
Editorial : शांति के प्रेमियों के लिए मध्यपूर्व में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रही जंग के 39 वें दिन सीजफायर यानि युद्ध विराम होने की खबर पुरसुकून हो सकती है लेकिन असल सवाल ये है कि क्या ये सीजफायर स्थाई है या इसके पीछे कोई डर है, दबाव है या सिर्फ ये एक ड्रामा है ?
मध्य पूर्व में 27 -28 फरवरी की दरम्यानी रात इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला कर जंग का ऐलान किया था. एक महीने से ज्यादा वक्त से चल रही जंग में तीनों पक्षों के अरबों-खरबों डालर स्वाहा हो चुके हैं. बडे पैमाने पर जनहानि के साथ ही आधी से ज्यादा दुनिया के सामने फ्यूल, फर्टिलाइजर और फूड का संकट खडा हो चुका है. लेकिन अब थम सकती है क्योंकि अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों से शुरू हुई महाजंग में अब सीजफायर का ऐलान हो गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को जो डेडलाइन दी थी, उसके खत्म होने से ठीक पहले ही ट्रंप ने दो हफ्तों के लिए जंग रोकने की घोषणा कर दी.लगातार धमकियों से अचानक पीछे हटते हुए, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोक देंगे, जो कूटनीति के लिए एक संभावित मौके का संकेत है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा,कि-‘ “मैं दो हफ़्तों की के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को रोकने पर सहमत हूं.” उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बातचीत के बाद लिया गया, जिन्होंने उनसे नियोजित हमलों को टालने का आग्रह किया था.खबर है कि ईरान ने भी पाकिस्तान के दो हफ़्तों के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. इस युद्धविराम को देश के नए सुप्रीम लीडर ने मंज़ूरी दे दी है. ईरान ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत को जंग के खत्म होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए.
सीजफायर के 10-सूत्रीय प्रस्ताव में सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाने, पूरी तरह मुआवज़ा देने और ईरान की सभी ज़ब्त संपत्तियों को जारी करने की मांग की गई है. ईरान ने जंग रोकने के लिए 10-सूत्रीय का प्रस्ताव भेजा है. ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने कहा कि वह युद्ध की समाप्ति को तभी स्वीकार करेगा. ईरान की मांगों को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका के साथ शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत होगी.
सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का, राष्ट्रपति ट्रंप की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध, पहले से ही तैयार किया हुआ लग रहा था.
हालांकि, ये दावे अभी तक सत्यापित नहीं हुए हैं, लेकिन इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच बहस को और तेज़ कर दिया है. पाकिस्तान के अधिकारियों ने अब तक इस पर कोई सफ़ाई जारी नहीं की है.
अमेरिका के प्रमुख न्यूज चैनल सीएनएन के मुताबिक, चल रही सीज़फ़ायर बातचीत के हिस्से के तौर पर, ईरान और ओमान को होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों से फ़ीस लेने की अनुमति दी जा सकती है. यह कदम एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि इस स्ट्रेट को लंबे वक्त से एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता रहा है, जहां कोई ट्रांज़िट टोल नहीं लगता था.
कहा जाता है कि ईरान इस टोल वसूली का इस्तेमाल युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण के लिए करेगा, जबकि ओमान की योजनाएं अभी साफ़ नहीं हैं. यह प्रस्ताव दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर फ़्रेमवर्क के तहत चल रही व्यापक चर्चाओं का हिस्सा है और इसका वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर काफ़ी असर पड़ सकता है.
अमरीकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने सी एन एन से बात करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ जंग में ट्रंप की पूरी तरह हार हुई है. उन्होंने सरेंडर कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर कंट्रोल देने पर सहमति दे दी है. यह दुनिया के लिए बहुत ही असाधारण और विनाशकारी बात है.
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़, दामाद जेरेड कुशनर और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद में होने वाली आगामी अमेरिका -ईरान वार्ता में शामिल होंगे. शुक्रवार को होने वाली इस वार्ता का मकसद हाल ही में सहमत हुए दो हफ्ते के संघर्ष विराम और ईरान द्वारा प्रस्तावित 10-सूत्रीय रूपरेखा को आगे बढ़ाना है.
अधिकारियों का कहना है कि यह डेलिगेशन एक बड़े समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने पर काम करेगा, जबकि अस्थायी संघर्ष विराम जारी रहेगा और सभी पक्ष ज़मीन पर सावधानी बरतेंगे.
मजे की बात ये है कि सीजफायर की खबरों के बीच बुधवार की सुबह इज़रायल अभी भी ईरान के अंदर हमले कर रहा था, जबकि व्हाइट हाउस ने कहा था कि इज़रायल दो हफ़्ते के अमेरिका -ईरान सीज़फ़ायर समझौते की शर्तों पर सहमत हो गया है.यह विरोधाभास सीजफायर लागू करने को लेकर चल रही उलझन को दिखाता है, जिसके बारे में अमेरिका और ईरान दोनों ने कहा था कि यह सैद्धांतिक रूप से शुरू हो गया है और इसके बाद बातचीत होगी. जानकारों का कहना है कि कागज़ पर किए गए सीज़फ़ायर के वादे ज़मीन पर सभी लड़ाकू कार्रवाइयों को तुरंत नहीं रोक सकते, खासकर तब जब ऑपरेशनल यूनिट्स को अभी तक कमांड स्ट्रक्चर से औपचारिक आदेश नहीं मिले हैं.
अच्छी बात ये है कि ईरान के सर्वोच्च नेता ने सभी सैन्य इकाइयों को गोलीबारी रोकने का निर्देश दिया है. यह जानकारी सरकारी चैनल आईआरआईबी पर पढ़े गए एक बयान में दी गई, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका के साथ एक अस्थायी युद्धविराम समझौते की घोषणा के लगभग दो घंटे बाद आया. नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह आदेश युद्ध के अंत का संकेत नहीं है. उन्होंने कहा कि जब तक बातचीत के ज़रिए कोई अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.
अब सीज फायर की हकीकत का पता शीघ्र चल जाएगा कि इसके पीछे किसी का डर है, दबाब है या फिर ये सीजफायर दुनिया की आंखों में धूल झोंकने का एक नाटक है.
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