीक्षाओं में लगभग 16 लाख से अधिक छात्र भाग लेंगे, जिनमें करीब 9 लाख हाईस्कूल और 7 लाख हायर सेकंडरी के विद्यार्थी हैं। परीक्षाएं फरवरी महीने से संपूर्ण प्रांत में एक साथ शुरू होंगी। बोर्ड का लक्ष्य है कि डिजिटल निगरानी से परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बने।
