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Report by: Sanjeev Kumar

Bokaro : झारखंड के बोकारो जिले से एक बेहद विचलित करने वाली खबर सामने आई है। बेहतर भविष्य और परिवार की सुख-सुविधाओं के लिए सात समंदर पार दुबई गए एक प्रवासी मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि वहां उनके साथ न केवल अमानवीय व्यवहार किया गया, बल्कि मारपीट कर उनकी हत्या कर दी गई। इस घटना ने एक बार फिर विदेशी धरती पर भारतीय मजदूरों की सुरक्षा और उनके शोषण की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है।

चतरोचट्टी के मनोज महतो की दर्दनाक दास्तां

Bokaro यह मामला चतरोचट्टी थाना क्षेत्र के बड़कीसीधावारा पंचायत का है। यहाँ के निवासी 42 वर्षीय मनोज महतो बीते 8 मार्च को रोजगार के सुनहरे सपने लेकर दुबई रवाना हुए थे। वह वहां एक कंक्रीटिंग कंपनी में श्रमिक के रूप में कार्यरत थे।

परिजनों के अनुसार, मनोज वहां खुश नहीं थे। फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने बताया था कि उन्हें वहां न तो भरपेट भोजन दिया जा रहा था और न ही रहने की उचित व्यवस्था थी। उनकी पत्नी कौशल्या देवी ने रुंधे गले से बताया कि मनोज पर काम का अत्यधिक दबाव डाला जाता था और विरोध करने पर उनके साथ शारीरिक हिंसा की जाती थी।

मारपीट और मौत: शुक्रवार को टूटा दुखों का पहाड़

Bokaro मृतक की पत्नी और सगे-संबंधियों का सीधा आरोप है कि कंपनी के कारिंदों द्वारा मनोज की बेरहमी से पिटाई की गई। इसी मारपीट के दौरान आई गंभीर चोटों के कारण शुक्रवार को उनकी सांसे थम गईं। जैसे ही यह खबर बड़कीसीधावारा पहुँची, पूरे गांव में मातम पसर गया।

परिजनों का कहना है कि एक हंसता-खेलता इंसान सिर्फ दो वक्त की रोटी कमाने गया था, लेकिन उसे कफन में लिपटे होने की खबर आई है। इस घटना ने प्रवासी मजदूरों के अधिकारों पर काम करने वाले संगठनों को भी झकझोर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने इस पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि खाड़ी देशों में झारखंडी मजदूरों का शोषण एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

शव को वतन लाने की गुहार और बढ़ता आक्रोश

Bokaro वर्तमान में मृतक का परिवार गहरे सदमे और आर्थिक तंगी के दोहरे मार झेल रहा है। गांव वालों और परिजनों ने सरकार से निम्नलिखित माँगें की हैं:

  • पार्थिव शरीर की वापसी: मृतक के शव को सम्मानपूर्वक भारत और उनके पैतृक गांव लाने के लिए विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग।
  • निष्पक्ष जांच: दुबई प्रशासन और भारतीय दूतावास के माध्यम से मौत के कारणों की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों को सजा।
  • मुआवजा: पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करना, क्योंकि मनोज ही घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे।

स्थानीय स्तर पर भी लोगों का कहना है कि यदि राज्य में रोजगार के पर्याप्त अवसर होते, तो मनोज जैसे हजारों युवाओं को अपनी जान जोखिम में डालकर पलायन नहीं करना पड़ता।

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