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Report by: Sanjeev Kumar

Bokaro : जिले में सरकारी धन के प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार किया है। उपायुक्त (DC) ने समाहरणालय सभागार में सभी आहरण एवं संवितरण पदाधिकारियों (DDO) के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक का मुख्य एजेंडा सरकारी खजाने से होने वाली निकासी में किसी भी प्रकार की अनियमितता को जड़ से खत्म करना था।

Bokaro तीन वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की होगी गहन जांच

उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2023-24, 2024-25 और 2025-26) के दौरान स्थापना मद से जितनी भी राशि की निकासी हुई है, उसकी विस्तृत जांच की जाए।

  • प्रमाणपत्र अनिवार्य: सभी डीडीओ को यह लिखित प्रमाणपत्र देना होगा कि उन्होंने ‘झारखंड कोषागार संहिता 2016’ की प्रविष्टि संख्या 20 के नियमों का अक्षरशः पालन किया है।
  • वेतन पर रोक: जब तक जांच प्रक्रिया पूरी नहीं होती और संतोषजनक रिपोर्ट नहीं सौंपी जाती, तब तक जिले के कर्मियों के अप्रैल माह के बिल भुगतान पर रोक लगी रहेगी।

Bokaro ट्रेजरी प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव: अब खिड़की से ही जमा होंगे बिल

वित्तीय गड़बड़ियों की गुंजाइश खत्म करने के लिए कोषागार (Treasury) के संचालन नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं:

  • हस्ताक्षर अनिवार्य: अब बिल (विपत्र) के केवल अंतिम पन्ने पर ही नहीं, बल्कि प्रत्येक पन्ने पर डीडीओ के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे।
  • अनधिकृत प्रवेश वर्जित: कोषागार कार्यालय के भीतर किसी भी बाहरी या अनधिकृत व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
  • मैसेंजर सिस्टम: बिल अब सीधे किसी कर्मी द्वारा नहीं, बल्कि केवल अधिकृत ‘ट्रेजरी मैसेंजर’ के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। साथ ही, बिल जमा करने की प्रक्रिया केवल निर्धारित काउंटर (खिड़की) के माध्यम से ही होगी।

Bokaro पारदर्शिता के लिए कैटेगरी और पे-ग्रेड वार तैयार होंगे बिल

उपायुक्त ने भुगतान प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक नया सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया है। अब कर्मियों के बिल कैटेगरी (श्रेणी) और पे-ग्रेड लेवल (वेतनमान स्तर) के अनुसार अलग-अलग तैयार किए जाएंगे।

  • फायदा: इससे ऑडिट और अनुश्रवण (Monitoring) की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। अधिकारियों को यह पता लगाने में कम समय लगेगा कि किस स्तर के कर्मी को कितना भुगतान किया गया है और क्या वह नियमों के अनुरूप है।
  • जांच कमेटी: इस दौरान यह भी जानकारी दी गई कि वित्त विभाग द्वारा संभावित गड़बड़ियों की जांच के लिए पहले ही एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया जा चुका है, जो पूरे मामले पर नजर रख रही है।

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