DelhiDelhi
Spread the love

Delhi : देश में एक बार फिर निपाह वायरस की मौजूदगी ने स्वास्थ्य तंत्र और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। साल 2026 की शुरुआत में पश्चिम बंगाल के बारासात और कोलकाता में स्वास्थ्य कर्मियों के संक्रमित होने की खबर सामने आने के बाद सतर्कता तेज कर दी गई है। अब तक राज्य में कई मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें डॉक्टर और नर्स शामिल हैं। कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी द्वारा संक्रमण की पुष्टि के बाद केंद्र और राज्य सरकारें अलर्ट मोड में आ गई हैं।

Delhi कैसे फैलता है निपाह वायरस

निपाह वायरस एक जूनोटिक संक्रमण है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। फल खाने वाले चमगादड़ और सूअर इसके प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। चमगादड़ों की लार, मूत्र या मल से दूषित फल, भोजन या पानी इसके संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से भी यह वायरस फैल सकता है। हालांकि यह कोविड-19 की तरह हवा से तेजी से नहीं फैलता, लेकिन नजदीकी संपर्क में आने पर व्यक्ति से व्यक्ति में संक्रमण संभव है। यही कारण है कि संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों को क्वारंटाइन किया जा रहा है।

Delhi लक्षण और खतरे की गंभीरता

निपाह वायरस के लक्षण शुरू में सामान्य बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान जैसे हो सकते हैं, जिससे अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कुछ ही दिनों में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। सांस लेने में दिक्कत, निमोनिया, भ्रम की स्थिति, दौरे और कोमा तक की नौबत आ सकती है। इसका सबसे खतरनाक असर मस्तिष्क पर पड़ता है, जिसे एन्सेफेलाइटिस कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस बीमारी की मृत्युदर काफी अधिक है, जो इसे और भी भयावह बनाती है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि अभी तक न तो इसकी कोई प्रभावी दवा है और न ही वैक्सीन।

बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

निपाह वायरस से बचाव के लिए सावधानी ही सबसे मजबूत हथियार है। कच्चे फल या खजूर का रस, खासकर ऐसे फल जिन पर चमगादड़ों के संपर्क के निशान हों, उनका सेवन नहीं करना चाहिए। फल अच्छी तरह धोकर और छीलकर ही खाएं। बीमार व्यक्ति या जानवर के संपर्क से बचें और हाथों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य रूप से उपयोग करना चाहिए।

सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और निगरानी के प्रयासों के साथ-साथ आम नागरिकों की जागरूकता बेहद जरूरी है। निपाह वायरस भले ही चुपचाप फैलता हो, लेकिन समय रहते सतर्कता बरती जाए तो इसके खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है। सही जानकारी, संयम और सावधानी ही इस गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी रास्ता है।

Also Read This: Ghaziabad: ऑनलाइन गेम्स की लत: जब आभासी दुनिया निगलने लगे बचपन